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AI Impact Summit 2026 Live: 2.5 लाख लोगों ने कराया समिट के लिए पंजीकरण, केंद्रीय मंत्री ने कहा- एआई का महाकुंभ
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Mon, 16 Feb 2026 01:13 PM IST
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खास बातें
एआई इम्पैक्ट समिट आज से शुरू हुआ। पीएम मोदी ने वैश्विक प्रतिनिधियों का स्वागत किया। केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि भारत एआई का 'महाकुंभ' आयोजित कर रहा है, जहां पांच दिवसीय एआई इम्पैक्ट समिट में दुनिया भर के नेता, स्टार्टअप, नवोन्मेषक और शोधकर्ता एकत्र हुए हैं।
India AI Impact Summit 2026
- फोटो : X
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लाइव अपडेट
01:09 PM, 16-Feb-2026
दिल्ली में समिट के लिए कितने लोगों ने कराया पंजीकरण?
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने सोमवार को बताया कि जारी इंडिया इम्पैक्ट एआई समिट 2026 के लिए देश और दुनिया भर से 2.5 लाख से अधिक प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया है, जो उम्मीदों से कहीं अधिक है। समिट के पहले दिन उन्होंने कहा कि कार्यक्रम को लेकर उत्साह अभूतपूर्व और जबरदस्त रहा है। उनके अनुसार आयोजकों ने इतनी बड़ी संख्या की उम्मीद नहीं की थी, इसलिए पंजीकरण पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया।कृष्णन ने बताया कि 19 तारीख को छोड़कर अन्य सभी दिनों में पंजीकृत प्रतिभागी विभिन्न सत्रों में शामिल हो सकते हैं, जिसके लिए व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं।
12:57 PM, 16-Feb-2026
समिट की तुलना प्रयागराज के कुंभ से की गई
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स व आईटी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद
- फोटो : cm yogi yt channel
कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स व आईटी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि भारत एआई का 'महाकुंभ' आयोजित कर रहा है, जहां पांच दिवसीय एआई इम्पैक्ट समिट में दुनिया भर के नेता, स्टार्टअप, नवोन्मेषक और शोधकर्ता एकत्र हुए हैं। उन्होंने कहा कि इस समिट के नतीजों पर न सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया की नजर है और यह आयोजन भारत की वैश्विक तकनीकी भूमिका के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। प्रसाद के अनुसार, इस अंतरराष्ट्रीय समिट में राज्य प्रमुखों, टेक लीडर्स, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ बड़ी संख्या में स्टार्टअप, इनोवेटर्स और रिसर्चर्स भी भाग ले रहे हैं। उन्होंने प्रयागराज के कुंभ से तुलना करते हुए कहा कि यह एआई के क्षेत्र का 'महाकुंभ' है, जिसकी मेजबानी भारत कर रहा है और जो वैश्विक सहयोग तथा तकनीकी नवाचार को नई दिशा देगा।
05:43 AM, 16-Feb-2026
AI Impact Summit 2026 Live: 2.5 लाख लोगों ने कराया समिट के लिए पंजीकरण, केंद्रीय मंत्री ने कहा- एआई का महाकुंभ
मानव सभ्यता को मौलिक रूप से नया आकार देने के कगार पर खड़ी कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई पर आज से दिल्ली में वैश्विक सम्मेलन शुरू हुआ।
मोदी ने वैश्विक प्रतिनिधियों का किया स्वागत
शुभारंभ से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एआई इंडिया इम्पैक्ट समिट में आए वैश्विक प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए कहा कि 1.4 अरब भारतीयों की शक्ति, मजबूत डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, उभरते स्टार्टअप इकोसिस्टम और अत्याधुनिक शोध के कारण भारत आज एआई परिवर्तन की अग्रिम पंक्ति में खड़ा है। उन्होंने इसे देश के युवाओं की क्षमता का प्रमाण बताते हुए कहा कि भारत विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रहा है और जिम्मेदार व समावेशी तरीके से वैश्विक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
इस समिट में मानवता की सेवा, समावेशी विकास को गति देने और धरती की रक्षा करने वाले जन-केंद्रित नवाचारों को प्रोत्साहित करने में एआई की प्रभावी भूमिका पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज भारत मंडपम में इस पांच दिवसीय भारत-एआई इंपैक्ट समिट एक्सपो-2026 का उद्घाटन करेंगे। इसमें 20 देशों के शासनाध्यक्ष और कई कंपनियों के सीईओ समेत अन्य प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे।
ये भी पढ़ें: इंडिया एआई इम्पैक्ट एक्सपो: पीएम मोदी करेंगे आज उद्घाटन, 30 से अधिक देशों के 300 से ज्यादा मेहमान करेंगे शिरकत
एआई शिखर सम्मेलन को लेकर क्या बोले ब्रिटेन के उप प्रधानमंत्री?
ब्रिटिश सरकार ने कहा कि सोमवार से नई दिल्ली में शुरू होने वाले एआई इंपैक्ट समिट के दौरान ब्रिटेन का ध्यान इस बात पर रहेगा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता किस प्रकार विकास को गति दे सकती है, नए रोजगार सृजित कर सकती है, सार्वजनिक सेवाओं में सुधार कर सकती है और दुनिया भर के लोगों को लाभ पहुंचा सकती है।
उप प्रधानमंत्री डेविड लैमी और एआई मंत्री कनिष्क नारायण के नेतृत्व में ब्रिटेन का प्रतिनिधिमंडल भारत आएगा। लैमी ने शिखर सम्मेलन से पहले जारी एक बयान में कहा, "शिखर सम्मेलन यह निर्धारित करने का एक महत्वपूर्ण क्षण है कि हम एआई के पूर्ण लाभों और क्षमता को उजागर करने के लिए अपने अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के साथ मिलकर कैसे काम कर सकते हैं। साथ ही साथ मजबूत और निष्पक्ष सुरक्षा मानकों को शामिल कर सकते हैं जो हम सभी की रक्षा करते हैं।"
विज्ञान, नवाचार और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसआईटी) ने कहा कि भारत और ब्रिटेन 'स्वाभाविक तकनीकी साझेदार' हैं और इंफोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) और विप्रो जैसी सॉफ्टवेयर दिग्गज कंपनियां पूरे यूके में अपने परिचालन का विस्तार कर रही हैं।
वैश्विक दक्षिण में पहली बार अंतरराष्ट्रीय एआई शिखर सम्मेलन
वैश्विक दक्षिण में पहली बार अंतरराष्ट्रीय एआई शिखर सम्मेलन हो रहा है। शिखर सम्मेलन तीन सूत्रों- मानव, पृथ्वी और प्रगति पर आधारित है, जो एआई पर वैश्विक सहयोग के लिए बुनियादी सिद्धांतों को परिभाषित करते हैं। इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य और नागरिक सेवाओं में एआई का उपयोग दिखाया जाएगा। वहीं, पृथ्वी के पर्यावरण और जलवायु से जुड़े समाधान पेश किए जाएंगे।
एआई पेशेवरों की मांग को पूरा करने वाला स्रोत बन सकता है भारत
यूरोप, अमेरिका, चीन और एशिया के बीच प्रौद्योगिकी प्रतिस्पर्धा के इस दौर में भारत अपने डिजिटल मॉडल जैसे आधार, यूपीआई और ओपन नेटवर्क को एक संतुलित और समावेशी विकल्प के रूप में पेश करता रहा है। भारत को उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में एआई पेशेवरों की दुनिया में मांग तेजी से बढ़ेगी और अपनी विशाल युवा आबादी तथा आईटी कौशल के दम पर वह इस जरूरत को पूरा करने वाला प्रमुख स्रोत बन सकता है।
13 देशों के पवेलियन लगाए जाएंगे
एक्सपो में ऑस्ट्रेलिया, जापान, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड्स, स्विट्जरलैंड, सर्बिया, एस्टोनिया, ताजिकिस्तान और अफ्रीका सहित 13 देशों के पवेलियन लगाए जाएंगे, जो एआई क्षेत्र में वैश्विक सहयोग को प्रदर्शित करेंगे।
ये भी पढ़ें: AI Impact Summit: परिवर्तनकारी दौर में समिट, दुनिया जानेगी भारत समावेशी एआई समाधान देने में सक्षम
300 से अधिक प्रदर्शनी पवेलियन और लाइव प्रदर्शन
एक्सपो में 300 से अधिक प्रदर्शनी पवेलियन और लाइव प्रदर्शन होंगे। कार्यक्रम की रूपरेखा तीन प्रमुख विषयों लोग, ग्रह और उन्नति पर आधारित है। लोग के तहत शिक्षा, स्वास्थ्य और नागरिक सेवाओं में एआई का उपयोग दिखाया जाएगा। वहीं ग्रह में पर्यावरण और जलवायु से जुड़े समाधान पेश किए जाएंगे। इसके साथ ही उन्नति में उद्योग, कारोबार और आर्थिक विकास में एआई की भूमिका बताई जाएगी।
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शुभारंभ से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एआई इंडिया इम्पैक्ट समिट में आए वैश्विक प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए कहा कि 1.4 अरब भारतीयों की शक्ति, मजबूत डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, उभरते स्टार्टअप इकोसिस्टम और अत्याधुनिक शोध के कारण भारत आज एआई परिवर्तन की अग्रिम पंक्ति में खड़ा है। उन्होंने इसे देश के युवाओं की क्षमता का प्रमाण बताते हुए कहा कि भारत विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रहा है और जिम्मेदार व समावेशी तरीके से वैश्विक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
इस समिट में मानवता की सेवा, समावेशी विकास को गति देने और धरती की रक्षा करने वाले जन-केंद्रित नवाचारों को प्रोत्साहित करने में एआई की प्रभावी भूमिका पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज भारत मंडपम में इस पांच दिवसीय भारत-एआई इंपैक्ट समिट एक्सपो-2026 का उद्घाटन करेंगे। इसमें 20 देशों के शासनाध्यक्ष और कई कंपनियों के सीईओ समेत अन्य प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे।
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एआई शिखर सम्मेलन को लेकर क्या बोले ब्रिटेन के उप प्रधानमंत्री?
ब्रिटिश सरकार ने कहा कि सोमवार से नई दिल्ली में शुरू होने वाले एआई इंपैक्ट समिट के दौरान ब्रिटेन का ध्यान इस बात पर रहेगा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता किस प्रकार विकास को गति दे सकती है, नए रोजगार सृजित कर सकती है, सार्वजनिक सेवाओं में सुधार कर सकती है और दुनिया भर के लोगों को लाभ पहुंचा सकती है।
उप प्रधानमंत्री डेविड लैमी और एआई मंत्री कनिष्क नारायण के नेतृत्व में ब्रिटेन का प्रतिनिधिमंडल भारत आएगा। लैमी ने शिखर सम्मेलन से पहले जारी एक बयान में कहा, "शिखर सम्मेलन यह निर्धारित करने का एक महत्वपूर्ण क्षण है कि हम एआई के पूर्ण लाभों और क्षमता को उजागर करने के लिए अपने अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के साथ मिलकर कैसे काम कर सकते हैं। साथ ही साथ मजबूत और निष्पक्ष सुरक्षा मानकों को शामिल कर सकते हैं जो हम सभी की रक्षा करते हैं।"
विज्ञान, नवाचार और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसआईटी) ने कहा कि भारत और ब्रिटेन 'स्वाभाविक तकनीकी साझेदार' हैं और इंफोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) और विप्रो जैसी सॉफ्टवेयर दिग्गज कंपनियां पूरे यूके में अपने परिचालन का विस्तार कर रही हैं।
वैश्विक दक्षिण में पहली बार अंतरराष्ट्रीय एआई शिखर सम्मेलन
वैश्विक दक्षिण में पहली बार अंतरराष्ट्रीय एआई शिखर सम्मेलन हो रहा है। शिखर सम्मेलन तीन सूत्रों- मानव, पृथ्वी और प्रगति पर आधारित है, जो एआई पर वैश्विक सहयोग के लिए बुनियादी सिद्धांतों को परिभाषित करते हैं। इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य और नागरिक सेवाओं में एआई का उपयोग दिखाया जाएगा। वहीं, पृथ्वी के पर्यावरण और जलवायु से जुड़े समाधान पेश किए जाएंगे।
एआई पेशेवरों की मांग को पूरा करने वाला स्रोत बन सकता है भारत
यूरोप, अमेरिका, चीन और एशिया के बीच प्रौद्योगिकी प्रतिस्पर्धा के इस दौर में भारत अपने डिजिटल मॉडल जैसे आधार, यूपीआई और ओपन नेटवर्क को एक संतुलित और समावेशी विकल्प के रूप में पेश करता रहा है। भारत को उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में एआई पेशेवरों की दुनिया में मांग तेजी से बढ़ेगी और अपनी विशाल युवा आबादी तथा आईटी कौशल के दम पर वह इस जरूरत को पूरा करने वाला प्रमुख स्रोत बन सकता है।
13 देशों के पवेलियन लगाए जाएंगे
एक्सपो में ऑस्ट्रेलिया, जापान, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड्स, स्विट्जरलैंड, सर्बिया, एस्टोनिया, ताजिकिस्तान और अफ्रीका सहित 13 देशों के पवेलियन लगाए जाएंगे, जो एआई क्षेत्र में वैश्विक सहयोग को प्रदर्शित करेंगे।
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300 से अधिक प्रदर्शनी पवेलियन और लाइव प्रदर्शन
एक्सपो में 300 से अधिक प्रदर्शनी पवेलियन और लाइव प्रदर्शन होंगे। कार्यक्रम की रूपरेखा तीन प्रमुख विषयों लोग, ग्रह और उन्नति पर आधारित है। लोग के तहत शिक्षा, स्वास्थ्य और नागरिक सेवाओं में एआई का उपयोग दिखाया जाएगा। वहीं ग्रह में पर्यावरण और जलवायु से जुड़े समाधान पेश किए जाएंगे। इसके साथ ही उन्नति में उद्योग, कारोबार और आर्थिक विकास में एआई की भूमिका बताई जाएगी।
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