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पश्चिम एशिया संकट से बढ़ेगा भारतीय रुपये पर दबाव?: बढ़ती तेल व उर्वरक कीमतें महंगाई बढ़ा सकती हैं

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Shubham Kumar Updated Sat, 07 Mar 2026 04:38 AM IST
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सार

भारत मंत्रालय ने चेताया है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव लंबा खिंचने पर भारतीय रुपये की विनिमय दर, चालू खाता घाटा और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है। बढ़ती पेट्रोलियम और उर्वरक की कीमतें महंगाई को प्रभावित कर सकती हैं। क्या भारत के विदेशी मुद्रा भंडार और नियंत्रित महंगाई इस संकट में रुपये को बचा पाएंगे?

West Asia crisis increase pressure Indian rupee Rising oil and fertilizer prices could increase inflation
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

पश्चिम एशिया संकट के लंबे समय तक जारी रहने पर भारतीय रुपये की विनिमय दर पर दबाव पड़ सकता है। साथ ही, पेट्रोलियम एवं उर्वरकों की बढ़ती कीमतों के कारण महंगाई पर भी जोखिम बढ़ सकता है। वित्त मंत्रालय की शुक्रवार को जारी एक रिपोर्ट में कहा, इन जोखिमों के बीच कच्चे तेल का बड़ा आयातक होने के बावजूद भारत पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार, कम चालू खाते का घाटा और नियंत्रित महंगाई के कारण बढ़ती वैश्विक कीमतों के प्रभाव को आंशिक रूप से संतुलित करने में सक्षम है।

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हालांकि, यह संकट लंबा खिंचने की स्थिति में रुपये की विनिमय दर, चालू खाता घाटा और महंगाई पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) और कच्चे तेल पर निर्भर उर्वरक एवं पेट्रोरसायन जैसे क्षेत्रों पर भी इसका असर पड़ सकता है। वित्त मंत्रालय ने फरवरी की आर्थिक समीक्षा रिपोर्ट में कहा, सुरक्षित निवेश की ओर पूंजी का प्रवाह होने से मुद्रा पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।
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वित्त मंत्रालय का रिपोर्ट
वित्त मंत्रालय ने रिपोर्ट में कहा, ईरान पर हमलों के बाद बढ़े तनाव से होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही बाधित हो गई है। इस व्यवधान के बीच वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता के बावजूद बाहरी क्षेत्र स्थिर बना हुआ है। साथ ही, अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ व्यापार समझौतों समेत सक्रिय व्यापार कूटनीति से निर्यात गंतव्यों का विविधीकरण एवं मध्यम अवधि में बाह्य मजबूती बढ़ने की उम्मीद है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक अनिश्चितता और पशि्चम एशिया संकट के बावजूद चालू वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार मजबूत बनी हुई है। इस अवधि में वास्तविक जीडीपी की वृद्धि दर 7.6 फीसदी रह सकती है, जबकि वास्तविक सकल मूल्यवर्धन वृद्धि 7.7 फीसदी रहने का अनुमान है। जनवरी, 2026 में आर्थिक गतिविधियां व्यापक आधार पर मजबूत रहीं, जिन्हें लॉजिस्टिक गतिविधि, पीएमआई में विस्तार और मजबूत मांग जैसे उच्च आवृत्ति संकेतकों का समर्थन मिला।

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