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Khabaron Ke Khiladi: चन्नी के तेवर से बदलेगी पंजाब कांग्रेस या वड़िंग बने रहेंगे राजा? विश्लेषकों से समझें

Sat, 11 Jul 2026 05:18 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Sat, 11 Jul 2026 05:18 PM IST
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Khabaron Ke Khiladi Punjab Congress Controversty Charanjit Singh Channi Amrinder Singh Raja Warring Elections
पंजाब कांग्रेस में घमासान। - फोटो : अमर उजाला
पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव हैं। चुनाव के लिए नौ महीने से भी कम का वक्त बचा है। इससे पहले राज्य में कांग्रेस के नेताओं के बीच आपसी खींचतान की खबरें आने लगी है। बीते पूरे हफ्ते राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी की नाराजगी की खबरें आती रहीं। इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में इसी पर चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार रामकृपाल सिंह, विनोद अग्निहोत्री, पीयूष पंत, पूर्णिमा त्रिपाठी, अनुराग वर्मा और श्रीनिवास मौजूद रहे।  
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रामकृपाल सिंह: इस देश में अगर जनता से पूछिए कि विकल्प क्या है? मैं ये बहुत पहले से कहता रहा हूं कि राष्ट्रीय पार्टी का विकल्प राष्ट्रीय पार्टी ही होगी। आज भी अगर भाजपा का कोई विकल्प है तो कांग्रेस है। भारत जैसे देश में राष्ट्रीय पार्टी ही विकल्प होगी। अनुशासनहीनता कोई नई चीज नहीं है। जो बहुत दिनों से सत्ता बाहर है, उसके लिए इसे रोकना मुश्किल होता है। 
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पीयूष पंत: गुटबाजी कोई नई बात नहीं है। हर राज्य में हमने ये देखा है। पंजाब में ये 1947 से है। पंजाब कांग्रेस का ये इतिहास रहा है। अध्यक्ष और मुख्यमंत्री को लेकर इस तरह का ही इतिहास है। इसके बाद भी पंजाब वहां कई बार सरकार बना चुकी है। चन्नी और राजा वड़िंग दोनों ही राहुल गांधी के बहुत करीब माने जाते हैं। ये दिलचस्प है। मौजूदा अध्यक्ष को बहुत सफलता मिली नहीं है। इसे लेकर वहां असंतोष है।  मुझे लगता है कि देर सबेर इसे निपटा लिया जाएगा, लेकिन दिक्कत तो है। 

श्रीनिवास: कांग्रेस अभी उस दौर से गुजर रही है जहां वो बहुत कमजोर है। हालांकि, अब वो इससे उबरने की कोशिश कर रही है। आलाकमान कल्चर कांग्रेस का कल्चर है। अब क्या हुआ कांग्रेस में आला तो रहे नहीं, अब उस कामन में जितने तीर हैं वो सभी अनियंत्रित हो गए। मुख्यमंत्री बनने के पहले चन्नी को पूरा पंजाब तक नहीं जानता था। ये कांग्रेस का नेचर और सिंग्नेचर बन गया है। 

पूर्णिमा त्रिपाठी: कांग्रेस की समस्या ये है कि वह बहुत लंबे समय से केंद्र की सत्ता से बाहर है। कांग्रेस में आंतरिक कलह हमेशा चलती रहती है। ये सब इसलिए हो रहा है क्योंकि राहुल गांधी अपनी एक टीम बना रहे हैं। पार्टी एक एक्सपेरिमेंटल फेज से गुजर रही है। चन्नी को जब मुख्यमंत्री बनाया गया उन्हें बहुत से लोग जानते नहीं थे। अब चन्नी की महत्वाकांक्षाएं जाग गई हैं। इसके बाद भी मुझे लगता है कि कांग्रेस इस स्थिति को संभाल लेगी। 

अनुराग वर्मा: कांग्रेस में ऐसा कल्चर रहा है कि आलाकमान तक आकर सारे विवाद खत्म हो जाते थे। अब उस दरबार में जाकर सारे मामले सुलझते नहीं हैं। आज की तारीख में रहना हो रहे जाना हो जाओ जैसी राजनीति भारत में नहीं चलती है। ये मुद्दा बताता है कि 10 जनपथ के दरबार की धार खत्म हो गई है। 

विनोद अग्निहोत्री: पंजाब की राजनीति में कांग्रेस के भीतर हमेशा से दो तीन धड़े रहे हैं। ये कोई नई बात नहीं है। सुनील जाखड़ को मुख्यमंत्री बनना था, लेकिन अंबिका सोनी ने कहा कि पंजाब में पगड़ी वाला ही चलेगा। इसके बाद सुनील जाखड़ नाराज भी हुए। इसके बाद चन्नी मुख्यमंत्री बना दिए गए। वो दांव उल्टा पड़ गया। इस लड़ाई में कांग्रेस जीती हुई बाजी हार गई। राजा वड़िंग को लेकर पार्टी का मानना है कि जिस आदमी ने पार्टी को क्राइसेस में थामा और लोकसभा में सात सीटें जिताईं। उसे हम आगे रखेंगे। चन्नी को कैंपेन कमेटी की चेयरमैन बना दिया गया। चन्नी की कोशिश ये है कि टिकटों के बंटवारे में उनकी से रहे।
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