आगामी विधानसभा चुनावों में अनुच्छेद 370 को भाजपा बनाएगी हथियार, बूथ स्तर पर तैयारियां शुरू
भाजपा अध्यक्ष और देश के गृहमंत्री अमित शाह जमीनी रणनीति बनाने के लिए जाने जाते हैं। अमित शाह की खासियत है कि वह जितना बूथ स्तर तक तैयारी पर जोर देते हैं, उतना ही जनता की नब्ज पकड़कर राजनीतिक मुद्दों को चुनकर भी आगे बढ़ते हैं। भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा भी रणनीतिकार के तौर पर जाने जाते हैं। इस समय भाजपा के पास सबसे बड़ा मुद्दा जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 की समाप्ति है, जिसे देश की जनता का खूब समर्थन मिल रहा है।
वहीं पार्टी इसके बल पर हरियाणा, महाराष्ट्र, झारखंड, दिल्ली समेत अन्य अन्य राज्यों के विधानसभा चुनाव में विरोधियों को धूल चटाने की तैयारी कर रही है। भाजपा को भरोसा है कि ममता बनर्जी के गढ़ पश्चिम बंगाल में भी वह अपने तैयारियों के बूते तृणमूल कांग्रेस को विपक्ष में बैठा देगी।
हरियाणा, महाराष्ट्र और बंगाल में जबरदस्त तैयारी
पश्चिम बंगाल भाजपा के अध्यक्ष दिलीप घोष आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त हैं। घोष कहते हैं कि ममता बनर्जी की घबराहट साफ दिखाई दे रही है। लोकसभा चुनावों के नतीजों में जनता ने ममता बनर्जी को संदेश दे दिया है। वहीं प्रस्तावित विधानसभा चुनावों को लेकर भाजपा ने हरियाणा में 70 पार का लक्ष्य रखा है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की जन आशीर्वाद यात्रा चल रही है।
महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडनवीस भी यात्रा के जरिए जनता के बीच उतर चुके हैं। दोनों राज्यों में भाजपा ने बूथ दर बूथ तक पहुंचना शुरू कर दिया है। जन-जन तक पहुंचने के लिए राजनीतिक कार्यक्रम बनाए जा रहे हैं। साथ ही, अनुच्छेद 370 को लेकर जन जागरुकता अभियान को भी धार दी जा रही है।
दिल्ली में होगी जोरदार लड़ाई
दिल्ली में विधानसभा चुनाव अगले साल फरवरी में प्रस्तावित हैं। भाजपा के नेता अभी से अनुच्छेद 370 हटाने को लेकर 370 कार्यक्रम करने की प्रक्रिया में हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय गोयल ने दिल्ली के अपार्टमेंट्स, सोसाइटी, कालोनियों, मुहल्लों, कारोबारियों, प्रोफेशनल्स में पैठ बढ़ानी शुरू की है, तो भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी लगातार सक्रिय हैं। आम आदमी पार्टी के नेता भी मान रहे हैं कि इस बार दिल्ली विधानसभा के चुनाव में राजनीतिक लड़ाई जोरदार होगी।
शीला दीक्षित के निधन के बाद समीकरण बदले
यमुनापार से आम आदमी पार्टी के एक विधायक का कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के निधन के बाद से समीकरण बदले हैं। भाजपा भी इसे समझ रही है, इसलिए दिल्ली में वोटों के ध्रुवीकरण में जुट गई है। भाजपा के इस दांव की काट करने के लिए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जनता से कनेक्ट होने के फार्मूले को आगे बढ़ाया है। साथ ही, दिल्ली में बिजली की दरों से लेकर पानी के बिलों को कम करने के राजनीतिक दांव को अजमा रहे हैं।

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