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बीते 7 दिन सामान्य से 10% कम बारिश: मानसून के अगले दो हफ्तों का क्या अनुमान, कहां रहेगी गर्मी और बारिश कहां?
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Thu, 04 Jun 2026 07:37 PM IST
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सार
केरल में मानसून ने दस्तक दे दी है। मौसम विभाग (आईएमडी) ने गुरुवार को केरल में मानसून के आगमन की आधिकारिक घोषणा करते हुए कहा, अगले तीन से चार दिनों में मानसून कर्नाटक तट से होते हुए गोवा की तरफ आगे बढ़ेगा। इसके बाद देशभर में मानसून और पश्चिमी विक्षोभ के चलते मौसम में बड़े परिवर्तन देखने को मिलेंगे। आइये जानते हैं कि अगले दो हफ्तों में भारत में किस तरह मौसम बदलने का अनुमान है...
मानसून के आगे बढ़ने और गर्मी को लेकर आईएमडी का अनुमान जारी।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
भारत में मानसून की एंट्री हो चुकी है। मौसम विभाग (आईएमडी) के मुताबिक, इस बार मानसून अपने तय समय से तीन दिन देरी से 4 जून को भारत से टकराया है। मानसून की इस देरी की वजह से 28 मई से तीन जून के बीच होने वाली बारिश में करीब 10 फीसदी की कमी भी दर्ज हुई है। हालांकि, आने वाले दिनों में बारिश की स्थिति बेहतर रहने का अनुमान जताया गया है। इसके अलावा आईएमडी ने आने वाले हफ्तों में गर्मी-बारिश का पूर्वानुमान भी सामने रखा है।
भारतीय मौसम विभाग का आने वाले दिनों के मौसम को लेकर क्या पूर्वानुमान है? मानसून के इस देरी से आगमन का देश के किस हिस्से पर क्या असर पड़ने की संभावना है? अलग-अलग राज्यों में गर्मी और बारिश की कैसी स्थिति रहेगी? आइये जानते हैं...
भारतीय मौसम विभाग का आने वाले दिनों के मौसम को लेकर क्या पूर्वानुमान है? मानसून के इस देरी से आगमन का देश के किस हिस्से पर क्या असर पड़ने की संभावना है? अलग-अलग राज्यों में गर्मी और बारिश की कैसी स्थिति रहेगी? आइये जानते हैं...
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पहले जानें- पिछले सात दिन में कहां ज्यादा बारिश, कहां कम?
मौसम विभाग के मुताबिक, बीते 7 दिन यानी 28 मई 2026 से 3 जून 2026 के बीच अलग-अलग क्षेत्रों में बारिश का कम-ज्यादा होना जारी रहा। अगर पूरे देश की बात करें, तो बीते सात दिनों में भारत में कुल मिलाकर सामान्य से 10% कम बारिश दर्ज की गई है। जहां उत्तर-पश्चिम भारत में सबसे अधिक बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से 74% ज्यादा रही। वहीं, मध्य भारत में भी अच्छी बारिश हुई और यह सामान्य से 26% अधिक दर्ज की गई।इसके अलावा, कुछ विशेष स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश भी दर्ज की गई, जिनमें बिहार; तमिलनाडु, पुदुचेरी और कराईकल, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा, लक्षद्वीप, अंडमान व निकोबार द्वीप समूह और उत्तरी आंतरिक कर्नाटक शामिल हैं। इनसे इतर पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में बारिश की सबसे अधिक कमी देखी गई, जो सामान्य से 51% कम रही। वहीं, दक्षिण प्रायद्वीप क्षेत्र में बारिश लगभग सामान्य के करीब थी, फिर भी यह सामान्य से तीन फीसदी कम दर्ज की गई।
अब जानें- अगले दो हफ्ते कहां-कैसी रहेगी गर्मी की स्थिति?
पहला हफ्ता (4 से 10 जून): तापमान में उतार-चढ़ाव से गर्मी-लू तक का असर
- उत्तर-पश्चिम भारत में 4 से 6 जून के दौरान अधिकतम तापमान में दो से चार डिग्री सेल्सियस की गिरावट आएगी। हालांकि, 7 से 9 जून के बीच इसमें तीन से पांच डिग्री की बढ़ोतरी होने का अनुमान है।
- पूर्वी भारत में बिहार को छोड़कर, जहां 6 जून तक तापमान दो-तीन डिग्री सेल्सियस बढ़ेगा। 10 जून तक अधिकतम तापमान में कोई खास बदलाव नहीं होगा। देश के बाकी हिस्सों में भी 9 जून तक तापमान लगभग स्थिर रहेगा।
- बिहार में 6 से 8 जून, पूर्वी उत्तर प्रदेश में 7 से 10 जून और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 8 से 10 जून के दौरान अलग-अलग स्थानों पर लू की स्थिति बनी रहने का अनुमान है।
- ओडिशा में 4 से 8 जून तक, जबकि तटीय आंध्र प्रदेश, यनम, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, तमिलनाडु, पुदुचेरी और कराईकल में 4 और 5 जून को मौसम काफी गर्म और उमस भरा रहेगा।
दूसरा हफ्ता (11-17 जून): लू की संभावना कम, पर तापमान ज्यादा
इस सप्ताह के दौरान उत्तर-पश्चिम और पूर्वी भारत के अलावा मध्य भारत के कुछ हिस्सों में लू चलने की संभावना कम है। खासकर उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में लू से निजात मिलेगी। हालांकि, इस दौरान तापमान बढ़ने से भीषण गर्मी की स्थिति पैदा होगी।
मौसम विभाग के मुताबिक, पूर्वी भारत और उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों में दिन का तापमान सामान्य से 1.6 से 3.0 डिग्री सेल्सियस अधिक या 3.1 से 5.0 डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा रह सकता है। पूर्वोत्तर भारत में भी यह सामान्य से 1.6 से 3.0 डिग्री सेल्सियस अधिक रहने का अनुमान है। देश के बाकी हिस्सों में इस दौरान तापमान सामान्य के करीब ही रहेगा।
वहीं, दूसरे हफ्ते में गर्म रात की कोई स्थिति नहीं होगी। हालांकि, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और उत्तरी मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में रात का न्यूनतम तापमान सामान्य से थोड़ा अधिक (+1.6 से 3.0 डिग्री सेल्सियस) रह सकता है।
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मानसून सीजन के दो हफ्तों में बारिश का क्या अनुमान?
पहला हफ्ता (4 से 10 जून): अलग-अलग राज्यों में बारिश का दौर
1. पूर्वोत्तर भारत
असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में गरज और तेज हवाओं के साथ हल्की से मध्यम बारिश होगी। इस दौरान अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय में अलग-अलग स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने की अत्यधिक संभावना है।
2. दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत
तेलंगाना, तटीय आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और लक्षद्वीप में 40-60 किमी प्रति घंटे की तेज हवाओं के साथ बारिश होने का अनुमान है। तमिलनाडु, पुडुचेरी, तटीय कर्नाटक और केरल में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है।
3. पश्चिम भारत
कोंकण, गोवा और मध्य महाराष्ट्र में भी इस सप्ताह के दौरान भारी बारिश होने का अनुमान है।
4. उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत
जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, विदर्भ और छत्तीसगढ़ में हल्की से मध्यम बारिश होगी। उत्तराखंड में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है। इसके अलावा, 5 जून तक उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और राजस्थान के साथ-साथ मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में ओलावृष्टि भी हो सकती है।
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दूसरा हफ्ता (11 से 17 जून): बारिश से भीगेगा देश, पर सामान्य से कम रहेगी
दूसरे हफ्ते के दौरान पूरे देश में कुल मिलाकर बारिश सामान्य से कम रहने का अनुमान है। कोंकण-गोवा, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश ऐसे क्षेत्र होंगे जहां बारिश सामान्य या सामान्य से अधिक हो सकती है। वहीं, अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल के साथ-साथ महाराष्ट्र, गोवा और कर्नाटक में कुछ दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है।दूसरी ओर पहाड़ी क्षेत्रों में खासकर पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में कुछ दिन छिटपुट और हल्की बारिश हो सकती है। इस सप्ताह के दौरान दक्षिण-पश्चिम मानसून के मध्य अरब सागर के बचे हुए हिस्सों, महाराष्ट्र के कुछ और हिस्सों, पूरे तेलंगाना और आंध्र प्रदेश, मध्य व उत्तर बंगाल की खाड़ी के साथ-साथ मध्य और पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हो जाएंगी।
मौसम में इस बदलाव की स्थितियां क्यों?
पहला हफ्ता
1. दक्षिण-पश्चिम मानसून का आगे बढ़ना
4 जून को मानसून दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-पूर्व अरब सागर के बचे हुए हिस्सों, पूरे लक्षद्वीप, केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों के साथ-साथ बंगाल की खाड़ी के कई इलाकों में आगे बढ़ चुका है। आने वाले दिनों में इसके मध्य अरब सागर, महाराष्ट्र, गोवा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और पूर्वोत्तर राज्यों के कई और हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बन रही हैं।
2. पश्चिमी विक्षोभ
उत्तरी पाकिस्तान और उसके आसपास के क्षेत्रों में समुद्र तल से ऊपर निचले और मध्य क्षोभमंडल में एक पश्चिमी विक्षोभ चक्रवाती परिसंचरण के रूप में सक्रिय है।
3. विभिन्न क्षेत्रों में चक्रवाती परिसंचरण
देश के अलग-अलग हिस्सों में हवा के चक्रवाती घुमाव की स्थिति बनी हुई है, जो मौसम को प्रभावित कर रही है। मध्य पाकिस्तान और आसपास के इलाकों में निचले स्तर पर एक प्रेरित चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है। उत्तरी हरियाणा, मध्य उत्तर प्रदेश, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और उससे सटे बिहार के ऊपर भी हवाओं का चक्रवाती परिसंचरण मौजूद है।
दक्षिण और पश्चिम भारत में, कोंकण व गोवा (जिसका विस्तार पूर्व-मध्य अरब सागर तक है) और दक्षिणी तेलंगाना व उससे सटे तटीय आंध्र प्रदेश और यनम के ऊपर भी यह चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है।
4. ट्रफ रेखा
मध्य पाकिस्तान और आसपास के चक्रवाती परिसंचरण से लेकर पूर्वोत्तर अरब सागर तक निचले क्षोभमंडल स्तर पर एक ट्रफ रेखा बनी हुई है। इन्हीं सभी मौसम प्रणालियों (सिस्टम) के प्रभाव के कारण पहले सप्ताह में देश के विभिन्न राज्यों में गरज-चमक, तेज हवाओं, आंधी, भारी बारिश और कुछ जगहों पर ओलावृष्टि जैसी गतिविधियां होने का अनुमान है।
1. दक्षिण-पश्चिम मानसून का आगे बढ़ना
इस सप्ताह के दौरान दक्षिण-पश्चिम मानसून के और आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हो जाएंगी। इसके मध्य अरब सागर के बचे हुए हिस्सों में पहुंचने से बारिश लगभग पूरे
2. कमजोर पश्चिमी विक्षोभ
एक कमजोर पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने की संभावना है, जो मुख्य रूप से पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र के मौसम को प्रभावित करेगा। इसी के कारण इस क्षेत्र में कुछ दिन छिटपुट और हल्की बारिश होने का अनुमान है।
मध्य पाकिस्तान और आसपास के चक्रवाती परिसंचरण से लेकर पूर्वोत्तर अरब सागर तक निचले क्षोभमंडल स्तर पर एक ट्रफ रेखा बनी हुई है। इन्हीं सभी मौसम प्रणालियों (सिस्टम) के प्रभाव के कारण पहले सप्ताह में देश के विभिन्न राज्यों में गरज-चमक, तेज हवाओं, आंधी, भारी बारिश और कुछ जगहों पर ओलावृष्टि जैसी गतिविधियां होने का अनुमान है।
दूसरा हफ्ता
1. दक्षिण-पश्चिम मानसून का आगे बढ़ना
इस सप्ताह के दौरान दक्षिण-पश्चिम मानसून के और आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हो जाएंगी। इसके मध्य अरब सागर के बचे हुए हिस्सों में पहुंचने से बारिश लगभग पूरे
2. कमजोर पश्चिमी विक्षोभ
एक कमजोर पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने की संभावना है, जो मुख्य रूप से पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र के मौसम को प्रभावित करेगा। इसी के कारण इस क्षेत्र में कुछ दिन छिटपुट और हल्की बारिश होने का अनुमान है।
3. पछुआ हवाओं का दबदबा
मध्य और प्रायद्वीपीय भारत के ऊपर निचले क्षोभमंडल स्तरों में पछुआ हवाओं (पश्चिम की ओर से चलने वाली हवाओं) का प्रभाव मुख्य रूप से हावी रहने का अनुमान है।
4. दक्षिणी और दक्षिण-पश्चिमी हवाएं
बंगाल की खाड़ी से लेकर पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत तक निचले क्षोभमंडल स्तरों में दक्षिणी और दक्षिण-पश्चिमी हवाओं के चलने की संभावना है। इन्हीं नमी वाली हवाओं के प्रभाव से पूर्वोत्तर भारत और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल में भारी बारिश की स्थिति बनेगी।
मध्य और प्रायद्वीपीय भारत के ऊपर निचले क्षोभमंडल स्तरों में पछुआ हवाओं (पश्चिम की ओर से चलने वाली हवाओं) का प्रभाव मुख्य रूप से हावी रहने का अनुमान है।
4. दक्षिणी और दक्षिण-पश्चिमी हवाएं
बंगाल की खाड़ी से लेकर पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत तक निचले क्षोभमंडल स्तरों में दक्षिणी और दक्षिण-पश्चिमी हवाओं के चलने की संभावना है। इन्हीं नमी वाली हवाओं के प्रभाव से पूर्वोत्तर भारत और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल में भारी बारिश की स्थिति बनेगी।