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Karnataka: 52 आपराधिक मुकदमे बंद करने वाले कांग्रेस सरकार के फैसले पर रोक, हाईकोर्ट ने निर्णय में क्या कहा?

Thu, 02 Jul 2026 12:47 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Thu, 02 Jul 2026 12:47 PM IST
सार

क्या कर्नाटक सरकार 52 आपराधिक मामलों को वापस लेकर कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन कर रही थी? आखिर हाईकोर्ट ने इस फैसले पर अंतरिम रोक क्यों लगाई और अदालत ने किस आधार पर सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए? जानिए आलंद सांप्रदायिक दंगा मामले समेत पूरे विवाद की कहानी...
 

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Karnataka High Court Stays Congress Government's Decision to Withdraw 52 Criminal Cases Seeks Explanation
कांग्रेस सरकार को हाईकोर्ट का झटका। - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

कर्नाटक सरकार के 52 आपराधिक मामलों को वापस लेने के फैसले पर हाईकोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी है। इन मामलों में 2022 के आलंद सांप्रदायिक दंगा मामले से जुड़े सात मुकदमे भी शामिल हैं। अदालत ने पहली नजर में माना कि सरकार ने मुकदमे वापस लेने की प्रक्रिया में कानूनी नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया। इसी वजह से हाईकोर्ट ने कैबिनेट के फैसले पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। इस फैसले के बाद राज्य में कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक टकराव और तेज हो गया है।
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सरकार ने हाल ही में कैबिनेट बैठक में 52 आपराधिक मामलों को वापस लेने का फैसला किया था। इन मामलों में किसानों, कन्नड़ संगठनों के कार्यकर्ताओं और अन्य प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मुकदमों के साथ-साथ आलंद सांप्रदायिक दंगे से जुड़े सात मामले भी शामिल थे। लेकिन हाईकोर्ट ने गिरीश भारद्वाज बनाम कर्नाटक सरकार मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि पहली नजर में सरकार ने दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 321 का इस्तेमाल उचित तरीके से नहीं किया है। अदालत ने यह भी कहा कि पहले दिए गए हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार सरकार को अभियोजन वापस लेने के लिए तय कानूनी प्रक्रिया अपनानी थी।
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पूर्व CM सिद्धारमैया के किस फैसले पर रोक लगी?

कर्नाटक में पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के कार्यकाल में 21 मई को हुई एक कैबिनेट बैठक में 52 आपराधिक मामले वापस लेने का निर्णय लिया गया था। इन मुकदमों में कन्नड़ कार्यकर्ताओं, कावेरी प्रदर्शनकारियों, कन्नड़ समर्थक और कलासा बंदूरी प्रदर्शनों से जुड़े मामले शामिल हैं। कन्नड़ कार्यकर्ता वाटल नागराज के खिलाफ 10 मामले और किसानों तथा दलित कार्यकर्ताओं पर दर्ज मामले भी वापस लिए जाएंगे। सरकार ने आलंद में लाडले मुश्ताक दरगाह विवाद से संबंधित सात मामले भी वापस लेने का फैसला किया। मंत्री एच के पाटिल ने बताया कि कुछ मामलों में उच्च न्यायालय का फैसला आना बाकी है।
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क्या है आलंद दंगा मामला, जिसे लेकर सबसे ज्यादा विवाद हुआ?

विवाद की शुरुआत एक मार्च 2022 को कलबुर्गी जिले के आलंद तालुक में हुई थी। भाजपा के कुछ कार्यकर्ता हजरत लाडले मशक दरगाह परिसर में मौजूद शिवलिंग की कथित शुद्धि करना चाहते थे। उनका आरोप था कि शिवलिंग का अपमान किया गया है। इस विवाद के बाद इलाके में सांप्रदायिक हिंसा भड़क गई। हालात इतने बिगड़ गए कि प्रशासन को निषेधाज्ञा लागू करनी पड़ी। दंगे में कई पुलिसकर्मी, जिनमें एक डीएसपी भी शामिल थे, घायल हुए। इस मामले में कुल 13 मुकदमे दर्ज हुए थे, जिनमें से सात को वापस लेने का फैसला सरकार ने किया था।

सरकार ने अपने फैसले का क्या बचाव किया था?

डीके शिवकुमार ने तब कहा था कि केवल आलंद दंगा ही नहीं, बल्कि किसानों, कन्नड़ संगठनों और अन्य आंदोलनों से जुड़े राजनीतिक रूप से प्रेरित मामलों को भी कानूनी राय लेने के बाद वापस लिया गया है। गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने बताया कि कैबिनेट की एक उपसमिति ने सभी मामलों की अलग-अलग समीक्षा की थी। समिति ने कानूनी पहलुओं का अध्ययन करने के बाद ही मामलों को वापस लेने की सिफारिश की। उनके अनुसार यह फैसला जल्दबाजी में नहीं, बल्कि विस्तृत विचार-विमर्श के बाद लिया गया था।

भाजपा ने सरकार पर क्या आरोप लगाए थे?

भाजपा ने कांग्रेस फैसले को तुष्टिकरण की राजनीति करार दिया था। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार वोट बैंक की राजनीति के लिए दंगों के आरोपियों को बचा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों और कन्नड़ कार्यकर्ताओं के मामलों के साथ दंगा मामलों को जोड़कर जनता को गुमराह कर रही है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने सवाल उठाया कि ऐसे आरोपियों को राहत देकर सरकार समाज को क्या संदेश देना चाहती है। भाजपा विधायक सुनील कुमार ने भी आरोप लगाया था कि एसडीपीआई से जुड़े लोगों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने पर सरकार को जवाब देना चाहिए।


हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद सरकार का फैसला फिलहाल प्रभावी नहीं रहेगा। अदालत ने स्पष्ट किया है कि अगली सुनवाई तक 52 मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया पर रोक रहेगी।
 
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