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Supreme Court: 'कुछ बेरोजगार युवा कॉकरोच की तरह हैं, जो व्यवस्था पर हमले करते हैं', शीर्ष कोर्ट की टिप्पणी

पीटीआई, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Fri, 15 May 2026 04:08 PM IST
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सार

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि कुछ बेरोजगार युवा तिलचट्टों की तरह हैं, जो आगे चलकर सोशल मीडिया कार्यकर्ता और आरटीआई कार्यकर्ता बनकर व्यवस्था पर सवाल उठाने लगते हैं। कोर्ट ने यह टिप्पणी एक वकील की वरिष्ठ वकील पदनाम की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान की। 

Unemployed 'youngsters like cockroaches' become media, activists; attack system: CJIअरावली मामला
जस्टिस सूर्यकांत - फोटो : amarujala.com
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विस्तार

भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने शुक्रवार को कुछ बेरोजगार युवाओं पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वे 'कॉकरोच' जैसे हैं, जो आगे चलकर मीडिया, सोशल मीडिया और आरटीआई कार्यकर्ता बन जाते हैं। फिर व्यवस्था पर सवाल उठाने लगते हैं।
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यह टिप्पणी उस समय आई ,जब मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ एक वकील की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में वकील ने वरिष्ठ वकील का दर्जा पाने की कोशिश कर रहा था। कोर्ट ने इस पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि समाज में पहले से ही कुछ ऐसे परजीवी मौजूद हैं, जो व्यवस्था पर लगातार हमला करते हैं।
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पीठ ने याचिकाकर्ता वकील से कहा, पूरी दुनिया वरिष्ठ (वकील) बनने के योग्य हो सकती है, लेकिन कम से कम आप तो इसके हकदार नहीं हैं। सीजेई ने स्पष्ट रूप से टिप्पणी की कि अगर दिल्ली हाईकोर्ट याचिकाकर्ता को वरिष्ठ वकील का पदनाम प्रदान करता है, तो सुप्रीम कोर्ट उनके पेशेवर आचरण को देखते हुए इसे रद्द कर देगा। 

ये भी पढ़ें: अरावली मामला: 'अभी खनन पट्टा धारकों के पक्ष में कोई आदेश पारित नहीं करेंगे', सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

सीजेआई सूर्य कांत ने क्या कहा?
सीजेआई ने फेसबुक पर याचिकाकर्ता की ओर से इस्तेमाल की गई भाषा का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, समाज में पहले से ही ऐसे परजीवी हैं, जो सिस्टम पर हमला करते हैं और आप उनसे हाथ मिलाना चाहते हैं?  उन्होंने कहा, कई युवा कॉकरोच की तरह हैं, जिन्हें न तो कोई नौकरी मिलती है और न ही पेशे में कोई जगह। उनमें से कुछ मीडिया में चले जाते हैं। कुछ सोशल मीडिया कार्यकर्ता बन जाते हैं। कुछ आरटीआई कार्यकर्ता और अन्य कार्यकर्ता बन जाते हैं और फिर वे हर किसी पर हमला करने लगते हैं। 

'वरिष्ठ पदनाम के लिए प्रयास नहीं किया जाना चाहिए'
पीठ ने याचिकाकर्ता से यह भी पूछा कि क्या उसके खिलाफ कोई अन्य मुकदमा नहीं है। पीठ ने पूछा, क्या यह उस व्यक्ति का आचरण है जो वरिष्ठ वकील के रूप में नामित होना चाहता है? कोर्ट ने कहा, वरिष्ठ वकील का पदनाम एक ऐसी चीज है, जो किसी व्यक्ति को प्रदान की जाती है और इसके लिए प्रयास नहीं किया जाना चाहिए। शीर्ष अदालत ने पूछा कि क्या वरिष्ठ वकील का पदनाम एक प्रतिष्ठा प्रतीक है, जिसे केवल दिखावे के लिए रखा जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा, आप इसे आगे बढ़ा रहे हैं। क्या यह उचित प्रतीत होता है?  कोर्ट ने पाया कि वह केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से कहना चाहता है कि वह काले कपड़े पहनने वाले कई लोगों की डिग्री सत्यापित करे, क्योंकि उनकी डिग्री के असली होने पर गंभीर शक है।

पीठ ने कहा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया इस मुद्दे पर कभी कुछ नहीं करेगी, क्योंकि उन्हें उनके वोटों की जरूरत है। इसके बाद याचिकाकर्ता ने पीठ से माफी मांगी और याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी। फिर पीठ ने याचिका वापस लेने की अनुमति दी।
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