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West Bengal: बंगाल में एईआरओ अफसरों के निलंबन पर सियासी घमासान, भाजपा-टीएमसी आमने सामने; लगाए एक दूसरे पर आरोप

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: अमन तिवारी Updated Mon, 16 Feb 2026 05:51 PM IST
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सार

चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में लापरवाही और फर्जीवाड़े के आरोप में सात अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने इसे ऐतिहासिक कदम बताते हुए ममता सरकार पर अधिकारियों को उकसाने का आरोप लगाया। वहीं, तृणमूल कांग्रेस ने इसे बदले की कार्रवाई बताते हुए आयोग के फैसले पर सवाल उठाए हैं।

West Bengal Election Commission action voter list controversy AERO suspension TMC vs BJP Suvendu Adhikari
भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी - फोटो : ANI
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विस्तार

पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग ने एक फैसले से सियासी हलचल तेज हो गई है। मामले में आयोग ने सात असिस्टेंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स (एईआरओ) को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इन अधिकारियों पर वोटर लिस्ट सुधारने के काम में लापरवाही और अपनी शक्तियों के गलत इस्तेमाल का आरोप है। भाजपा के वरिष्ठ नेता सुवेंदु अधिकारी ने इस फैसले को ऐतिहासिक बताया है।
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क्या बोले भाजपा नेता?
सुवेंदु अधिकारी ने सोमवार को कहा कि यह पहली बार है जब चुनाव आयोग ने सीधे सजा देने के अपने कानूनी अधिकार का इस्तेमाल किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी सरकार ने इन अधिकारियों को गलत काम करने के लिए उकसाया था। अधिकारी ने चेतावनी दी कि अगर राज्य सरकार ने इन लोगों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की, तो आयोग के पास इनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का भी अधिकार है।
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भाजपा नेता ने अधिकारियों पर लगाए आरोप
भाजपा नेता के मुताबिक, इन अधिकारियों ने वेरिफिकेशन के दौरान फर्जी स्कूल सर्टिफिकेट, पैन कार्ड और नोटरी वाले हलफनामे स्वीकार किए। उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बड़े नेताओं के दबाव और मुख्य सचिव के इशारे पर फर्जी वोटरों के नाम जोड़ने के लिए यह सब किया गया। सुवेंदु ने यह भी कहा कि बंगाल में चुनाव आयोग से जुड़ी फाइलें मुख्य सचिव के दफ्तर के बजाय मुख्यमंत्री के पास भेजी जाती हैं, जो तय करती हैं कि क्या करना है। उन्होंने कहा कि दूसरे राज्यों में ऐसा नहीं होता और प्रधानमंत्री भी चुनाव के दौरान ऐसा हस्तक्षेप नहीं करते।

ये भी पढ़ें: पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग का बड़ा एक्शन: सात अफसर निलंबित, मतदाता सूची पुनरीक्षण के काम में गड़बड़ी के आरोप

कहां से हटाए गए कितने अधिकारी?
निलंबित होने वाले अधिकारियों में तीन मुर्शिदाबाद जिले से, दो दक्षिण 24 परगना से और एक-एक पूर्व मेदिनीपुर और जलपाईगुड़ी से हैं। चुनाव आयोग ने राज्य की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती को निर्देश दिया है कि वे इन अधिकारियों के खिलाफ तुरंत विभागीय जांच और कार्रवाई शुरू करें और इसकी जानकारी आयोग को दें।

तृणमूल कांग्रेस ने किया पलटवार
दूसरी तरफ, तृणमूल कांग्रेस ने इस कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। टीएमसी के आईटी सेल प्रमुख देबांग्शु भट्टाचार्य ने कहा कि इन अधिकारियों को इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि उन्होंने चुनाव आयोग के अनुचित दबाव के आगे झुकने से इनकार कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग भाजपा शासित राज्यों से माइक्रो ऑब्जर्वर भेजकर वोटर लिस्ट में बदलाव करने की कोशिश कर रहा था। टीएमसी ने इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया है।

बंगाल में वोटर लिस्ट सुधारने (एसआईआर) का काम अब अंतिम चरण में है। ड्राफ्ट लिस्ट में अब तक 58 लाख से ज्यादा वोटरों के नाम हटाए जा चुके हैं। अंतिम वोटर लिस्ट 28 फरवरी को जारी होने वाली है। विपक्षी दलों को आशंका थी कि फाइनल लिस्ट से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जा सकते हैं। फिलहाल आयोग की इस कार्रवाई ने राज्य की राजनीति में हलचल तेज कर दी है।

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