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मौसम की मार: मानसून की बारिश में हीराकुंड डैम लबालब; उत्तर से ओडिशा तक हाहाकार; असम समेत कहां-कितनी जनहानि?

Wed, 22 Jul 2026 09:35 AM IST
अमन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमन तिवारी Updated Wed, 22 Jul 2026 09:35 AM IST
सार

देश के कई राज्यों में मानसून ने भारी तबाही मचाई है। असम में बाढ़ से 21 और लोगों की मौत के साथ 5.64 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। जम्मू-कश्मीर, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल और उत्तराखंड में भी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

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मानसून का कहर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

असम में मानसूनी बारिश से हाहाकार मचा हुआ है। राज्य के एक बड़े हिस्से में जलप्रलय जैसे हालात बन गए हैं, जहां चारों तरफ केवल पानी ही पानी नजर आ रहा है और हर तरफ तबाही का मंजर है। लगातार हो रही बारिश और बाढ़ से स्थिति बेहद खराब है। आधिकारिक आकड़ों के अनुसार, मंगलवार को राज्य में 21 और लोगों की मौत हो गई। राज्य के 16 जिलों में 5.64 लाख से अधिक लोग इस आपदा से प्रभावित हैं।
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बाढ़ में ये जिले सबसे ज्यादा प्रभावित
बाढ़ से प्रभावित जिलों में गोलाघाट, कामरूप, होजाई, डिब्रूगढ़, विश्वनाथ, धेमाजी, शोणितपुर, उदलगुड़ी, नगांव, चराईदेव, कामरूप (मेट्रो), जोरहाट, तिनसुकिया, कार्बी आंगलोंग, लखीमपुर और शिवसागर शामिल हैं। बाढ़ प्रभावित जिलों में राहत सामग्री गिराकर पहुंचाई जा रही है। बाढ़ के पानी ने 44 राजस्व सर्किलों के तहत आने वाले 872 गांवों को डुबो दिया है। इसके अलावा 24,210.35 हेक्टेयर फसल क्षेत्र पूरी तरह जलमग्न हो गया है, जिससे खेती को भारी नुकसान हुआ है।
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बाढ़ से सबसे ज्यादा नुकसान शिवसागर जिले में हुआ है, जहां अकेले 3.59 लाख से अधिक लोग प्रभावित हैं। इसके अलावा जोरहाट जिले में 87,662 लोग, चराईदेव जिले में 72,646 लोग, डिब्रूगढ़ जिले में 18,615 लोग और गोलाघाट जिले में 16,799 लोग प्रभावित हुए हैं। जिला प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में 273 राहत शिविर और राहत वितरण केंद्र स्थापित किए हैं। बाढ़ के कारण घर छोड़ने को मजबूर हुए 1.14 लाख से अधिक लोगों ने इन शिविरों में शरण ली है। राज्य के अलग-अलग हिस्सों में ब्रह्मपुत्र, दिखोव, देसांग और धनसिरी सहित कई प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। इनमें से कुछ जल निकायों ने अत्यधिक बाढ़ का स्तर भी पार कर लिया है। 
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राहत बचाव कार्य जारी
असम में भारतीय सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और दमकल विभाग सहित कई एजेंसियां राहत और बचाव कार्य चला रही हैं। ऊपरी असम के कुछ हिस्सों में रेल पटरियों पर पानी भरने के कारण दूसरे दिन भी ट्रेन सेवाएं प्रभावित रहीं। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (NFR) ने कई ट्रेनों को रद्द कर दिया, कुछ को बीच में ही समाप्त कर दिया और कई के मार्ग बदल दिए। रेलवे ने फंसे हुए यात्रियों के लिए विशेष ट्रेनें चलाने की भी घोषणा की है।

जम्मू-कश्मीर में नदियां उफान पर, कई दुकानें बहीं और 23 लोगों की मौत
वहीं जम्मू-कश्मीर के बड़े हिस्सों में मंगलवार को मूसलाधार बारिश हुई, जिससे नदियां और नाले उफान पर आ गए। पानी लोगों के घरों में घुस गया और कई दुकानें तथा वाहन पानी के तेज बहाव में बह गए। कठुआ जिले में एक नदी से दो लोगों को सुरक्षित निकाला गया। पूरे जम्मू क्षेत्र में व्यापक जलभराव दर्ज किया गया है।

अधिकारियों के अनुसार, जम्मू क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित इलाकों से सैकड़ों लोगों को बचाकर सुरक्षित निकाला गया है और कई लोग राहत केंद्रों में शरण लिए हुए हैं। मंगलवार को मूसलाधार बारिश के बाद नाले का जलस्तर बढ़ गया, जिससे बडगाम जिले में उफनती बाढ़ के पानी में कई दुकानें बह गईं। इसके अलावा कश्मीर घाटी के कई इलाकों में बारिश हुई, जबकि कुछ स्थानों पर भारी बारिश दर्ज की गई, जिससे कई जल निकायों का जलस्तर बढ़ गया।

जम्मू क्षेत्र में भारी बारिश के बीच सबसे ज्यादा प्रभावित पुंछ और राजौरी जिलों में लापता सात लोगों की तलाश के लिए बचावकर्मियों का अभियान जारी रहा। पुंछ, राजौरी और डोडा जिलों में रविवार से अब तक बारिश से जुड़ी घटनाओं में कम से कम 23 लोगों की मौत हो चुकी है और सात अन्य लोग अभी भी लापता हैं।

नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश में तबाही और नए बाढ़ प्रभावित क्षेत्र
नागालैंड के मोन जिले में लगातार बारिश के कारण आई अचानक बाढ़ और भूस्खलन में मरने वालों की संख्या बढ़कर नौ हो गई है। मंगलवार को पांच और शव बरामद किए गए, जबकि चार लोग अभी भी लापता हैं और उनके लिए खोज तथा बचाव अभियान जारी है। राज्य सरकार की रिपोर्ट के अनुसार, लगातार हो रही बारिश ने सामान्य जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। इससे बुनियादी ढांचे, कृषि भूमि और सार्वजनिक सुविधाओं को नुकसान पहुंचा है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि नुकसान का दायरा और भ बढ़ सकता है। नागालैंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की रिपोर्ट के अनुसार, राज्यभर में बढ से करीब 7,460 लोग प्रभावित हुए हैं और 10 जिलों के 93 गांवों में 64 आवासीय मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं।

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उधर, अरुणाचल प्रदेश में पिछले 24 घंटों में हुई मूसलाधार बारिश के कारण पांच जिलों में बाढ़ आ गई है। राज्य में जारी मानसून से अब तक लगभग 1.49 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) के अनुसार, सियांग, पपुम पारे, पश्चिम कामेंग, कमले और निचला सियांग जिलों के छह प्रशासनिक सर्किलों से ताजा बाढ़ और बारिश से जुड़ी घटनाओं की सूचना मिली है। सियांग जिले के केबांग सर्किल के कालेक गांव में अचानक आई बाढ़ में पानी भर गया। पपुम पारे के बलिजान और तारासो सर्किलों में बलिजान और तारासो गांव प्रभावित हुए। पश्चिम कामेंग के दिरंग सर्किल में लिश गांव, कमले के रागा सर्किल में यादा गांव और निचला सियांग के लिकाबली सर्किल में जीपू गांव में भी बारिश से नुकसान हुआ है।

हिमाचल प्रदेश में बादल फटा, स्कूल-कॉलेज बंद और राष्ट्रीय राजमार्ग ठप
वहीं हिमाचल प्रदेश में बादल फटने के कारण छह मकान बह गए, अधिकारियों ने पुष्टि की है कि इसमें कोई हताहत नहीं हुआ है। मौसम विभाग ने भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया था, जिसे देखते हुए मंगलवार को कांगड़ा, मंडी और सिरमौर जिलों में सभी स्कूल और कॉलेज बंद रखे गए। रुक-रुक कर हो रही बारिश के कारण अधिकारियों ने शिमला के थियोग, चंबा के सलूणी और कुल्लू जिले के निरमंड में भी सभी शैक्षणिक संस्थानों को बंद कर दिया। किन्नौर जिले में दो स्थानों पर भूस्खलन के बाद पुराना हिंदुस्तान-तिब्बत मार्ग (राष्ट्रीय राजमार्ग 5) वाहनों की आवाजाही के लिए पूरी तरह बंद हो गया।

उत्तराखंड में चारधाम यात्रा दोबारा शुरू
उत्तराखंड में मूसलाधार बारिश और भूस्खलन के कारण एहतियात के तौर पर अस्थायी रूप से रोकी गई चारधाम यात्रा मंगलवार को दोबारा शुरू कर दी गई। अधिकारियों ने यात्रा मार्गों की समीक्षा करने के बाद इसे फिर से शुरू करने का फैसला लिया। इसके अलावा, बारिश में क्षतिग्रस्त होने के बाद बंद हुआ देहरादून-मसूरी मार्ग भी हल्के वाहनों की आवाजाही के लिए दोबारा खोल दिया गया है।
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