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चीन की दोहरी चालः मेज पर मुस्कान, पीछे से साइबर युद्ध; अमेरिकी रिपोर्ट ने भारत के खिलाफ दुष्प्रचार पर खोली पोल

Rajkishor राजकिशोर
Updated Wed, 19 Nov 2025 08:15 PM IST
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सार

अमेरिकी संसद की ओर से जारी रिपोर्ट में चीन का दोहरा चेहरा सामने आया है। एक ओर चीन शांति की बातचीत करता है, लेकिन सीमाओं और सैन्य ढांचे पर दबाव बढ़ाता जा रहा है। यह दोहरी रणनीति अब सिर्फ कूटनीति का हिस्सा नहीं, बल्कि एक बड़े खेल की तैयारी लगती है।

US Congress report exposes China's propaganda against India
भारत-चीन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

सीमा पर भले ही युद्ध के ढोल न बज रहे हों, लेकिन एशिया में रणनीतिक मोर्चेबंदी के चलते तापमान लगातार बढ़ रहा है। अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस की तरफ से वॉशिंगटन में जारी यूएस-चीन आर्थिक और सुरक्षा समीक्षा आयोग की वार्षिक रिपोर्ट में वह तस्वीर उभरकर आई है जिसे भारत पिछले एक साल में महसूस करता रहा है। चीन शांति की बातचीत करता है, लेकिन सीमाओं और सैन्य ढांचे पर दबाव बढ़ाता जा रहा है। यह दोहरी रणनीति अब सिर्फ कूटनीति का हिस्सा नहीं, बल्कि एक बड़े खेल की तैयारी लगती है।

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यह खेल सिर्फ सीमा पर सैनिकों की तैनाती तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, चीन एक ओर शांति वार्ता का दिखावा कर रहा है तो दूसरी ओर वह भारत के खिलाफ 'ग्रे ज़ोन गतिविधियां' जिसे हम युद्ध और शांति के बीच की चालें कह सकते हैं, उसका खूब उपयोग देखने को मिला। पाकिस्तान को सैन्य आपूर्ति के साथ-साथ साइबर युद्ध और दुष्प्रचार के माध्यम से लगातार दबाव बनाने में चीन ने कोई कसर नहीं छोड़ी। इसका चिंताजनक पहलू यह था कि भारत में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस समेत अन्य राजनीतिक दलों व तमाम मोर्चों ने चीन के इस झूठे नैरेटिव या दुष्प्रचार को भारत के अंदर भी चलाने में खूब मदद की।
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मेज पर दोस्ती और पहाड़ों पर सैन्य चौकियां
अमेरिकी कांग्रेस की विस्तृत रिपोर्ट में कहा गया है कि 2024–25 में भारत और चीन के बीच संवाद बढ़ा। अक्टूबर 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग मिले और डेपसांग–डेपचोक में संयुक्त गश्त की सहमति बनी। एलएसी पर संयुक्त गश्त की सहमति वाली यह मुस्कान असलियत को नहीं ढक पाई। ठीक इसी दौरान बल्कि उसके समानांतर चीन ने चीन ने एलएसी के नज़दीक नए एयरबेस, सड़कें और सैन्य बुनियादी ढांचे का विस्तार तेजी से किया। अरुणाचल और पूर्वी लद्दाख जैसे विवादित क्षेत्रों पर चीन का रुख कठोर बना रहा, जिसे विश्लेषकों ने "दो पटरियों वाली रणनीति" बताया, यानी एक ओर दोस्ती और दूसरी तरफ लगातार दबाव।

बीजिंग की तरफ से जारी बयानों और भारत के आधिकारिक वक्तव्यों के सुरों में भी अंतर बना रहा, जो यह बताने के लिए पर्याप्त है कि रिश्तों की सतह के नीचे बहुत कुछ खदबदा रहा है। रिपोर्ट साफ करती है कि भारत के लिए भविष्य की सुरक्षा केवल सीमा पर नहीं, बल्कि सूचना और आर्थिक मोर्चों पर भी तय होगी।🚨 सेना के सौदों को निशाना: चीन का खतरनाक 'सिंदूर' ऑपरेशनरिपोर्ट में चीन की जिस रणनीति को 'ग्रे ज़ोन गतिविधि' कहा गया है, उसका सबसे खतरनाक पहलू भारत के खिलाफ सूचना युद्ध के रूप में सामने आया है।

एआई और दुष्प्रचारःचीन का नया मोर्चा
सिर्फ मिसाइलें, ड्रिल या जेट ही नहीं, चीन ने युद्ध का एक नया आयाम खोला है। रिपोर्ट कहती है कि बीजिंग ने एआई यानी आर्टिफिशियल जनित फर्जी तस्वीरें और डिजिटल अभियान छेड़े जो भारत के रक्षा सौदों खासकर राफेल को प्रभावित करने वाले थे। दिल्ली के रणनीतिक हलकों में यह खतरनाक संकेत माना जा रहा है।भारत को अब सिर्फ सीमाओं पर ही नहीं, बल्कि डेटा, सूचना और तकनीक की लड़ाई में भी चीन से टकराना पड़ेगा।

दरअसल, पठानकोट की घटना के बाद मई 2025 में हुए भारत-पाकिस्तान टकराव से ठीक पहले, चीन ने भारत को निशाना बनाकर एक व्यापक दुष्प्रचार अभियान चलाया। चीन ने इस ऑपरेशन में झूठे सोशल मीडिया अकाउंट के माध्यम से यह नैरेटिव फैलाया गया कि चीनी लड़ाकू विमानों ने भारत के पश्चिमी या रूसी हथियारों जैसे रफाल को गिरा दिया है।चीन का प्राथमिक उद्देश्य अपने हथियारों को वैश्विक बाजार में सबसे शक्तिशाली (अमेरिका के समक्ष) और विश्वसनीय साबित करना था, जिससे भारत सहित अन्य देश पश्चिमी और रूसी रक्षा प्रणालियों पर भरोसा खो दें और चीनी हथियारों की ओर मुड़ें।

चीन के फेक नैरेटिव का असर भारत में
रिपोर्ट बताती है कि 2024 में चीन ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई का उपयोग करके नकली तस्वीरों और वीडियो से भारत के आंतरिक मामलों में फूट डालने की कोशिश की, ताकि भारत के भीतर गलत सूचना के बीज बोए जा सकें। दुष्प्रचार में देश के भीतर से मिली मदद अमेरिकी रिपोर्ट का सबसे गंभीर पहलू यह है कि चीन के इस दुष्प्रचार नैरेटिव को भारत के भीतर ही बल मिला। चीन की यह गलत सूचना कि रफाल जैसे सौदों में घोटाला है या ये हथियार कारगर नहीं हैं, देश के भीतर कांग्रेस समेत कई राजनीतिक दलों और समूहों ने हाथों-हाथ ली।

भारतीय चिंताओं को तब बल मिला जब यह देखा गया कि देश के इन राजनीतिक हलकों ने बिना तथ्य जांचे, चीन के इरादों को जाने बिना, रफाल सौदे की कथित कमियों पर अनावश्यक सवाल उठाए। ऐसा करके, इन समूहों ने अनजाने में ही सही, चीन के इस इरादे को मजबूत किया कि भारत अपने सबसे महत्वपूर्ण रक्षा सौदों पर ही संदेह करे और पश्चिमी हथियारों से मुंह मोड़ ले।

कश्मीर से कराची तक: पाकिस्तान के पीछे चीन का हाथ?
रिपोर्ट का सबसे बड़ा खुलासा मई 2025 के भारत–पाकिस्तान रक्षा टकराव से जुड़ा है। कश्मीर में 26 नागरिकों की हत्या के बाद दोनों देशों की सेनाएं कई दशकों में पहली बार इतने अंदर तक एक-दूसरे के इलाक़ में घुसीं। जाहिर तौर पर भारत ने पाकिस्तान को उसकी हैसियत बता दी, हमारे सैन्य पराक्रम के आगे वह कहीं टिक नहीं पाया। इसके बावजूद चीन ने जो किया, वह इस रिपोर्ट में तफसील ने बताया गया है और वह खतरनाक है।

पाकिस्तान ने इस संघर्ष में चीनी हथियारों HQ-9, PL-15 और J-10 का खुलकर इस्तेमाल किया। भारत ने दुनिया को बताया भी था कि चीन ने “लाइव इनपुट्स” दिए, जिसे बीजिंग ने खारिज तो किया, लेकिन सहयोग के कई संकेत छिपे नहीं रह सके।

पाकिस्तान को 2019–23 के बीच मिलने वाली 82% सैन्य आपूर्ति चीन से आई। चीन ने पाकिस्तान को 40 J-35 स्टील्थ फाइटर जेट देने की पेशकश भी कर दी है। रिपोर्ट स्पष्ट कहती है कि बीजिंग और इस्लामाबाद के बीच यह बढ़ती नज़दीकी भारत के लिए केवल सैन्य चुनौती नहीं, बल्कि एक लंबी रणनीतिक घेराबंदी है।

SCO समिट: मंच पर सौहार्द, पर्दे के पीछे शक्ति-प्रदर्शन
तिआनजिन में एससीओ (शंघाई कार्पोरेशन आर्गनाइजेशन) समिट 2025 में मोदी और चीन के नेतृत्व की मुलाकात सकारात्मक मानी गई। उड़ान बहाली, उच्च स्तरीय संवाद और आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त बयान जारी हुआ। हालांकि, इसी समय चीन की गतिविधियां मध्य एशिया में बेहद तेज़ थीं। रिपोर्ट कहती है कि

वह क्षेत्र जहां कभी भारत सांस्कृतिक, राजनीतिक और ऊर्जा–सहयोग के आधार पर एक अहम खिलाड़ी था, अब उस पर चीन का दबदबा बढ़ रहा है। व्यापार 10.4 प्रतिशत बढ़ा, नए सैन्य ठिकानों और मिडल कॉरीडोर प्रोजक्ट ने बीजिंग को और मजबूत किया। अमेरिकी रिपोर्ट एक तरह से दिल्ली के लिए यह सीधी चेतावनी है कि चीन केवल सीमा नहीं, बल्कि पूरे भू-आर्थिक क्षेत्र में प्रभाव का विस्तार कर रहा है।

अमेरिकी कांग्रेस की रिपोर्ट पर विदेश मंत्रालय के उच्चपदस्थ सूत्रों ने कहा कि भारत परिस्थितयों से वाकिफ है। उन्होंने साफ कहा कि यह तो तय है कि भारत और चीन दोस्त भी होंगे, प्रतिद्वंद्वी भी, और इस रिश्ते में सबसे बड़ा हथियार होगा चौकन्नापन। अमेरिका भी मानता है कि एशिया का भविष्य इस पर निर्भर करेगा कि भारत इस चुनौती को किस संतुलन, शक्ति और कूटनीतिक समझदारी से संभालता है।

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