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ऋतब्रत बनर्जी मामले में TMC को झटका: विधानसभा स्पीकर के फैसले पर रोक नहीं, कलकत्ता हाईकोर्ट ने किया इनकार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: अमन तिवारी
Updated Thu, 18 Jun 2026 11:30 AM IST
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सार
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को कलकत्ता हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। तृणमूल कांग्रेस में फूट के बाद ऋतब्रत बनर्जी को राज्य विधानसभा में विपक्ष का नेता बनाए जाने के मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा है कि स्पीकर के फैसले में अदालत हस्तक्षेप नहीं करेगी।
ऋतब्रत बनर्जी मामले में हाईकोर्ट से ममता खेमे को बड़ा झटका
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पश्चिम बंगाल में ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता(LoP) बनाए जाने के फैसले पर विवाद हो रहा है। विधानसभा स्पीकर के इस फैसले को ममता बनर्जी के खेमे ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है। हाईकोर्ट ने गुरुवार को सुनवाई के दौरान कहा कि इस मामले में अदालत कोई भी अंतरिम आदेश पारित नहीं करेगी। कलकत्ता हाईकोर्ट में जस्टिस कृष्णा राव ने तत्काल आदेश पारित करने से इनकार करते हुए पक्षों को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
ऋतब्रत बनर्जी मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि स्पीकर के फैसले का विरोध कर रहा गुट तीन हफ्ते के भीतर हलफनामा दायर करे। अदालत ने दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का भी निर्देश दिया। कोर्ट के निर्देश के अनुसार अगली सुनवाई तक स्पीकर का फैसला यथावत रहेगा। अब इस मामले में अगली सुनवाई 28 जुलाई को होगी। कोर्ट के आदेश के बाद मामले में तृणमूल कांग्रेस के अलावा भाजपा की तरफ से भी बयान सामने आए हैं।
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बता दें कि, इस नियुक्ति के खिलाफ ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट के विधायक शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने अपनी याचिका में स्पीकर के फैसले को चुनौती दी थी। चट्टोपाध्याय का कहना था कि स्पीकर ने उनका नामांकन गलत तरीके से खारिज किया और बनर्जी को विपक्ष का नेता बना दिया। जस्टिस कृष्ण राव ने मामले की गंभीरता को देखते हुए फिलहाल कोई अंतरिम आदेश देने से मना कर दिया।
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राजनीतिक समीकरणों की बात करें तो बागी गुट का दावा है कि विधानसभा में टीएमसी के कुल 80 विधायकों में से 58 विधायक उनके साथ हैं। शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने अदालत से तुरंत राहत की मांग की थी क्योंकि 18वीं पश्चिम बंगाल विधानसभा का पहला सत्र गुरुवार से ही शुरू होना था। लेकिन कोर्ट के इस रुख के बाद फिलहाल स्पीकर का फैसला ही प्रभावी रहेगा।
कैसे शुरू हुआ विवाद?
ऋतब्रत बनर्जी और टीएमसी (ममता बनर्जी की पार्टी) के बीच विवाद तब शुरू हुआ जब ऋतब्रत ने आरोप लगाया कि पार्टी ने विधानसभा में नेता चुनने के लिए उनके नकली साइन (दस्तखत) का इस्तेमाल किया। इसके विरोध में जब ममता बनर्जी ने उन्हें पार्टी से निकाला, तो ऋतब्रत ने अभिषेक बनर्जी (ममता के भतीजे) के खिलाफ बगावत कर दी और टीएमसी के ज्यादातर विधायकों (करीब 60 विधायकों) को अपने साथ मिला लिया। इस तरह उन्होंने टीएमसी को दो हिस्सों में तोड़ दिया और खुद विधानसभा में विपक्ष के मुख्य नेता (नेता प्रतिपक्ष) बन गए, जिस पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने सुनवाई हो रही है।