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Unmute Bharat: 'विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाना है तो सोने का मोह छोड़ें', वर्तमान संकट पर गौरव वल्लभ की दो टूक

Rajkishor राजकिशोर
Updated Mon, 25 May 2026 08:27 AM IST
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सार

Unmute Bharat With Gaurav Vallabh: पांच ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था में कितने जीरो पूछकर मशहूर हुए प्रो. गौरव वल्लभ ने वर्तमान संकट पर दो टूक कहा है। उन्होंने साफ कहा कि विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाना है तो सोने का मोह छोड़ें और पब्लिक ट्रांसपोर्ट अपनाएं।

Unmute Bharat: 'If you want to increase your foreign exchange reserves, give up love for gold', Gaurav Vallabh
प्रो. गौरव वल्लभ, सदस्य, प्रधानमंत्री आर्थिक सलाहकार परिषद - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

पांच ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था में कितने जीरो होते हैं? यह सवाल पूछकर राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरने वाले अर्थशास्त्री प्रोफेसर गौरव वल्लभ के सामने जब अनम्यूट भारत में यही चुटीला सवाल दागा गया कि भारत की 5 ट्रिलियन इकोनॉमी के लक्ष्य वाले ये जीरो असल में कितने सही हैं? तो उन्होंने अर्थव्यवस्था की एक बेहद यथार्थवादी और गंभीर तस्वीर पेश कर दी।


एक्सएलआरआई में प्रोफेसर, आईआईएम के डायरेक्टर रह चुके और कांग्रेस के पूर्व नेता प्रोफेसर वल्लभ ने भारत पर बढ़ते आयात के दबाव और विदेशी मुद्रा संकट को लेकर गहरी चिंता जताई है। वर्तमान में प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य प्रोफेसर वल्लभ ने अमर उजाला के पॉडकास्ट में दो टूक कहा कि डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी और घटते विदेशी मुद्रा भंडार से निपटने के लिए देशवासियों को अपनी उपभोग की आदतों में बड़ा बदलाव करना होगा। उन्होंने अपील की कि यदि लोग एक वर्ष तक सोने की खरीद टाल दें और निजी वाहनों के बजाय पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग करें, तो देश अरबों डॉलर की विदेशी मुद्रा बचा सकता है। प्रोफेसर वल्लभ ने साफ कहा कि अगर देश को वास्तव में मजबूत अर्थव्यवस्था बनना है, तो सिर्फ ट्रिलियन के जीरो गिनने से काम नहीं चलेगा, बल्कि आयात पर निर्भरता कम करनी होगी।
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कच्चे तेल और सोने के आयात ने बढ़ाया दबाव
प्रोफेसर वल्लभ ने कहा कि भारत हर वर्ष लगभग 110 बिलियन डॉलर का कच्चा तेल और करीब 70 बिलियन डॉलर का सोना आयात करता है। पश्चिम एशिया में तनाव और रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिससे कच्चे तेल की कीमतें 70 डॉलर प्रति बैरल से उछलकर 105 डॉलर तक पहुंच चुकी हैं। इसका सीधा असर भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ा है और डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी इसी भारी आर्थिक दबाव का परिणाम है।
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सप्ताह में एक दिन पब्लिक ट्रांसपोर्ट की नसीहत
विदेशी मुद्रा बचाने के व्यावहारिक उपाय बताते हुए प्रोफेसर वल्लभ ने लोगों से ईंधन की खपत कम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सप्ताह में कम से कम एक दिन पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग करने की आदत डालें।

'जेन जी को परिवारवाद नहीं, अवसर चाहिए'
देश की युवा आबादी का उल्लेख करते हुए पूर्व कांग्रेसी नेता ने कहा कि भारत की करीब 65 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है और यह पीढ़ी पुरानी राजनीति से बहुत आगे निकल चुकी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जेन जी को सरनेम की राजनीति या परिवारवाद से कोई लेना-देना नहीं है। आज का युवा रोजगार मांगने से ज्यादा उद्यमिता और यूनिकॉर्न बनाने का सपना देख रहा है। उन्हें बेहतर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, तेज भुगतान प्रणाली और बेहतर जीवनशैली चाहिए।

मोहब्बत की दुकान और भाषा की मर्यादा पर तंज
राहुल गांधी की 'मोहब्बत की दुकान' वाली राजनीति पर करारा तंज कसते हुए कहा कि जो लोग ऐसी बातें करते हैं, वे ही देश के प्रधानमंत्री के लिए 'तू-तड़ाके' और 'तू चोर है' जैसी अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करते हैं।

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