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TMC Rift: लोकसभा स्पीकर ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक से बोले- 19 जून को पार्टी में फूट मामले पर बताएं अपना पक्ष

पीटीआई, नई दिल्ली Published by: अमन तिवारी Updated Wed, 17 Jun 2026 02:24 PM IST
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सार

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी को 19 जून को मिलने के लिए बुलाया है। उन्हें पार्टी में हुई फूट के मामले पर अपना पक्ष रखने को कहा गया है। उनकी यह मुलाकात टीएमसी के अंदरूनी विवाद को लेकर काफी अहम है। पढ़ें पूरी खबर...
 

TMC Rift Updates Lok Sabha Speaker Birla Abhishek Banerjee Meet on June 19 Mamata and other react hindi news
ममता से मोहभंग लोकसभा स्पीकर पर नजरें - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को एक महत्वपूर्ण बैठक के लिए बुलाया है। सूत्रों के अनुसार, स्पीकर ने अभिषेक बनर्जी को 19 जून को मिलने के लिए कहा है। इस मुलाकात का मुख्य उद्देश्य पार्टी में हुई फूट के मामले पर चर्चा करना है। स्पीकर चाहते हैं कि अभिषेक बनर्जी इस पूरे विवाद पर अपना पक्ष रखें और स्थिति स्पष्ट करें। अभिषेक बनर्जी पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे हैं और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव हैं।


एनसीपीआई में विलय की पहल, उठ रहे कई सवाल?
इससे पहले तृणमूल के असंतुष्ट धड़े ने 2023 में अस्तित्व में आई पूर्वोत्तर की राजनीतिक पार्टी- नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई में विलय का एलान किया था। ये पार्टी त्रिपुरा का एक पंजीकृत गैर-मान्याप्राप्त दल है। इस पार्टी का गठन 2022 में हुआ था। शिवली कुंडू इसकी संस्थापक अध्यक्ष हैं। 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में इस पार्टी ने दो सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। दोनों ही उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी। एनसीपीआई का चुनाव चिन्ह पेन की नीब और सात किरणें हैं। 
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बंगाल में बगावत, ममता बनर्जी के खिलाफ कितने नेता?
दरअसल, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे चार मई को आए थे। इस चुनाव के बाद सत्ता गंवा चुकी पार्टी- तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में आंतरिक कलह जारी है। नतीजों की घोषणा के बाद से ही तृणमूल नेताओं में असंतोष देखा जा रहा है। आलम ये है कि पार्टी अब दो फाड़ होने की कगार पर है। संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) को मिलाकर कभी 40 सांसदों के साथ विपक्ष में दमदार भूमिका निभाने वाली टीएमसी अब अस्तित्व के संकट से जूझ रही है। पार्टी के नेता मुखर होकर ममता बनर्जी के खिलाफ बोल रहे हैं।

बंगाल के असंतुष्ट नेताओं के गुट ने पूर्व सीएम ममता बनर्जी के खिलाफ बगावत कैसे की?

तृणमूल कांग्रेस के बागी नेताओं की सूची में कौन?




पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस (TMC) में हुई बड़ी बगावत ने राष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। पार्टी के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 सांसदों ने अलग होकर त्रिपुरा की नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी (NCPI) में विलय का एलान कर दिया। इन सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात के बाद हर कोई एनसीपीआई के बारे में जानना चाहता है। ये बागी लोकसभा अध्यक्ष से मिलने के पहले भाजपा नेता और पश्चिम बंगाल में पार्टी के चुनाव प्रभारी भूपेंद्र यादव से भी मिले।

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अब ये कहा जा रहा है कि जोड़ा फूल (टीएमसी का चुनाव चिह्न) और कमल (भाजपा का चुनाव चिह्न) की बात में पेन की सात किरणों (एनसीपीआई का चुनाव चिह्न) में 20 सांसदों वाली ऐसी चमक आई है जिसके चलते ये गुमनाम दल लोकसभा में पांचवां सबसे बड़ा दल बनने की स्थिति में पहुंच गया है।

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तृणमूल से अब तक किन नेताओं का मोहभंग हुआ?
गौरतलब है कि गुरुवार को प्रकाश चिक बराइक और कोयल मल्लिक ने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। बराइक और कोयल मल्लिक से पहले सुखेंदु शेखर रॉय और बंगाल से निर्वाचित महिला सांसद सुष्मिता देव ने भी सांसदी छोड़ दी है। सुखेंदु शेखर ने पद छोड़ने के बाद तृणमूल के कार्यकाल पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा था कि उन्होंने आरजी कर अस्पताल में हुए दुष्कर्म और हत्या मामले के बाद ही पार्टी छोड़ने का मन बना लिया था। दूसरी तरफ सुष्मिता देव ने पार्टी छोड़ने के बाद अपने गृह राज्य असम की राजनीति पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही।
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