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महमूद मदनी के बयान पर वीएचपी का पलटवार: विनोद बंसल बोले- अंतरराष्ट्रीय मंच की बात करना संप्रभुता के लिए खतरा
Thu, 24 Sep 2026 04:08 PM IST
शिवम गर्ग
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: शिवम गर्ग
Updated Thu, 24 Sep 2026 04:08 PM IST
सार
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष महमूद मदनी के प्रशासनिक कार्रवाई और धार्मिक अधिकारों को लेकर दिए बयान पर विश्व हिंदू परिषद ने प्रतिक्रिया दी है। वीएचपी प्रवक्ता विनोद बंसल ने अंतरराष्ट्रीय मंचों का रुख करने की बात को भारत की संप्रभुता से जोड़ते हुए सवाल उठाए।
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महमूद मदनी के बयान पर VHP का पलटवार
- फोटो : Amar Ujala Graphics
विस्तार
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष महमूद मदनी के हालिया बयानों पर विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने पलटवार किया है। मदनी ने देश के कुछ राज्यों में धार्मिक और नागरिक अधिकारों से जुड़े मामलों में कथित एकतरफा प्रशासनिक कार्रवाई पर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि प्रभावित लोगों के अधिकारों के लिए संवैधानिक और कानूनी मंचों के साथ जरूरत पड़ने पर अंतरराष्ट्रीय मंचों का भी रुख किया जाएगा।
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वीएचपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने मदनी की इस टिप्पणी को भारत की संप्रभुता के लिए खतरा बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि अंतरराष्ट्रीय मंचों का सहारा लेने की बात भारत की संवैधानिक और न्यायिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करने जैसी है। यह वीएचपी का राजनीतिक बयान और आरोप है, जिसे जमीयत के रुख से अलग समझना जरूरी है।
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जमीयत ने किन मुद्दों पर जताई चिंता?
जमीयत की कार्यसमिति ने 23 सितंबर को हुई बैठक में देश की मौजूदा स्थिति, मौलिक अधिकार, धार्मिक स्वतंत्रता, पूजा स्थलों, मस्जिदों और मदरसों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। संगठन ने विभिन्न राज्यों में कथित प्रशासनिक कार्रवाई, भीड़ हिंसा और बुलडोजर कार्रवाई को लेकर चिंता जताई।
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जमीयत ने कहा कि वह प्रभावित लोगों के मुद्दों को राष्ट्रपति के सामने रखने के लिए मुलाकात का समय मांगेगी। संगठन ने यह भी कहा कि न्याय और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े मामलों में उपलब्ध राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संवैधानिक एवं कानूनी मंचों का इस्तेमाल किया जाएगा।
मदनी ने क्या कहा था?
महमूद मदनी ने कहा था कि यदि किसी एक समुदाय के खिलाफ एकतरफा कार्रवाई होती है और उसे प्रशासनिक समर्थन मिलता है, तो यह गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर लोगों को लगने लगे कि न्यायिक व्यवस्था प्रभावी कानूनी सुरक्षा और समय पर राहत नहीं दे रही है, तो यह किसी भी देश और समाज के लिए स्वस्थ स्थिति नहीं है।
मदनी ने संवैधानिक और कानूनी तरीकों से अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने की बात कही। जमीयत के आधिकारिक बयान में भी संगठन ने लोकतांत्रिक और संवैधानिक माध्यमों से इन मुद्दों को उठाने की बात कही है।
VHP ने क्या आरोप लगाए?
विनोद बंसल ने मदनी के बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर किसी व्यक्ति या संगठन को देश के संविधान, सरकार, प्रशासन और न्यायपालिका पर भरोसा नहीं है तो उसे अपने रुख पर विचार करना चाहिए। उन्होंने प्रशासन की ओर से हटाए गए ढांचों को अवैध निर्माण बताया और मदनी के आरोपों को खारिज किया।
बंसल ने भारत माता की जय और वंदे मातरम जैसे मुद्दों का भी जिक्र किया और मदनी समेत अन्य लोगों पर आरोप लगाए। उन्होंने मुस्लिम समुदाय से ऐसे बयानों से दूरी बनाने की अपील भी की। ये सभी टिप्पणियां वीएचपी प्रवक्ता की ओर से लगाए गए आरोप हैं।
अंतरराष्ट्रीय मंचों का क्यों हुआ जिक्र?
मदनी ने कहा था कि जमीयत अपने मुद्दों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संवैधानिक एवं कानूनी मंचों पर रखने के विकल्प का इस्तेमाल करेगी। जमीयत की आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में भी प्रभावित लोगों के अधिकारों के लिए ऐसे मंचों का रुख करने की बात दर्ज है। इसी टिप्पणी को लेकर वीएचपी ने प्रतिक्रिया दी और इसे भारत की संप्रभुता से जोड़कर सवाल उठाए। फिलहाल दोनों संगठनों के बयान अपने-अपने रुख को सामने रखते हैं।