{"_id":"6a75e9b0bcc7b1343303ae50","slug":"tmc-mlas-plea-rejected-high-court-says-approach-speaker-matter-beyond-judicial-review-2026-08-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"टीएमसी विधायक की याचिका खारिज: हाईकोर्ट ने कहा- स्पीकर के पास जाइए, ये न्यायिक हस्तक्षेप के दायरे में नहीं आता","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
टीएमसी विधायक की याचिका खारिज: हाईकोर्ट ने कहा- स्पीकर के पास जाइए, ये न्यायिक हस्तक्षेप के दायरे में नहीं आता
Fri, 07 Aug 2026 07:50 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल
अमर उजाला ब्यूरो, कोलकाता
अमर उजाला ब्यूरो, कोलकाता
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Fri, 07 Aug 2026 07:50 PM IST
सार
टीएमसी विधायक कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि उन्हें विधानसभा में बोलने का मौका नहीं दिया जा रहा। उन्होंने इस मामले में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अदालत ने याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि यह विधानसभा की आंतरिक प्रक्रिया का मामला है। इसका समाधान स्पीकर के स्तर पर होना चाहिए। अदालत ने न्यायिक हस्तक्षेप से इनकार क्यों किया? आइए, विस्तार से जानते हैं...
विज्ञापन
टीएमसी विधायक की याचिका पर बड़ा फैसला
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कलकत्ता हाईकोर्ट ने टीएमसी विधायक कुणाल घोष की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने विधानसभा में बोलने का अवसर नहीं मिलने का आरोप लगाया था। अदालत ने साफ कहा कि विधानसभा की कार्यवाही और सदन में किस सदस्य को कब बोलने का मौका दिया जाए, यह पूरी तरह विधानसभा की आंतरिक प्रक्रिया का हिस्सा है। इसलिए अदालत इस मामले में हस्तक्षेप नहीं कर सकती। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि यदि विधायक को कोई शिकायत है तो उन्हें विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) के समक्ष अपनी बात रखनी चाहिए।
ये भी पढ़ें- 'दाल में काला नहीं, पूरी दाल ही काली है': राहुल गांधी ने ई20 पेट्रोल पर केंद्र सरकार को घेरा, वीडियो जारी कर कही यह बात
विज्ञापन
विज्ञापन
कुणाल घोष ने अदालत में क्या दलील दी?
कुणाल घोष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विश्वरूप भट्टाचार्य ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल का नाम लगातार वक्ताओं की सूची में शामिल नहीं किया जा रहा है। उनका कहना था कि मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) की ओर से नाम नहीं भेजे जाने के कारण उन्हें सदन में अपनी बात रखने का अवसर नहीं मिल रहा। इसी आधार पर उन्होंने अदालत से न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की ताकि उन्हें विधानसभा में बोलने का उचित अवसर मिल सके।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें- 'दाल में काला नहीं, पूरी दाल ही काली है': राहुल गांधी ने ई20 पेट्रोल पर केंद्र सरकार को घेरा, वीडियो जारी कर कही यह बात
विज्ञापन
हाईकोर्ट ने क्यों कहा कि मामला न्यायिक दायरे में नहीं आता?
न्यायमूर्ति कृष्णा राव की पीठ ने कहा कि अदालत स्पीकर को यह निर्देश नहीं दे सकती कि किस विधायक को कब और कितनी देर बोलने का अवसर दिया जाए। अदालत के अनुसार यह पूरी तरह विधानसभा की आंतरिक कार्यप्रणाली का विषय है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर किसी विधायक को लगता है कि उसकी आवाज दबाई जा रही है, तो उसका उचित मंच विधानसभा अध्यक्ष हैं, न कि अदालत।विधानसभा की ओर से क्या पक्ष रखा गया?
विधानसभा की ओर से पेश अधिवक्ता ने अदालत में कहा कि 294 सदस्यीय सदन में हर विधायक को हर मुद्दे पर बोलने का मौका देना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।- विधानसभा ने कहा कि वक्ताओं का चयन तय प्रक्रिया के तहत होता है।
- हर सदस्य को हर विषय पर बोलने का अवसर नहीं दिया जा सकता।
- अदालत को बताया गया कि कुणाल घोष पहले भी सदन में अपनी बात रख चुके हैं।
- वक्ताओं की सूची विधानसभा की स्थापित प्रक्रिया के अनुसार तैयार की जाती है।
- इसलिए इस मामले में न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।