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Teesta Setalvad: 'हाईकोर्ट FIR रद्द करने की 'इच्छुक नहीं'; सामूहिक कब्र खोदने के मामले में अदालत की टिप्पणी

Tue, 02 Jan 2024 08:32 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद Published by: ज्योति भास्कर Updated Tue, 02 Jan 2024 08:32 PM IST
सार

2002 के गुजरात दंगों के बाद सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड सुर्खियों में आई थीं। तीस्ता के खिलाफ एक मुकदमे पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने अहम टिप्पणी की। गुजरात उच्च न्यायालय ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि 2006 में शवों को कब्र से निकालने के मामले में, हाईकोर्ट एफआईआर रद्द करने की 'इच्छुक नहीं' है।

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Teesta Setalvad Gujarat High Court not inclined to quash FIR Mass Grave Digging
गुजरात हाईकोर्ट - फोटो : social media

विस्तार

2002 में गोधरा कांड के बाद गुजरात में दंगे हुए थे। करीब 20 साल पहले सुर्खियों में आईं सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड के खिलाफ सामूहिक कब्र खोदने के मामले में एफआईआर दर्ज हुई। मामला हाईकोर्ट तक भी पहुंचा। तीस्ता के खिलाफ मुकदमे की सुनवाई के दौरान अदालत ने सख्त मौखिक टिप्पणी की। हाईकोर्ट की पीठ ने कहा, मुकदमे से जुड़े रिकॉर्ड देखने के बाद, अदालत 2006 में शवों को कब्र से निकालने के मामले में तीस्ता सीतलवाड के खिलाफ दर्ज प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) रद्द करने की 'इच्छुक नहीं' है।
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वकील का आरोप- FIR से तीस्ता का राजनीतिक उत्पीड़न
न्यायमूर्ति संदीप भट्ट ने सीतलवाड के वकील से कहा, रिकॉर्ड देखने के बाद, वह याचिकाकर्ता को राहत देने के इच्छुक नहीं हैं। सोमवार को तीस्ता के वकील ने हाईकोर्ट में कहा, FIR रद्द करने का फैसला लेना अदालत का विशेषाधिकार है। हालांकि, वह दलीलों से अदालत को संतुष्ट करने की कोशिश करेंगे। तीस्ता के खिलाफ कोई अपराध नहीं बनता है। वकील के मुताबिक इस मामले में दर्ज प्राथमिकी उनके मुवक्किल का राजनीतिक उत्पीड़न है।
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9 जनवरी तक स्थगित हुई सुनवाई
सरकारी वकील ने कहा, अतिरिक्त महाधिवक्ता मितेश अमीन मामले में पैरवी करेंगे। संक्षिप्त दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने मामले की सुनवाई 9 जनवरी तक स्थगित कर दी। बता दें कि गुजरात पुलिस ने तीस्ता सीतलवाड पर झूठे सबूत बनाने, कब्रगाह पर अतिक्रमण करने और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप में एफआईआर दर्ज की है।
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18 साल पहले कब्रिस्तान से 28 शव निकाले गए
गौरतलब है कि दिसंबर 2005 में पंचमहल जिले के पंडरवाड़ा के पास एक सामूहिक कब्रिस्तान से 28 शव निकाले जाने का मामला सामने आया था। एफआईआर में नाम शामिल होने के बाद तीस्ता सीतलवाड ने 2017 में एक याचिका दायर की थी। अन्य आरोपियों में तीस्ता के एनजीओ सिटीजन फॉर जस्टिस एंड पीस के पूर्व समन्वयक रईस खान का नाम भी शामिल है। रईस ने दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 164 के तहत तीस्ता के खिलाफ बयान दिया था। उनके खिलाफ शवों को खोद कर निकालने की साजिश के आरोप लगे।

गुजरात की लूनावाड़ा नगर पालिका इस मामले में शिकायतकर्ता है। रईस खान पर आरोप लगने के बाद सीतलवाड के साथ अनबन की खबरें सामने आई। बाद में रईस के बयान के कारण 2011 में उनका नाम भी एफआईआर में आरोपी के रूप में जोड़ा गया।


तीस्ता अभी जमानत पर हैं 
बता दें कि इस मामले में सीतलवाड के अलावा पूर्व आईपीएस अधिकारियों- आरबी श्रीकुमार और संजीव भट्ट सरीखे नाम भी चर्चित रहे हैं। तीस्ता पर गोधरा के बाद हुए दंगों से संबंधित मामलों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य को फंसाने के लिए सबूत गढ़ने के आरोप लगे। गुजरात पुलिस की अपराध शाखा ने जून 2022 में मामला दर्ज कर तीस्ता को गिरफ्तार किया था। फिलहाल तीस्ता जमानत पर बाहर हैं।
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