CJI: कौन हैं न्यायाधीश राजेश बिंदल? जिनकी विदाई पर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने की सराहना, जानें
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने आज न्यायाधीश राजेश बिंदल की सराहना की है। आईए जानते हैं इनके बारे में
विस्तार
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के निवर्तमान न्यायमूर्ति राजेश बिंदल की उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने कहा वह न केवल एक न्यायाधीश के रूप में न्यायपालिका की भूमिका निभाई, बल्कि संस्थागत कार्यों का भी ईमानदारी से किया। उनके निपटाए गए मामलों की दर बेजोड़ थी।
- 16 अप्रैल, 1961 को अंबाला में जन्मे न्यायमूर्ति बिंदल ने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री प्राप्त किया।
- इसके बाद 1985 में अपने कानूनी करियर की शुरुआत की। वहीं, 2006 में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत हुए।
- इसके बाद उन्होंने जम्मू और कश्मीर उच्च न्यायालय, कलकत्ता उच्च न्यायालय और इलाहाबाद उच्च न्यायालय सहित कई उच्च न्यायालयों में अपनी सेवाएं दीं, जहां उन्होंने मुख्य न्यायाधीश के रूप में भी पद संभाले।
- वरिष्ठता क्रम में 14वें नंबर पर रहे न्यायमूर्ति बिंदल को 13 फरवरी, 2023 को सर्वोच्च न्यायालय में पदोन्नत किया गया था।
- वे 15 अप्रैल, 2026 को तीन साल से अधिक के कार्यकाल के दौरान 100 से अधिक फैसले लिखने के बाद पद छोड़ रहे हैं।
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पुराने दिनों को किया याद
न्यायमूर्ति बिंदल की सेवानिवृत्ति के साथ, शीर्ष न्यायालय में न्यायाधीशों के 34 स्वीकृत पदों में से कुल रिक्तियों की संख्या दो हो गई है। न्यायमूर्ति बिंदल और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की अध्यक्षता करते हुए, मुख्य न्यायाधीश ने निवर्तमान न्यायाधीश के साथ अपने वकालत के दिनों से चले आ रहे दशकों पुराने जुड़ाव को याद किया। मुख्य न्यायाधीश ने कहा, 'जैसा कि आपने रिकॉर्ड से देखा है, हमने साथ में काफी समय बिताया है। मुझे अपने शुरुआती पेशेवर जीवन में भी उन्हें बहुत करीब से जानने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। समय बीतने के साथ, हम दोनों अक्सर कर संबंधी मामलों और बाद में, अधिक विशिष्ट मामलों से निपटने में लगे रहे, जबकि मैं अन्य न्यायक्षेत्रों को संभाल रहा था... वे अपनी ईमानदारी और कड़ी मेहनत के लिए जाने जाते थे।'
मामले तेजी से निपटाने के लिए प्रसिद्ध
न्यायमूर्ति कांत ने कहा कि उन्हें और न्यायमूर्ति बिंदल को इस पक्ष में एक साथ काम करने का अवसर मिला था। उन्होंने आगे कहा कि जैसा कि माननीय अटॉर्नी जनरल ने सही कहा है, हम दोनों ही मामलों के निपटारे की अपनी तीव्र गति के लिए जाने जाते थे। मैं उनसे कभी प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकता था, और उनके रिकॉर्ड को तोड़ने का तो सवाल ही नहीं उठता था। वे मामलों के त्वरित निपटारे के लिए प्रसिद्ध थे। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि न्यायमूर्ति बिंदल ने न केवल "न्यायपालिका की भूमिका निभाई, बल्कि एक न्यायाधीश को जो संस्थागत भूमिका निभानी चाहिए, वह भी निभाई।
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मुख्य न्यायाधीश ने कहा, 'फरवरी 2023 में इस न्यायालय में पदोन्नत होने के बाद से न्यायमूर्ति बिंदल ने 100 से अधिक फैसले लिखे हैं। इन फैसलों से किसी भी व्यक्तिगत परिणाम से कहीं अधिक यह पता चलता है कि वह एक ऐसे न्यायाधीश हैं जो व्यवस्थागत मुद्दों में मानवीय पहलू को लगातार प्राथमिकता देने का प्रयास करते हैं।' न्यायमूर्ति बिंदल मेडलीएपीआर (मेडिको-लीगल एग्जामिनेशन एंड पोस्ट-मॉर्टम रिपोर्टिंग सिस्टम) के निर्माता थे, जो एक ऐसा सॉफ्टवेयर है जिसने फोरेंसिक रिपोर्टों को मानकीकृत और सुरक्षित बनाया। शुरुआत में पंजाब में लॉन्च की गई इस प्रणाली को केंद्र सरकार ने 2023 में सभी राज्यों के लिए अनिवार्य कर दिया था और अब यह क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क सिस्टम (सीसीटीएनएस) के साथ एकीकृत है। न्यायमूर्ति कांट ने टिप्पणी करते हुए कहा, 'उनका मानना था कि प्रौद्योगिकी केवल सुधार का एक सहायक अंग नहीं है, बल्कि सुधार का एक साधन है।' उन्होंने न्यायमूर्ति बिंदल को उनके सेवानिवृत्त जीवन के लिए शुभकामनाएं दीं।
अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमानी ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति बिंदल के कार्यकाल से संबंधित एक आंकड़ा उजागर किया। न्यायमूर्ति बिंदल ने 12 वर्षों की अवधि में लगभग 80,000 मामलों का निपटारा किया, जो प्रति वर्ष औसतन 6,000 मामले हैं। अटॉर्नी जनरल ने कहा कि मुझे लगा था कि यह महज एक आंकड़ा है, लेकिन नहीं। यह काम का एक विशाल संग्रह है।

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