पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
फ्री ई-पेपर
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Congress raises questions about the Great Nicobar project, asks are we heading towards disaster

ग्रेट निकोबार परियोजना: कांग्रेस ने पीएम मोदी को याद दिलाईं पांच याचिकाएं, कहा- क्या तबाही की ओर बढ़ रहे हम?

Thu, 02 Jul 2026 12:06 PM IST
Asmita Tripathi एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली Published by: Asmita Tripathi Updated Thu, 02 Jul 2026 12:06 PM IST
सार

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना को पर्यावरण के लिए विनाशकारी बताते हुए केंद्र सरकार निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इस परियोजना से जैव विविधता को नुकसान पहुंचाएगी। 

विज्ञापन
Congress raises questions about the Great Nicobar project, asks are we heading towards disaster
जयराम रमेश, कांग्रेस नेता - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने गुरुवार को विवादास्पद ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने इस परियोजना के खिलाफ अपने वर्षों के विरोध को दर्ज किया है, जिसे उन्होंने पर्यावरणीय आपदा की ओर एक कदम करार दिया है।

विज्ञापन

कांग्रेस नेता ने क्या बताया?
एक पोस्ट में, कांग्रेस नेता ने इस मुद्दे पर अपनी व्यापक सार्वजनिक भागीदारी का एक संकलित संग्रह सार्वजनिक किया, जिसमें सोशल मीडिया पोस्ट, संसदीय हस्तक्षेप और विभिन्न केंद्रीय मंत्रियों के साथ आधिकारिक पत्राचार के साथ-साथ उनकी प्रतिक्रियाएं भी शामिल हैं। उन्होंने कहा, 'ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना और उस अद्वितीय जैव विविधता से समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र पर इसके विनाशकारी प्रभावों को लेकर पिछले कुछ वर्षों में मेरे व्यापक सार्वजनिक जुड़ाव को जानने में रुचि रही है।

विज्ञापन


जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री पर क्या बोलें?
यहां अधिकांश सोशल मीडिया पोस्ट, संसद में दिए गए कुछ संक्षिप्त भाषण और सबसे महत्वपूर्ण विभिन्न केंद्रीय मंत्रियों को लिखे गए पत्र और उनके जवाबों का संकलन पेश है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाना बनाते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि यह विशाल विकास परियोजना द्वीप के प्राचीन, जैव विविधता से समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक विनाशकारी खतरा पैदा करती है। रमेश ने कहा, 'इसमें कोई संदेह नहीं है कि प्रधानमंत्री ग्रेट निकोबार में पर्यावरणीय आपदा की ओर अपना कदम बढ़ाते रहेंगे, इसलिए इस तरह के और भी सार्वजनिक कार्यक्रम होंगे।'

विज्ञापन
विज्ञापन

उन्होंने जनहितैषी और जागरूक नागरिकों और नागरिक समाज समूहों द्वारा दायर की गई पांच अलग-अलग याचिकाओं पर भी प्रकाश डाला, जिनकी सुनवाई कलकत्ता उच्च न्यायालय में हो रही है। ये चुनौतियां इस प्रकार हैं।

  • कैम्पबेल बे राष्ट्रीय उद्यान से संबंधित पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र अधिसूचना के उल्लंघन पर आधारित चुनौती।
  • गलाथिया राष्ट्रीय उद्यान से संबंधित पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र अधिसूचना के उल्लंघन पर आधारित चुनौती।
  • वन अधिकार अधिनियम, 2006 और इसके नियम, 2008 के उल्लंघन पर आधारित चुनौती।
  • तटीय क्षेत्र विनियमन अधिसूचना, 2019 और पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के उल्लंघन पर आधारित चुनौती।
  • राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण के 16 फरवरी, 2026 के आदेश को विभिन्न आधारों पर चुनौती। देश की पारिस्थितिक चेतना की परीक्षा हो रही है।

इस बीच, सरकार के अनुसार, यह परियोजना पूर्व-पश्चिम शिपिंग मार्ग से द्वीप की निकटता (लगभग 40 समुद्री मील की दूरी) का लाभ उठाने और रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा उद्देश्यों की पूर्ति के साथ-साथ विदेशी ट्रांसशिपमेंट बंदरगाहों पर भारत की निर्भरता को कम करने का प्रयास करती है।

क्या है यह परियोजना?
इस परियोजना में 14.2 मिलियन ट्वेंटी-फुट इक्विवेलेंट यूनिट (एमटीईयू) का एक अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल, 4,000 यात्रियों की क्षमता वाला एक ग्रीनफील्ड अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, 450 एमवीए का एक गैस-सौर ऊर्जा संयंत्र और एक नियोजित टाउनशिप शामिल है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed