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तृणमूल कांग्रेस में संकट: 'वो अहंकारी है, उसके कारण पार्टी खत्म हो गई', अभिषेक पर क्यों बिफरे कल्याण बनर्जी?
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Pavan
Updated Thu, 11 Jun 2026 01:43 PM IST
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सार
टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने कलकत्ता हाई कोर्ट में पार्टी के जनरल सेक्रेटरी और सांसद अभिषेक बनर्जी की ओर से एक केस लड़ने से इनकार कर दिया। बता दें कि, ये मामला हस्ताक्षर जालसाजी का है, जिसमें अभिषेक बनर्जी को आज कलकत्ता हाई कोर्ट से आंशिक राहत मिली है। लेकिन अब इस मामले की पैरवी कर रहे कल्याण बनर्जी ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
टीएमसी में संकट
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद से तृणमूल कांग्रेस घास के तिनके की तरह बिखरती दिख रही है। इसकी शुरुआत पहले विधानसभा के स्तर पर शुरू हुई, जो राज्यसभा तक जा पहुंची। पिछले तीन दिन में पार्टी के तीन राज्यसभा सांसदों ने इस्तीफा दिया है। अब टीएमसी के बड़े नेता कल्याण बनर्जी के आरोपों ने पार्टी को अंदर तक झकझोर दिया है। दरअसल, कल्याण बनर्जी हस्ताक्षर जालसाजी के मामले में अभिषेक बनर्जी के वकील के तौर पर कोर्ट की सुनवाई में शामिल हो रहे हैं। लेकिन, इस सुनवाई के दौरान अभिषेक बनर्जी के न मौजूद रहने पर उन्होंने पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी से साफ कहा है कि उनमें और अभिषेक बनर्जी में से एक को चुनें।
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केस मैंने ही फाइल किया था- कल्याण बनर्जी
इस मामले पर विस्तार से बात करते हुए उन्होंने कहा, 'सीआईडी से जुड़ा यह मामला असल में पहले ही फाइल किया गया था। उन्होंने इसे पहले फाइल किया था। शुक्रवार को वेकेशन बेंच बैठी थी और मैंने पूरे दिन इंतजार किया, लेकिन मामले पर सुनवाई नहीं हुई। उसके बाद, मैंने कोर्ट के सामने इसका जिक्र किया और जज ने कहा कि मामले की सुनवाई बुधवार को होगी। जैसा कि आप जानते हैं, मंगलवार को कैमक स्ट्रीट स्थित उनके (अभिषेक बनर्जी) घर और दीदी के ऑफिस में तलाशी ली गई थी। मैं दिल्ली से आया था और वहां भी गया था। तलाशी के दौरान मैं मौजूद था। फिर कल सुबह, मैंने जस्टिस कौशिक चंदा के सामने मामले का जिक्र किया और कहा कि यह जरूरी है। मैंने उनसे कहा कि तलाशी गैर-कानूनी थी। तलाशी पहले ही हो चुकी थी और कभी भी कुछ भी हो सकता था, इसलिए मामले पर सुनवाई जरूरी थी। जज ने मुझसे कहा कि मामले की सुनवाई उसी दिन होगी। उसके बाद, दोपहर करीब 12.30 बजे एक वकील आया और मुझे बताया कि तलाशी के संबंध में एक अलग रिट याचिका दायर की गई है और एक सीनियर वकील इसे देखेंगे। मैंने पूछा, 'अगर आपने यह मामला पहले ही दायर कर दिया था, तो आपने हमसे इस पर चर्चा क्यों नहीं की? यह पूरी तरह से गैर-कानूनी है'।
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उनकी अनादर करने की आदत नहीं बदली- कल्याण बनर्जी
'उसके बाद, पूरे दिन किसी ने कुछ नहीं कहा। मैंने पूरी रात केस की तैयारी में बिताई। आज भी, आप देख सकते हैं कि मैं हर जगह जा रहा हूं, जोखिम उठा रहा हूं और अपना काम कर रहा हूं। फिर भी उनकी अनादर करने की आदत नहीं बदली है। उन्हें (अभिषेक बनर्जी) लगता है कि हर कोई उनसे नीचे है, जैसे कि हर कोई कैमक स्ट्रीट का सिर्फ एक कर्मचारी हो। मैं 45 साल से इस पेशे में हूं। एक सीनियर वकील के तौर पर मुझे कौन नहीं जानता? मैं कितने समय से प्रैक्टिस कर रहा हूं? इस कोर्ट को छोड़िए, सुप्रीम कोर्ट में भी लोग मुझे जानते हैं। लेकिन वे इतने अहंकारी हो गए हैं... किसी का सम्मान नहीं करते। इसीलिए मैं पीछे हट गया हूं। आज सुबह मैंने दीदी से भी कहा: मेरे और अभिषेक बनर्जी के बीच किसी एक को चुनिए'।
यह भी पढ़ें- Travel Advisory: पश्चिम एशिया तनाव के बीच इंडिगो की ट्रैवल एडवाइजरी, फ्लाइट स्टेटस चेक कर घर से निकलें यात्री
चार मई को मिली करारी हार, ममता के कुनबे पर कुठाराघात
बंगाल में चुनाव परिणाम का चार मई को एलान हुआ। तृणमूल कांग्रेस को मिली करारी हार के बाद से ही पूर्व सीएम ममता बनर्जी की पार्टी में असंतोष उभरने लगा है। बीते करीब एक महीने में कई नेताओं ने बागी तेवर दिखाए हैं। कल्याण बनर्जी को ममता का करीबी और विश्वासपात्र माना जाता है। लोकसभा सांसद कल्याण बनर्जी ने बीते दिनों बगावत करने वाले नेताओं को 'विश्वासघाती' और 'सुख के कबूतर' बताया था। उन्होंने तृणमूल से अलग राग अलापने वाले नेताओं को टीएमसी छोड़कर स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने की चुनौती भी दी थी। कल्याण बनर्जी ने कहा था कि बागी तेवर अपना रहे नेताओं को भाजपा या किसी अन्य दल के टिकट पर चुनाव न लड़ने की हिम्मत दिखानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि ये लोग दोहरे चरित्र वाले, विश्वासघाती और गद्दार हैं। काकोली घोष को छोड़कर सभी सदस्य 2011 के बाद दल में शामिल हुए हैं। इन लोगों ने तृणमूल के लिए कोई वास्तविक संघर्ष नहीं किया है। लोकप्रिय चेहरे 'बाहरी' हैं। इन्हें लगता है कि जनता उन्हें देखने आती है, तो संसद में भी उनका ही अनुसरण करेगी।
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केस मैंने ही फाइल किया था- कल्याण बनर्जी
इस मामले पर विस्तार से बात करते हुए उन्होंने कहा, 'सीआईडी से जुड़ा यह मामला असल में पहले ही फाइल किया गया था। उन्होंने इसे पहले फाइल किया था। शुक्रवार को वेकेशन बेंच बैठी थी और मैंने पूरे दिन इंतजार किया, लेकिन मामले पर सुनवाई नहीं हुई। उसके बाद, मैंने कोर्ट के सामने इसका जिक्र किया और जज ने कहा कि मामले की सुनवाई बुधवार को होगी। जैसा कि आप जानते हैं, मंगलवार को कैमक स्ट्रीट स्थित उनके (अभिषेक बनर्जी) घर और दीदी के ऑफिस में तलाशी ली गई थी। मैं दिल्ली से आया था और वहां भी गया था। तलाशी के दौरान मैं मौजूद था। फिर कल सुबह, मैंने जस्टिस कौशिक चंदा के सामने मामले का जिक्र किया और कहा कि यह जरूरी है। मैंने उनसे कहा कि तलाशी गैर-कानूनी थी। तलाशी पहले ही हो चुकी थी और कभी भी कुछ भी हो सकता था, इसलिए मामले पर सुनवाई जरूरी थी। जज ने मुझसे कहा कि मामले की सुनवाई उसी दिन होगी। उसके बाद, दोपहर करीब 12.30 बजे एक वकील आया और मुझे बताया कि तलाशी के संबंध में एक अलग रिट याचिका दायर की गई है और एक सीनियर वकील इसे देखेंगे। मैंने पूछा, 'अगर आपने यह मामला पहले ही दायर कर दिया था, तो आपने हमसे इस पर चर्चा क्यों नहीं की? यह पूरी तरह से गैर-कानूनी है'।
उनकी अनादर करने की आदत नहीं बदली- कल्याण बनर्जी
'उसके बाद, पूरे दिन किसी ने कुछ नहीं कहा। मैंने पूरी रात केस की तैयारी में बिताई। आज भी, आप देख सकते हैं कि मैं हर जगह जा रहा हूं, जोखिम उठा रहा हूं और अपना काम कर रहा हूं। फिर भी उनकी अनादर करने की आदत नहीं बदली है। उन्हें (अभिषेक बनर्जी) लगता है कि हर कोई उनसे नीचे है, जैसे कि हर कोई कैमक स्ट्रीट का सिर्फ एक कर्मचारी हो। मैं 45 साल से इस पेशे में हूं। एक सीनियर वकील के तौर पर मुझे कौन नहीं जानता? मैं कितने समय से प्रैक्टिस कर रहा हूं? इस कोर्ट को छोड़िए, सुप्रीम कोर्ट में भी लोग मुझे जानते हैं। लेकिन वे इतने अहंकारी हो गए हैं... किसी का सम्मान नहीं करते। इसीलिए मैं पीछे हट गया हूं। आज सुबह मैंने दीदी से भी कहा: मेरे और अभिषेक बनर्जी के बीच किसी एक को चुनिए'।
VIDEO | Kolkata: TMC MP Kalyan Banerjee refuses from appearing on behalf of the party’s general secretary and MP Abhishek Banerjee in the Calcutta High Court in a case, says, "This CID-related matter was actually filed earlier. They had filed it first. On Friday, there was a… pic.twitter.com/7YetabSZET
— Press Trust of India (@PTI_News) June 11, 2026
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चार मई को मिली करारी हार, ममता के कुनबे पर कुठाराघात
बंगाल में चुनाव परिणाम का चार मई को एलान हुआ। तृणमूल कांग्रेस को मिली करारी हार के बाद से ही पूर्व सीएम ममता बनर्जी की पार्टी में असंतोष उभरने लगा है। बीते करीब एक महीने में कई नेताओं ने बागी तेवर दिखाए हैं। कल्याण बनर्जी को ममता का करीबी और विश्वासपात्र माना जाता है। लोकसभा सांसद कल्याण बनर्जी ने बीते दिनों बगावत करने वाले नेताओं को 'विश्वासघाती' और 'सुख के कबूतर' बताया था। उन्होंने तृणमूल से अलग राग अलापने वाले नेताओं को टीएमसी छोड़कर स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने की चुनौती भी दी थी। कल्याण बनर्जी ने कहा था कि बागी तेवर अपना रहे नेताओं को भाजपा या किसी अन्य दल के टिकट पर चुनाव न लड़ने की हिम्मत दिखानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि ये लोग दोहरे चरित्र वाले, विश्वासघाती और गद्दार हैं। काकोली घोष को छोड़कर सभी सदस्य 2011 के बाद दल में शामिल हुए हैं। इन लोगों ने तृणमूल के लिए कोई वास्तविक संघर्ष नहीं किया है। लोकप्रिय चेहरे 'बाहरी' हैं। इन्हें लगता है कि जनता उन्हें देखने आती है, तो संसद में भी उनका ही अनुसरण करेगी।