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दुष्कर्म पीड़िता की गर्भपात की गुहार: महिला की मर्जी के बिना उसे मां बनने को मजबूर नहीं कर सकते- सुप्रीम कोर्ट

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमन तिवारी Updated Fri, 06 Feb 2026 02:11 PM IST
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सार

सुप्रीम कोर्ट ने 30 हफ्ते की गर्भवती युवती को गर्भपात की अनुमति दी है। अदालत ने कहा कि किसी भी महिला को उसकी मर्जी के खिलाफ मां बनने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। जजों ने युवती के अपनी पसंद और शरीर पर अधिकार को सबसे ऊपर माना और अस्पताल को प्रक्रिया पूरी करने का आदेश दिया।

Supreme Court verdict 30 weeks pregnancy termination abortion rights assault women survivor bodily autonomy
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र की एक 18 साल की यौन उत्पीड़न पीड़िता युवती के हक में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने उसे 30 हफ्ते की प्रेग्नेंसी खत्म करने की अनुमति दे दी है। यह युवती तब गर्भवती हुई थी जब वह नाबालिग थी। जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने सुनवाई करते हुए कहा कि युवती की शारीरिक अखंडता और अपनी मर्जी से फैसला लेने का अधिकार सबसे ऊपर है।
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अदालत ने क्या कहा?
अदालत ने स्पष्ट किया कि कोई भी अदालत किसी महिला को अनचाही प्रेग्नेंसी जारी रखने के लिए मजबूर नहीं कर सकता। जजों ने कहा कि अगर कोई महिला बच्चा नहीं चाहती, तो उसे इसके लिए बाध्य करना गलत होगा। बेंच ने युवती के वकील की दलीलों को स्वीकार करते हुए कहा अपीलकर्ता के बच्चे का मेडिकल तरीके से गर्भपात किया जा सकता है।"
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फैसला लेना आसान नहीं था
सुनवाई के दौरान जस्टिस नागरत्ना ने इस मामले की गंभीरता और नैतिक उलझनों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि यह फैसला लेना उनके लिए भी आसान नहीं था, क्योंकि जन्म लेने वाला बच्चा भी एक जीवन ही होता। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि जब लड़की बार-बार कह रही है कि वह बच्चे को जन्म नहीं देना चाहती, तो उसकी इच्छा का सम्मान करना होगा। अदालत ने सवाल किया कि अगर कानून 24 हफ्ते तक गर्भपात की इजाजत देता है, तो विशेष परिस्थितियों में 30 हफ्ते में ऐसा क्यों नहीं हो सकता?



अदालत ने अस्पताल को दिया आदेश
बेंच ने यह भी साफ किया कि मुद्दा यह नहीं है कि संबंध सहमति से बने थे या यह उत्पीड़न का मामला था। मुख्य तथ्य यह है कि होने वाला बच्चा वैध नहीं है और दूसरा, लड़की इस समय एक कठिन स्थिति में है और वह मां नहीं बनना चाहती। अगर मां के हितों को ध्यान में रखना है, तो उसे मर्जी से फैसला लेने का अधिकार दिया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई के जेजे अस्पताल को आदेश दिया है कि वे लड़की की गर्भपात को मेडिकल तरीके से खत्म करें। साथ ही, अस्पताल को सभी जरूरी सुरक्षा नियमों और मेडिकल प्रोटोकॉल का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।

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