TMC सांसद का कबूलनामा: 'RG Kar अस्पताल कांड को दबाने में लगा था पूरा तंत्र', जनता के गुस्से से मिली सियासी चोट
तृणमूल कांग्रेस के सांसद सुखेंदु शेखर रॉय के बयानों से पार्टी के भीतर आत्ममंथन और असंतोष की झलक सामने आई है। उन्होंने हालिया नेतृत्व की कुछ नीतियों की सराहना की, वहीं जनता की नाराजगी, प्रशासनिक कमियों और संगठनात्मक चुनौतियों पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं।
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कोलकाता से एक बड़ा राजनीतिक बयान सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल मामले को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिसने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है।
जनता के गुस्से पर सांसद की स्वीकारोक्ति
सुखेंदु शेखर रॉय ने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में जिस जनता ने टीएमसी को 29 सीटों पर जीत दिलाई थी, वही जनता कुछ ही महीनों बाद आरजी कर मामले के बाद सड़कों पर उतर आई। उन्होंने कहा कि लाखों की संख्या में लोग रातभर जागकर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे और हमें उस संदेश को समझना चाहिए था जो जनता दे रही थी।
#WATCH | Kolkata | TMC MP Sukhendu Sekhar Roy says, "...The very public that, in the Lok Sabha elections held in April 2024, secured us a victory in 29 seats. Yet, just a few months later, when the RG Kar incident happened, we should have realised something: the very same public… pic.twitter.com/vKRnnSr9IF
— ANI (@ANI) May 28, 2026
'प्रशासन ने सच दबाने की कोशिश की'
टीएमसी सांसद ने यह भी स्वीकार किया कि उस दौरान पूरा प्रशासन आंदोलन को दबाने और मामले से जुड़े तथ्यों को छुपाने में व्यस्त था। उन्होंने कहा कि इसके बजाय दोषियों को तुरंत गिरफ्तार कर जेल भेजा जाना चाहिए था। उनके अनुसार, अगर सरकार जनता की आवाज को अनसुना करती है, तो लोकतंत्र में उसका असर चुनावी नतीजों पर जरूर पड़ता है।
सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व की सराहना
हालांकि, रॉय ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि नए सरकार के कामकाज से आम जनता खुश है और सरकार सही दिशा में आगे बढ़ रही है। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसा एक सरकार को कार्य करना चाहिए। उन्होंने अधिकारी को बहुत मेहनती बताते हुए कहा कि मैंने उनके जैसा मेहनती नेता बहुत कम देखा है।
ममता बनर्जी और चुनाव प्रक्रिया पर भी उठाए सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के संदर्भ में रॉय ने कहा कि जब आम जनता ने देखा कि 2,50,000 अर्धसैनिक बल तैनात हैं, जिससे वे आश्वस्त थे कि कोई उन्हें वोट डालने से रोक नहीं सकता, तो उनमें आत्मविश्वास जगा। परिणाम स्वरूप, सभी मतदान केंद्रों तक पहुंचे। किसी के होंठों पर कोई शिकायत या हिचकिचाहट नहीं थी। विपक्ष यह समझने में विफल रहा कि क्या हो रहा है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि लोकतंत्र में जनता के फैसले को हमेशा विनम्रता और श्रद्धा के साथ स्वीकार किया जाना चाहिए। रॉय ने उन लोगों पर भी कटाक्ष किया जो लूटपाट, धांधली या अन्य कदाचार के आरोप लगाते हैं। उन्होंने कहा कि अब लोगों के मन में केवल यही सवाल है कि यह पार्टी कब तक जीवित रहेगी? यह सबसे बड़ा सवाल है।
आई-पैक पर निशाना, भ्रष्टाचार के संस्थागत होने का आरोप
सांसद रॉय ने आई-पैक (I-PAC) को बलि का बकरा बनाए जाने की बात कहते हुए कहा कि आई-पैक ने पैसा बनाने के लिए कई राजनीतिक दलों के साथ काम किया। उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर भी सवाल उठाया कि क्या उन्हें उन लोगों के बारे में कोई अंदाजा नहीं था जिन्होंने पैसे देकर टिकट मांगे? उन्होंने स्पष्ट किया कि मैं यह दावा नहीं कर रहा हूं कि हर किसी ने पैसे दिए; पार्टी में अभी भी कई ईमानदार लोग हैं। मैं उन लोगों का जिक्र कर रहा हूं जिन्होंने ये घृणित कार्य किए। रॉय के अनुसार सिर्फ आई-पैक को दोष देना पर्याप्त नहीं है। दोष पार्टी के पदाधिकारियों का है, पंचायत से लेकर उच्चतम स्तर तक के कार्यकर्ता और नेता, जिन्होंने नेतृत्व प्रदान किया। इन व्यक्तियों के एक उपसमूह ने भ्रष्टाचार को संस्थागत बना दिया है, जैसे कि लूटना और हड़पना उनके जन्मसिद्ध अधिकार थे।