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Bengal: UCC पर पश्चिम बंगाल सरकार का बड़ा कदम, रिटायर्ड जज रंजना देसाई की अध्यक्षता में नौ सदस्यीय कमेटी गठित

Sat, 11 Jul 2026 04:22 PM IST
Pavan आईएएन, कोलकाता
आईएएन, कोलकाता Published by: Pavan Updated Sat, 11 Jul 2026 04:22 PM IST
सार

पश्चिम बंगाल सरकार ने प्रस्तावित समान नागरिक संहिता-2026 के मसौदा विधेयक की समीक्षा और उसे अंतिम रूप देने के लिए सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जज रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में नौ सदस्यीय समिति गठित की है। इस समिति मसौदे की विस्तृत जांच कर विधानसभा में पेश करने से पहले अपनी सिफारिशें देगी।

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West Bengal govt takes a major step on UCC; forms a 9-member committee headed by retired judge Ranjana Desai
शुभेंदु अधिकारी, सीएम, पश्चिम बंगाल - फोटो : एएनआई/अमर उजाला

विस्तार

पश्चिम बंगाल सरकार ने प्रस्तावित समान नागरिक संहिता (यूसीसी)-2026 के मसौदा विधेयक की समीक्षा और उसे अंतिम रूप देने के लिए नौ सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जज जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई इस कमेटी की अध्यक्षता करेंगी। इस संबंध में सरकार ने शुक्रवार को नोटिफिकेशन जारी किया।
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मसौदा विधेयक की समीक्षा के लिए कमेटी
पश्चिम बंगाल के न्यायिक विभाग की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया कि राज्य सरकार ने कहा कि विधानसभा में पेश किए जाने से पहले मसौदा विधेयक की समीक्षा करने के लिए कमेटी बनाई है। सरकार का मानना है कि विषय की व्यापकता और जटिलता को देखते हुए मसौदा विधेयक का विस्तृत परीक्षण जरूरी है। इसी उद्देश्य से 2 जुलाई को हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में लिए गए निर्णय के आधार पर समिति के गठन को मंजूरी दी गई है।
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रिटायर्ड जज रंजना देसाई करेंगी अध्यक्षता
रिटायर्ड जज जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में बनी इस कमेटी में मेघालय के पूर्व राज्यपाल तथागत रॉय, आईएएस अधिकारी दुष्यंत नारियाला, रिटायर्ड आईएएस अधिकारी शत्रुघ्न सिंह, गृह विभाग की प्रधान सचिव संघमित्रा घोष, बंगबासी कॉलेज की रिटायर्ड एसोसिएट प्रोफेसर रत्ना भट्टाचार्य, गौर बंगा यूनिवर्सिटी के पूर्व वाइस-चांसलर गोपालचंद्र मिश्रा, कलकत्ता हाई कोर्ट के वकील उस्मान गनी मलिक और संभाग के पूर्व एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर निर्मल्य भट्टाचार्य शामिल हैं।

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राज्य सरकार की अधिसूचना में क्या कहा गया?
अधिसूचना के अनुसार, राज्य सरकार यह फैसला भारतीय संविधान के भाग-4 में निहित नीति-निर्देशक सिद्धांतों के अनुच्छेद 44 के अनुरूप उठाया है, जिसमें राज्य को नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता लागू करने का प्रयास करने का प्रावधान है। अधिसूचना में कहा गया है कि सरकार ने सभी धर्म, आस्था और समुदाय के निवासियों के लिए शादी, तलाक, बिना वसीयत के उत्तराधिकार और वसीयत के आधार पर उत्तराधिकार जैसे व्यक्तिगत नागरिक मामलों को एक समान कानूनी ढांचे में लाने के उद्देश्य से 'समान नागरिक संहिता, पश्चिम बंगाल- 2026' का मसौदा तैयार किया है।
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