{"_id":"6a0ec8631459ef1e9e021631","slug":"thane-court-acquitted-mns-chief-raj-thackeray-in-the-2008-railway-recruitment-exam-assault-case-2026-05-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Maharashtra:18 साल पुराने मामले में राज ठाकरे बरी, रेलवे भर्ती बोर्ड के परीक्षार्थियों पर हमले का था आरोप","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Maharashtra:18 साल पुराने मामले में राज ठाकरे बरी, रेलवे भर्ती बोर्ड के परीक्षार्थियों पर हमले का था आरोप
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमन तिवारी
Updated Thu, 21 May 2026 02:25 PM IST
विज्ञापन
सार
ठाणे कोर्ट ने 2008 के रेलवे भर्ती बोर्ड हमला मामले में मनसे प्रमुख राज ठाकरे और अन्य आरोपियों को बरी कर दिया है। अदालत ने पाया कि राज ठाकरे की मौके पर मौजूदगी या भड़काऊ भाषण का कोई सबूत नहीं है। गवाह भी आरोपियों को नहीं पहचान सके, जिसके बाद यह फैसला आया।
राज ठाकरे
- फोटो : ANI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
विस्तार
ठाणे की एक अदालत ने गुरुवार को महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे को एक पुराने मामले में बरी कर दिया है। यह मामला साल 2008 का है, जब कल्याण रेलवे स्टेशन पर रेलवे भर्ती बोर्ड की परीक्षा देने आए छात्रों के साथ कथित तौर पर मारपीट हुई थी। अदालत ने राज ठाकरे के साथ इस मामले के सभी आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है।
इस मामले में राज ठाकरे समेत कुल आठ लोगों को आरोपी बनाया गया था। मुकदमे की सुनवाई के दौरान ही दो आरोपियों की मौत हो गई थी। आरोपियों के वकील शैलेश साडेकर ने मीडिया को बताया कि मजिस्ट्रेट ने खुली अदालत में सभी को बरी करने का फैसला सुनाया। हालांकि, इस फैसले का विस्तृत आदेश अभी आना बाकी है।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत में कई मजबूत दलीलें पेश कीं। वकील ने कहा कि चार्जशीट या गवाहों के बयानों से यह कहीं भी साबित नहीं होता कि साल 2008 में कल्याण में हुई मारपीट के समय राज ठाकरे वहां मौजूद थे। बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि अभियोजन पक्ष राज ठाकरे के किसी भी भड़काऊ भाषण का सबूत पेश करने में पूरी तरह नाकाम रहा।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें: इबोला वायरस: बुखार आने पर जांच, 21 दिन तक निगरानी, हाई-रिस्क देशों से आने वाले यात्रियों के लिए एडवाइजरी जारी
अदालत में यह बात भी सामने आई कि अभियोजन पक्ष के गवाह आरोपियों की पहचान नहीं कर सके। इसके अलावा, अभियोजन पक्ष ने दावा किया था कि लगभग 150 छात्र रेलवे की परीक्षा देने आए थे। लेकिन बचाव पक्ष ने दलील दी कि अदालत के सामने उन छात्रों का कोई एडमिट कार्ड, पहचान पत्र या उससे जुड़ा कोई भी रिकॉर्ड पेश नहीं किया गया। इन सभी तथ्यों और सबूतों की कमी को देखते हुए अदालत ने यह फैसला सुनाया।
इस मामले में राज ठाकरे समेत कुल आठ लोगों को आरोपी बनाया गया था। मुकदमे की सुनवाई के दौरान ही दो आरोपियों की मौत हो गई थी। आरोपियों के वकील शैलेश साडेकर ने मीडिया को बताया कि मजिस्ट्रेट ने खुली अदालत में सभी को बरी करने का फैसला सुनाया। हालांकि, इस फैसले का विस्तृत आदेश अभी आना बाकी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत में कई मजबूत दलीलें पेश कीं। वकील ने कहा कि चार्जशीट या गवाहों के बयानों से यह कहीं भी साबित नहीं होता कि साल 2008 में कल्याण में हुई मारपीट के समय राज ठाकरे वहां मौजूद थे। बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि अभियोजन पक्ष राज ठाकरे के किसी भी भड़काऊ भाषण का सबूत पेश करने में पूरी तरह नाकाम रहा।
Trending Videos
ये भी पढ़ें: इबोला वायरस: बुखार आने पर जांच, 21 दिन तक निगरानी, हाई-रिस्क देशों से आने वाले यात्रियों के लिए एडवाइजरी जारी
अदालत में यह बात भी सामने आई कि अभियोजन पक्ष के गवाह आरोपियों की पहचान नहीं कर सके। इसके अलावा, अभियोजन पक्ष ने दावा किया था कि लगभग 150 छात्र रेलवे की परीक्षा देने आए थे। लेकिन बचाव पक्ष ने दलील दी कि अदालत के सामने उन छात्रों का कोई एडमिट कार्ड, पहचान पत्र या उससे जुड़ा कोई भी रिकॉर्ड पेश नहीं किया गया। इन सभी तथ्यों और सबूतों की कमी को देखते हुए अदालत ने यह फैसला सुनाया।