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सुप्रीम कोर्ट ने बस ड्राइवर को दी राहत: लापरवाही के आरोप से किया बरी, कहा- ड्राइवर कंडक्टर के इशारे पर निर्भर
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: अमन तिवारी
Updated Wed, 27 May 2026 08:20 PM IST
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सार
सुप्रीम कोर्ट ने 2011 के एक हादसे में मामले में बस ड्राइवर को बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि ड्राइवर कंडक्टर के संकेतों पर चलता है और उसे पीछे मुड़कर देखने की जरूरत नहीं होती। महिला की मौत खुद फिसलने की वजह से भी हो सकती है।
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक बस ड्राइवर को बड़ी राहत देते हुए उसे लापरवाही से गाड़ी चलाने के आरोप से मुक्त कर दिया। यह मामला साल 2011 का है, जिसमें बस से उतरते समय एक महिला की गिरकर मौत हो गई थी। कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि बस ड्राइवर कंडक्टर के निर्देशों और संकेतों के अनुसार ही गाड़ी रोकता या चलाता है।
अदालत ने क्या कहा?
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एन वी अंजारिया की बेंच ने कहा कि बस का कंडक्टर सीटी बजाकर ड्राइवर को संकेत देता है। ड्राइवर से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह बार-बार पीछे मुड़कर देखे कि यात्री बस से उतर गए हैं या नहीं। कोर्ट ने यह भी संभावना जताई कि बस से उतरते समय महिला खुद सावधानी न बरतने की वजह से फिसल गई होगी।
क्या है मामला?
यह मामला कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम के एक ड्राइवर से जुड़ा है। कर्नाटक हाई कोर्ट ने ड्राइवर को आईपीसी की धारा 304ए (लापरवाही से मौत) के तहत दोषी मानते हुए छह महीने की साधारण कैद की सजा सुनाई थी। शिकायतकर्ता का दावा था कि जब उसकी मां और भाभी बस से उतर रहे थे, तब ड्राइवर ने लापरवाही से गाड़ी चला दी थी।
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ये भी पढ़ें: Kakoli Ghosh Resigns: बंगाल में हार के बाद ममता को एक और झटका, टीएमसी सांसद काकोली घोष का सभी पदों से इस्तीफा
सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश को पलटते हुए कहा कि ड्राइवर ने कंडक्टर के निर्देशों का पालन किया था, इसलिए उसे लापरवाह नहीं ठहराया जा सकता। बेंच ने कहा कि यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि शोभा नाम की महिला की मौत ड्राइवर की तेज या लापरवाही भरी ड्राइविंग की वजह से ही हुई।
अदालत ने आगे कहा कि कंडक्टर ही वह व्यक्ति होता है जो बस की आवाजाही को नियंत्रित करता है। कंडक्टर के सीटी बजाने या घंटी देने पर ही ड्राइवर को पता चलता है कि बस कब रोकनी है और कब दोबारा शुरू करनी है। ड्राइवर का मुख्य काम ड्राइविंग पर ध्यान केंद्रित करना होता है और वह पूरी तरह से कंडक्टर के संकेतों पर निर्भर रहता है। कोर्ट ने कहा कि ड्राइवर की लापरवाही तय करते समय इन तकनीकी पहलुओं को ध्यान में रखना जरूरी है।
अदालत ने क्या कहा?
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एन वी अंजारिया की बेंच ने कहा कि बस का कंडक्टर सीटी बजाकर ड्राइवर को संकेत देता है। ड्राइवर से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह बार-बार पीछे मुड़कर देखे कि यात्री बस से उतर गए हैं या नहीं। कोर्ट ने यह भी संभावना जताई कि बस से उतरते समय महिला खुद सावधानी न बरतने की वजह से फिसल गई होगी।
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क्या है मामला?
यह मामला कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम के एक ड्राइवर से जुड़ा है। कर्नाटक हाई कोर्ट ने ड्राइवर को आईपीसी की धारा 304ए (लापरवाही से मौत) के तहत दोषी मानते हुए छह महीने की साधारण कैद की सजा सुनाई थी। शिकायतकर्ता का दावा था कि जब उसकी मां और भाभी बस से उतर रहे थे, तब ड्राइवर ने लापरवाही से गाड़ी चला दी थी।
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सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश को पलटते हुए कहा कि ड्राइवर ने कंडक्टर के निर्देशों का पालन किया था, इसलिए उसे लापरवाह नहीं ठहराया जा सकता। बेंच ने कहा कि यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि शोभा नाम की महिला की मौत ड्राइवर की तेज या लापरवाही भरी ड्राइविंग की वजह से ही हुई।
अदालत ने आगे कहा कि कंडक्टर ही वह व्यक्ति होता है जो बस की आवाजाही को नियंत्रित करता है। कंडक्टर के सीटी बजाने या घंटी देने पर ही ड्राइवर को पता चलता है कि बस कब रोकनी है और कब दोबारा शुरू करनी है। ड्राइवर का मुख्य काम ड्राइविंग पर ध्यान केंद्रित करना होता है और वह पूरी तरह से कंडक्टर के संकेतों पर निर्भर रहता है। कोर्ट ने कहा कि ड्राइवर की लापरवाही तय करते समय इन तकनीकी पहलुओं को ध्यान में रखना जरूरी है।