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Congress: जाति जनगणना में OBC के लिए अलग कॉलम क्यों नहीं? कांग्रेस ने सरकार पर 'गहरी साजिश' का लगाया आरोप
Tue, 18 Aug 2026 10:25 AM IST
अस्मिता त्रिपाठी
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: अस्मिता त्रिपाठी
Updated Tue, 18 Aug 2026 10:25 AM IST
सार
कांग्रेस ने मोदी सरकार पर जाति जनगणना में ओबीसी के लिए अलग कॉलम नहीं रखने का आरोप लगाया है। ओबीसी विभाग प्रमुख अनिल जयहिंद ने इसे सामाजिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन बताया। उनका दावा है कि इससे ओबीसी की सही आबादी दर्ज नहीं होगी।
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कांग्रेस ओबीसी विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल जयहिंद
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
कांग्रेस ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया। कांग्रेस का कहना है कि भाजपा ने एक गहरी साजिश के तहत जाति जनगणना से अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) कैटेगरी को जान-बूझकर हटा दिया है।
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अनिल जयहिंद ने क्या कहा?
पार्टी के ओबीसी विभाग के प्रमुख अनिल जयहिंद ने सोमवार को कहा कि जनगणना प्रश्नावली में ओबीसी के लिए अलग कॉलम न रखना सामाजिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है। इससे ओबीसी समुदाय की आबादी के सही आंकड़े दर्ज नहीं हो पाते हैं।
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भाजपा पर क्या आरोप लगाया?
जयहिंद ने कहा कि वैज्ञानिक और पारदर्शी तरीके से जाति जनगणना कराने के बजाय, सरकार एक ऐसी प्रक्रिया अपना रही है जिससे ओबीसी को सरकारी आंकड़ों से बाहर करने का रास्ता बनता है। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि असल में एक 'मनुवादी' (जाति-पदानुक्रम वाली) व्यवस्था काम कर रही है।
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14 अगस्त को जारी नोटिफिकेशन का जिक्र करते हुए जयहिंद ने बताया कि प्रश्नावली के 10वें सवाल में ओबीसी कैटेगरी को लिस्ट करने के लिए कोई कॉलम नहीं है। वहीीं, कांग्रेस नेता सुभाषिनी शरद यादव ने कहा कि जनगणना में जातियों की सही पहचान होनी चाहिए, क्योंकि देश के अलग-अलग इलाकों में जातियों का स्वरूप और उनकी मौजूदगी अलग-अलग होती है।
2027 की जनगणना में जाति को कैसे दर्ज किया जाएगा?
14 अगस्त 2026 को, भारत के रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त के कार्यालय ने जनसंख्या जनगणना के लिए 40 सवालों वाला एक नोटिफिकेशन जारी किया। इसमें सवाल नंबर 10 सबसे ज्यादा चर्चा में है, जिसमें 'अनुसूचित जाति (एससी)/अनुसूचित जनजाति (एसटी) के बारे में पूछा गया है। 2027 की जनगणना में जाति दर्ज करने का यही एकमात्र तरीका है।
क्या 2027 की जनगणना में हर जाति की गणना होगी?
इस जनगणना में जाति से जुड़ा सवाल एक बड़ा बदलाव है। आजाद भारत में पहली बार, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के अलावा दूसरी जातियों की भी गिनती की जाएगी। 2011 की जनगणना में कुल 29 सवाल थे, वहीं, 2027 की जनगणना के दूसरे चरण में 40 सवाल पूछे जाएंगे।