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Sushmita Dev Resigns: तृणमूल MP सुष्मिता देव ने दिया इस्तीफा, बंगाल से राज्यसभा सांसद थीं ममता की पूर्व सहयोगी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Wed, 10 Jun 2026 11:53 AM IST
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सार

TMC MP Sushmita Dev Resignation: तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने इस्तीफा देकर ममता बनर्जी को बड़ा झटका दिया है। इससे पहले सुखेंदु शेखर रॉय भी पार्टी छोड़ चुके हैं। लगातार इस्तीफों से तृणमूल में बढ़ती बगावत की चर्चा तेज हो गई है। पार्टी के अंदर असंतोष और भाजपा से संपर्क के आरोपों ने बंगाल की राजनीति को और गर्म कर दिया है। आइए, विस्तार से मामले को जानते हैं...

TMC MP Sushmita Dev Resignation Updates Trinamool Rajya Sabha Leader Steps Down Party leaders and others react
सुष्मिता देव ने दिया इस्तीफा - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

तृणमूल कांग्रेस में जारी अंदरूनी संकट अब और गहरा होता दिखाई दे रहा है। पार्टी की राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने अपने पद से इस्तीफा देकर ममता बनर्जी खेमे को एक और बड़ा झटका दे दिया है। पिछले कुछ दिनों से पार्टी के भीतर बगावत की खबरें लगातार सामने आ रही थीं और अब सुष्मिता देव के इस्तीफे ने इस संकट को और गंभीर बना दिया है। इससे पहले तृणमूल के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा में लंबे समय तक पार्टी के मुख्य सचेतक रहे सुखेंदु शेखर रॉय भी पार्टी छोड़ चुके हैं। लगातार हो रहे इस्तीफों से साफ संकेत मिल रहे हैं कि तृणमूल कांग्रेस के अंदर असंतोष तेजी से बढ़ रहा है।




 

सुष्मिता देव ने इस्तीफा क्यों दिया?

असम के सिलचर से पूर्व लोकसभा सांसद रहीं सुष्मिता देव ने बुधवार को राज्यसभा सदस्य पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन को पत्र लिखकर अपना इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार करने की मांग की। हालांकि उन्होंने अपने इस्तीफे की विस्तृत वजह सार्वजनिक तौर पर नहीं बताई है, लेकिन इसे तृणमूल कांग्रेस में बढ़ती बगावत से जोड़कर देखा जा रहा है।

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सुष्मिता देव पहले कांग्रेस में थीं। 2019 लोकसभा चुनाव हारने के बाद उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी थी और 2021 में तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुई थीं। पार्टी में आने के बाद उन्हें राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाया गया और बाद में राज्यसभा भेजा गया। ऐसे में उनका अचानक इस्तीफा ममता बनर्जी के लिए राजनीतिक झटका माना जा रहा है।

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क्या सुखेंदु शेखर रॉय के बाद यह एक और बड़ा झटका?

सुष्मिता देव का इस्तीफा ऐसे समय आया है, जब कुछ दिन पहले ही तृणमूल के वरिष्ठ नेता सुखेंदु शेखर रॉय ने भी राज्यसभा से इस्तीफा दिया था। उन्होंने ममता बनर्जी को लिखे अपने पत्र में पार्टी पर भ्रष्टाचार, महिलाओं के खिलाफ अपराध और कानून व्यवस्था फेल होने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे।


रॉय ने अपने पत्र में कहा था कि बंगाल की जनता ने पार्टी के भ्रष्टाचार और अराजकता को खारिज कर दिया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि भाजपा सरकार अब बंगाल के विकास के लिए काम कर रही है। उनके इस बयान ने बंगाल की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया था। अब सुष्मिता देव के इस्तीफे ने उस विवाद को और बढ़ा दिया है।

क्या तृणमूल कांग्रेस के भीतर बगावत?

  • तृणमूल कांग्रेस के अंदर पिछले कुछ समय से असंतोष की खबरें सामने आ रही हैं।
  • कुछ नेताओं पर भाजपा के संपर्क में होने के आरोप भी लगे हैं।
  • रिपोर्टों के अनुसार कई विधायक और सांसद पार्टी नेतृत्व से नाराज बताए जा रहे हैं।
  • कई बागी नेताओं ने अलग गुट बनाने के संकेत दिए थे।
  • इसके बाद पार्टी नेतृत्व लगातार डैमेज कंट्रोल की कोशिश कर रहा है।
  • तृणमूल सांसद कल्याण बनर्जी और कीर्ति आजाद जैसे नेताओं ने बागी नेताओं पर भाजपा से मिलीभगत के आरोप लगाए हैं।
  • वहीं, बागी नेता पार्टी नेतृत्व पर लोकतांत्रिक आवाज दबाने का आरोप लगा रहे हैं।

 

ममता बनर्जी के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती क्या?

तृणमूल कांग्रेस पिछले कई वर्षों से पश्चिम बंगाल की सबसे मजबूत राजनीतिक ताकत रही है। लेकिन लगातार हो रहे इस्तीफों और अंदरूनी विवादों ने पार्टी की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि अगर यह बगावत और बढ़ती है, तो आने वाले समय में पार्टी को बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।

ममता बनर्जी के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती पार्टी को टूटने से बचाने और नाराज नेताओं को मनाने की है। वहीं भाजपा इस पूरे घटनाक्रम को बंगाल की राजनीति में अपने लिए बड़े मौके के रूप में देख रही है। आने वाले दिनों में तृणमूल कांग्रेस के भीतर की हलचल बंगाल की राजनीति को और गर्मा सकती है।

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