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CRPF: एक 'स्टे' ने तीन साल तक कराया पदोन्नति का इंतजार, अब सिपाही से इंस्पेक्टर तक को मिला प्रमोशन
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सीएपीएफ
- फोटो : अमर उजाला
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देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' में पिछले दिनों लगभग 263 ग्राउंड कमांडर यानी 'सहायक कमांडेंट' को 15वें साल में पहली पदोन्नति मिली थी। जब सहायक कमांडेंट को डिप्टी कमांडेंट का पद मिला तो उससे नीचे के रैंकों में भी पदोन्नति की जगह बनती चली गई। हालांकि यह पदोन्नति प्रक्रिया तीन साल पहले पूरी होनी थी, लेकिन अदालत में विभागीय पदोन्नति कमेटी 'डीपीसी' पर लगे एक 'स्टे' ने सिपाही से लेकर सहायक कमांडेंट तक को पदोन्नति का इंतजार कराया। अब सीआरपीएफ मुख्यालय ने सिपाही से इंस्पेक्टर तक के रैंकों का पदोन्नति आदेश जारी कर दिया है।
सिपाही से इंस्पेक्टर तक की हुई पदोन्नति
सीआरपीएफ महानिदेशालय की तरफ से गत माह सहायक कमांडेंट को डिप्टी कमांडेंट बनाए जाने के पदोन्नति आदेश जारी किए गए थे। सुप्रीम कोर्ट के 16 अप्रैल 2026 के आदेश (सिविल अपील संख्या 4585-4586/2025) के पालन में सरकार की तरफ से डीजी सीआरपीएफ ने सहायक कमांडेंट को डिप्टी कमांडेंट (जीडी) बनाने की मंजूरी दी। इसके बाद निचले रैंकों में भी रिक्तियां बन गई। अब ताजा आदेशों में 63 इंस्पेक्टर (जीडी) को सहायक कमांडेंट (जीडी) के पद पर पदोन्नति दी गई है। 61 एसआई (जीडी) को इंस्पेक्टर (जीडी) बनाया गया है। 59 एएसआई (जीडी) को एसआई (जीडी) की पदोन्नति दी गई है। इतना ही नहीं, 58 सिपाही (जीडी) को हवलदार (जीडी) बनाया गया है।
इस वजह से हुई पदोन्नति में देरी
71 डीएएसओ लोकल प्रमोटी के सहायक कमांडेंट की तरफ से कोर्ट में केस किया गया था। इसके चलते 43 बैच डीएजीओ की 2023 वाली डीपीसी पर स्टे लग गया। पदोन्नति का रास्ता बाधित हो गया। कमलेश पांडे बनाम भारत सरकार, इस केस का निपटारा होने में तीन साल लग गए। सूत्रों का कहना है कि इस स्टे के कारण सिपाही हवलदार से लेकर सहायक कमांडेंट तक के रैंकों में तीन साल तक पदोन्नति नहीं हो सकी। खास बात ये है कि विभिन्न रैंकों में अनेक कार्मिक ऐसे भी रहे हैं जो पदोन्नति मिलने से पहले ही सेवानिवृत हो गए हैं। रैंक बढ़ोतरी या उन्हें जो आर्थिक नुकसान हुआ है, अब इसकी भरपाई नहीं हो सकती।
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सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा था मामला
सर्वोच्च अदालत ने विभागीय पदोन्नति कमेटी 'डीपीसी' पर स्टे लगा रखा था। तीन माह पहले वह स्टे हट गया था। सीआरपीएफ मुख्यालय ने 17 अप्रैल को सभी जोन, ग्रुप सेंटर, यूनिटों एवं दूसरी इकाइयों को आदेश दिया था कि वे उन सहायक कमांडेंट (जीडी) की मेडिकल रिपोर्ट, अति आवश्यक आधार पर भेजें, जिन्हें डिप्टी कमांडेंट (जीडी) की पदोन्नति मिलने जा रही है। पदोन्नति पाने वालों में सीआरपीएफ के 43वें बैच के सीधे नियुक्त राजपत्रित अधिकारी, विभागीय प्रवेश वाले राजपत्रित अधिकारी और सीधे नियुक्त अधीनस्थ अधिकारी/स्थानीय पदोन्नत अधिकारी शामिल हैं।
डीजी ने अफसरों को किया था आश्वस्त
इस मामले में सीआरपीएफ डीजी जीपी सिंह का विशेष योगदान रहा है। सैनिक सम्मेलन और वीडियो कान्फ्रेंसिंग के दौरान जब भी सहायक कमांडेंट द्वारा उनकी पदोन्नति में हो रही देरी को लेकर सवाल उठाया गया, डीजी ने कहा था कि वे गंभीरता से इस मामले पर काम कर रहे हैं। अदालत में केस की पैरवी करना हो या गृह मंत्रालय में मजबूती से अफसरों का पक्ष रखना, इसमें कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी जा रही। उन्होंने अफसरों को आश्वस्त किया था कि बहुत जल्द उन्हें पदोन्नति मिलेगी। इसके लिए हर स्तर पर प्रयास किया जा रहा है। डीजी सिंह ने बल महानिदेशालय में दिल्ली एनसीआर के अधिकारियों के कंधे पर डिप्टी कमांडेंट का रैंक लगाया था।
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सिपाही से इंस्पेक्टर तक की हुई पदोन्नति
सीआरपीएफ महानिदेशालय की तरफ से गत माह सहायक कमांडेंट को डिप्टी कमांडेंट बनाए जाने के पदोन्नति आदेश जारी किए गए थे। सुप्रीम कोर्ट के 16 अप्रैल 2026 के आदेश (सिविल अपील संख्या 4585-4586/2025) के पालन में सरकार की तरफ से डीजी सीआरपीएफ ने सहायक कमांडेंट को डिप्टी कमांडेंट (जीडी) बनाने की मंजूरी दी। इसके बाद निचले रैंकों में भी रिक्तियां बन गई। अब ताजा आदेशों में 63 इंस्पेक्टर (जीडी) को सहायक कमांडेंट (जीडी) के पद पर पदोन्नति दी गई है। 61 एसआई (जीडी) को इंस्पेक्टर (जीडी) बनाया गया है। 59 एएसआई (जीडी) को एसआई (जीडी) की पदोन्नति दी गई है। इतना ही नहीं, 58 सिपाही (जीडी) को हवलदार (जीडी) बनाया गया है।
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इस वजह से हुई पदोन्नति में देरी
71 डीएएसओ लोकल प्रमोटी के सहायक कमांडेंट की तरफ से कोर्ट में केस किया गया था। इसके चलते 43 बैच डीएजीओ की 2023 वाली डीपीसी पर स्टे लग गया। पदोन्नति का रास्ता बाधित हो गया। कमलेश पांडे बनाम भारत सरकार, इस केस का निपटारा होने में तीन साल लग गए। सूत्रों का कहना है कि इस स्टे के कारण सिपाही हवलदार से लेकर सहायक कमांडेंट तक के रैंकों में तीन साल तक पदोन्नति नहीं हो सकी। खास बात ये है कि विभिन्न रैंकों में अनेक कार्मिक ऐसे भी रहे हैं जो पदोन्नति मिलने से पहले ही सेवानिवृत हो गए हैं। रैंक बढ़ोतरी या उन्हें जो आर्थिक नुकसान हुआ है, अब इसकी भरपाई नहीं हो सकती।
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सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा था मामला
सर्वोच्च अदालत ने विभागीय पदोन्नति कमेटी 'डीपीसी' पर स्टे लगा रखा था। तीन माह पहले वह स्टे हट गया था। सीआरपीएफ मुख्यालय ने 17 अप्रैल को सभी जोन, ग्रुप सेंटर, यूनिटों एवं दूसरी इकाइयों को आदेश दिया था कि वे उन सहायक कमांडेंट (जीडी) की मेडिकल रिपोर्ट, अति आवश्यक आधार पर भेजें, जिन्हें डिप्टी कमांडेंट (जीडी) की पदोन्नति मिलने जा रही है। पदोन्नति पाने वालों में सीआरपीएफ के 43वें बैच के सीधे नियुक्त राजपत्रित अधिकारी, विभागीय प्रवेश वाले राजपत्रित अधिकारी और सीधे नियुक्त अधीनस्थ अधिकारी/स्थानीय पदोन्नत अधिकारी शामिल हैं।
डीजी ने अफसरों को किया था आश्वस्त
इस मामले में सीआरपीएफ डीजी जीपी सिंह का विशेष योगदान रहा है। सैनिक सम्मेलन और वीडियो कान्फ्रेंसिंग के दौरान जब भी सहायक कमांडेंट द्वारा उनकी पदोन्नति में हो रही देरी को लेकर सवाल उठाया गया, डीजी ने कहा था कि वे गंभीरता से इस मामले पर काम कर रहे हैं। अदालत में केस की पैरवी करना हो या गृह मंत्रालय में मजबूती से अफसरों का पक्ष रखना, इसमें कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी जा रही। उन्होंने अफसरों को आश्वस्त किया था कि बहुत जल्द उन्हें पदोन्नति मिलेगी। इसके लिए हर स्तर पर प्रयास किया जा रहा है। डीजी सिंह ने बल महानिदेशालय में दिल्ली एनसीआर के अधिकारियों के कंधे पर डिप्टी कमांडेंट का रैंक लगाया था।