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Kolkata: आरजी कर वित्तीय अनियमितता मामले में ईडी ने दाखिल किया आरोपपत्र, संदीप घोष को बनाया मुख्य आरोपी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: अमन तिवारी
Updated Fri, 06 Feb 2026 03:53 PM IST
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सार
कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज घोटाले में ईडी ने आरोपपत्र दाखिल की है। इसमें पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष को मुख्य साजिशकर्ता बताया गया है। उन पर टेंडर में धांधली और लावारिस शवों के अंग बेचने के संगीन आरोप हैं।
ईडी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में हुए करोड़ों रुपये के वित्तीय घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अपनी पहली आरोपपत्र दाखिल कर दी है। ईडी ने इस आरोपपत्र में पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष को मुख्य आरोपी बनाया है। उनके साथ बिप्लब सिन्हा और सुमन हाजरा नाम के दो निजी विक्रेताओं को भी आरोपी के रूप में नामजद किया है। दवाओं और मेडिकल उपकरणों की सप्लाई करने वाली एजेंसी हाजरा मेडिकल का नाम भी इस आरोपपत्र में शामिल है।
एजेंसियों ने संदीप घोष को बनाया मुख्य आरोपी
ईडी के अलावा इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) भी कर रही थी। सीबीआई ने अस्पताल में हुए दुष्कर्म और हत्या के मामले के पीछे किसी बड़ी साजिश की भी जांच की है। सीबीआई इस वित्तीय घोटाले में पहले ही अपनी आरोपपत्र पेश कर चुकी है। अब ईडी ने भी अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। दोनों ही जांच एजेंसियों ने संदीप घोष को इस पूरे घोटाले का मास्टरमाइंड माना है।
ये भी पढ़ें: Bengal SIR Row: चुनाव आयोग का दावा- नोटिस देने के बाद भी नहीं पेश हुए मतदाता; अब कटेंगे इनके नाम
आरजी कर में वित्तीय अनियमितता मामले में मुख्य आरोपों में टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर, राज्य लोक निर्माण विभाग को दरकिनार करते हुए निजी एजेंसियों को इंफ्रास्ट्रक्चर कॉन्ट्रैक्ट देना और पोस्टमार्टम के लिए लाए गए अज्ञात शवों से कथित तौर पर अंग बेचना शामिल है।
जांच में क्या हुआ खुलासा?
सीबीआई की जांच में सामने आया कि संदीप घोष के प्रिंसिपल बनने के बाद उनकी संपत्ति बहुत तेजी से बढ़ी। जांचकर्ताओं की टीम ने पाया कि साल 2021 से हर साल औसतन 60 लावारिस शवों का कोई हिसाब-किताब नहीं मिला। संदीप घोष ने इन शवों के अंगों को बेचकर अवैध तरीके से पैसा कमाया। पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग ने इस मामले को अब तक के सबसे अजीब और गंभीर अपराधों में से एक बताया है।
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एजेंसियों ने संदीप घोष को बनाया मुख्य आरोपी
ईडी के अलावा इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) भी कर रही थी। सीबीआई ने अस्पताल में हुए दुष्कर्म और हत्या के मामले के पीछे किसी बड़ी साजिश की भी जांच की है। सीबीआई इस वित्तीय घोटाले में पहले ही अपनी आरोपपत्र पेश कर चुकी है। अब ईडी ने भी अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। दोनों ही जांच एजेंसियों ने संदीप घोष को इस पूरे घोटाले का मास्टरमाइंड माना है।
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आरजी कर में वित्तीय अनियमितता मामले में मुख्य आरोपों में टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर, राज्य लोक निर्माण विभाग को दरकिनार करते हुए निजी एजेंसियों को इंफ्रास्ट्रक्चर कॉन्ट्रैक्ट देना और पोस्टमार्टम के लिए लाए गए अज्ञात शवों से कथित तौर पर अंग बेचना शामिल है।
जांच में क्या हुआ खुलासा?
सीबीआई की जांच में सामने आया कि संदीप घोष के प्रिंसिपल बनने के बाद उनकी संपत्ति बहुत तेजी से बढ़ी। जांचकर्ताओं की टीम ने पाया कि साल 2021 से हर साल औसतन 60 लावारिस शवों का कोई हिसाब-किताब नहीं मिला। संदीप घोष ने इन शवों के अंगों को बेचकर अवैध तरीके से पैसा कमाया। पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग ने इस मामले को अब तक के सबसे अजीब और गंभीर अपराधों में से एक बताया है।
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