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Unmute Bharat: जयराम रमेश बोले- चुनाव आयोग NDA का नया घटक, पूछा- राम मंदिर में चंदा चोरी पर पीएम खामोश क्यों?

Thu, 02 Jul 2026 07:28 AM IST
Rajkishor राजकिशोर
Updated Thu, 02 Jul 2026 07:28 AM IST
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Unmute Bharat: Jairam Ramesh Why PM silence on theft of donations at Ram Mandir? calls EC new ally of NDA.
जयराम रमेश ने सवालों के बेबाकी से जवाब दिए - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
वोट चोरी, सीट चोरी और अब चंदा चोरी। देश में इस वक्त यही तीन शब्द कांग्रेस के प्रमुख रणनीतिकार जयराम रमेश की जुबान पर सबसे ऊपर हैं। 400 पार का नारा देने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उन्होंने माइनॉरिटी प्रधानमंत्री करार दिया, जो आज चंद्रबाबू नायडू और नीतीश कुमार के समर्थन पर टिके हैं। उन्होने आरोप लगाया कि 2024 के झटके के बाद चुनाव आयोग खुद एनडीए का नया घटक दल बन गया है।
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कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार विभाग के अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने अमर उजाला के विशेष पॉडकास्ट अनम्यूट भारत में केंद्र सरकार पर तीखे राजनीतिक हमले के साथ ही राहुल गांधी की सियासत के पन्ने भी खोले।  राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े विवाद पर जयराम रमेश ने कहा कि मंदिर निर्माण के लिए बना ट्रस्ट पूरी तरह सरकार की निगरानी में बना। आरएसएस को इसकी पूरी जानकारी थी। प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की आंखों के सामने यह घोटाला हुआ। उन्होंने पूरे प्रकरण की सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की निगरानी में सीबीआई जांच कराने की मांग की और सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री हर विषय पर मन की बात करते हैं, तो इस मुद्दे पर चुप क्यों हैं।
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सरकार नायडू व नीतीश पर टिकी
पीएम मोदी पर हमला बोलते हुए जयराम ने कहा, भाजपा 400 पार तो दूर, अपने दम पर बहुमत भी हासिल नहीं कर सकी। उनके मुताबिक 2024 में भाजपा को सिर्फ 240 सीटें मिलीं और सरकार सहयोगी दलों के सहारे चल रही है। इसलिए मोदी आज माइनॉरिटी पीएम हैं। प्रधानमंत्री खुद की तुलना पंडित जवाहरलाल नेहरू से करते हैं, जबकि नेहरू हर बार स्पष्ट बहुमत से जीते थे। इसके विपरीत मोदी चंद्रबाबू नायडू और नीतीश कुमार के समर्थन पर निर्भर हैं। रमेश का आरोप है कि 17 अप्रैल को सरकार दो-तिहाई बहुमत नहीं जुटा सकी। अब विपक्षी दलों को तोड़कर उस कमी को पूरा करने की कोशिश हो रही है। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना में टूट का जिक्र करते हुए दावा किया कि इसके बावजूद भाजपा लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत से अभी भी दूर है।

चुनाव आयोग एनडीए का नया घटक दल
चुनावी प्रक्रिया पर कांग्रेस का अब तक का सबसे बड़ा हमला करते हुए जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा की पूरी रणनीति बदल गई। निष्पक्ष चुनाव में नुकसान की आशंका देखते हुए चुनाव आयोग चुनाव आयोग भी सत्ता पक्ष के साथ खड़ा दिखाई दे रहा है। उन्होंने मध्य प्रदेश की उदाहरण के तौर पर कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के मामले का जिक्र किया। जयराम ने आरोप लगाया कि रिटर्निंग अधिकारी ने राज्य सरकार के इशारे पर निर्णय लिया और चुनाव आयोग ने आखिरी क्षण तक चुप्पी साधे रखी और तब तक इंतजार किया जब तक भाजपा उम्मीदवार को निर्वाचित घोषित नहीं कर दिया गया।

इस मामले में वह खुद चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मिलने गए थे और सुप्रीम कोर्ट भी गए थे, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से करीब 27 लाख नाम हटाए जाने का भी उल्लेख किया और कहा कि हरियाणा, महाराष्ट्र, दिल्ली और बिहार में भी विपक्ष चुनाव नहीं हारा, बल्कि हराया गया।

ममता पर विराम, अखिलेश के साथ गठबंधन जारी
ममता बनर्जी और सोनिया गांधी की मुलाकात पर जयराम रमेश ने विलय की अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह व्यक्तिगत मुलाकात थी और दोनों परिवारों के पुराने संबंध हैं। उत्तर प्रदेश पर उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का गठबंधन मजबूत है। 2024 के लोकसभा चुनाव में संविधान बचाने के मुद्दे और दोनों दलों की साझेदारी ने भाजपा को बड़ा नुकसान पहुंचाया था। उन्होंने भरोसा जताया कि विधानसभा चुनाव में भी यही गठबंधन जारी रहेगा, हालांकि सीट बंटवारे पर अंतिम फैसला बाद में होगा।

देश ने असली राहुल को देखा- जयराम रमेश
राहुल के नेतृत्व पर जयराम ने कहा कि भारत जोड़ो यात्रा कांग्रेस के लिए परिवर्तनकारी साबित हुई। इस यात्रा से देश ने नए नहीं, बल्कि असली राहुल गांधी को देखा, जो मीडिया और सोशल मीडिया की छवि से अलग थे। कहा, गराहुल की लड़ाई सिर्फ सत्ता की नहीं, बल्कि संविधान, सामाजिक न्याय और विचारधारा की है। प्रधानमंत्री पद के सवाल पर कहा कि कांग्रेस को बहुमत मिलता है तो राहुल का प्रधानमंत्री चुना जाना स्वाभाविक होगा।


'शाह नारद मुनि, राहुल क्विक गन मुरुगन'
प्रियंका की तारीफ और राहुल पर शाह की टिप्पणी पर जयराम ने कहा कि खुद को चाणक्य समझने वाले गृह मंत्री अब नारद मुनि की भूमिका निभा रहे हैं। प्रियंका बेहद प्रभावी संवादकर्ता हैं, जबकि राहुल मशीनगन की तरह ठका-ठक सवाल करते हैं। रमेश के मुताबिक दोनों नेताओं की शैली अलग जरूर है, लेकिन एक-दूसरे की पूरक है और दोनों कांग्रेस की राजनीति को मजबूती देते हैं।

'डिप्लोमेसी नहीं, हगलोमेसी चल रही है'
विदेश नीति पर जयराम ने आरोप लगाया कि पीएम मोदी ने दशकों पुरानी सर्वदलीय विदेश नीति की परंपरा तोड़ दी है। उन्होंने इजराइल के प्रति भारत के रुख, डोनाल्ड ट्रंप के बयानों का हवाला देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने डिप्लोमेसी को हगलोमेसी में बदल दिया है।
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