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प्रबंधन, संवेदना और आध्यात्मिकता: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपराजेय क्यों हैं? जानिए
Fri, 18 Sep 2026 04:44 AM IST
राकेश कुमार
हसमुख अधिया, भारत के पूर्व वित्त एवं राजस्व सचिव
हसमुख अधिया, भारत के पूर्व वित्त एवं राजस्व सचिव
Published by: राकेश कुमार
Updated Fri, 18 Sep 2026 04:44 AM IST
सार
नरेंद्र मोदी के लंबे राजनीतिक सफर और लगातार चुनावी सफलताओं के पीछे उनकी दूरगामी सोच, बेहतर टीम प्रबंधन और लोगों से जुड़ने की क्षमता अहम मानी गई है। वे योजनाओं की लगातार समीक्षा, नई पहल को व्यवस्थित करने और टीम का मनोबल बढ़ाने पर जोर देते हैं।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
मोदी जी ने लगातार 25 वर्षों तक कई क्षेत्रों में सफलता हासिल की है। इनमें देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत और टिकाऊ गति देना, केंद्र में तीन बार चुनाव जीतना और कई राज्यों में चुनावों में सफलता हासिल करना शामिल है। इन उपलब्धियों के पीछे मोदी जी का व्यक्तित्व और उनके प्रबंधन, मानवीय तथा आध्यात्मिक गुण हैं। मुझे 2001 में पहली बार गुजरात का मुख्यमंत्री बनने के बाद से ही राज्य और केंद्र, दोनों स्तरों पर मोदी जी के साथ काम करने का अवसर मिला। मैंने मुख्यमंत्री कार्यालय में एक वर्ष तक अतिरिक्त प्रधान सचिव और फिर दो वर्ष तक प्रधान सचिव के रूप में भी काम किया। इस दौरान मुझे उनके कई उत्कृष्ट गुणों को करीब से देखने का अवसर मिला। आइए, सबसे पहले उनके प्रबंधन के गुणों की बात करते हैं। पहला, वे हमेशा देश के भविष्य को ध्यान में रखकर दूरगामी सोच रखते हैं। लंबे समय के लिए योजना बनाने की उनकी क्षमता ही उन्हें दूसरों से अलग बनाती है।
दूसरा, वे हर किसी को देखते हैं, उनकी बात सुनते हैं और उनसे सीखते हैं। मुझे याद है कि केंद्रीय बजट तैयार करने के दौरान वे वित्त मंत्रालय के हर विभाग की प्रस्तुति को घंटों ध्यान से सुनते थे। इसके बाद बैठक में मौजूद लोगों के साथ विस्तार से चर्चा करते और अंत में अपनी राय रखते थे।
तीसरा, वे आयुष मंत्रालय, जनजातीय कार्य मंत्रालय और खेल मंत्रालय सहित हर मंत्रालय के कामकाज की लगातार समीक्षा करते थे। इन बैठकों में वे संबंधित मंत्रालयों को नई और बेहतर दिशा देने के साथ ही उनका उत्साह भी बढ़ाते थे।
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चौथा, उन्होंने गुजरात में वरिष्ठ अधिकारियों के लिए ‘चिंतन शिविर’ के रूप में सालाना बैठक आयोजित करने की अच्छी परंपरा शुरू की। यह बड़े संगठनों में अपनाई जाने वाली एक बेहतरीन प्रबंधन पद्धति है। बाद में केंद्र में भी इसे वार्षिक मुख्य सचिव सम्मेलन के रूप में लागू किया गया।
पांचवां, एक अच्छे टीम प्रबंधक के रूप में मैंने उन्हें हमेशा अधिकारियों और सहयोगियों के लिए सहजता से उपलब्ध पाया। उनकी यह उपलब्धता उन्हें आसपास हो रही गतिविधियों की सही जानकारी देती थी। छठा, मोदी जी किसी भी नई पहल को शुरू करने और उसे व्यवस्थित करने में पूरा ध्यान देते थे। इसका उदाहरण पहली बार आयोजित किया गया ‘वाइब्रेंट गुजरात’ सम्मेलन है। इसके बाद वे चाहते थे कि उस अनुभव को सही ढंग से दर्ज किया जाए और उसे एक स्थायी व्यवस्था का हिस्सा बनाया जाए, ताकि भविष्य में भी उसका लाभ मिल सके।
गरीबों के लिए सच्ची संवेदना
मोदी जी के मानवीय गुणों की बात करें तो गरीबों और वंचितों के प्रति उनके मन में सच्ची संवेदना है। मुझे वर्ष 2003 में गुजरात के पहले चिंतन शिविर में दिया गया उनका समापन भाषण याद है। इसमें उन्होंने वंचित लोगों की परेशानियों को इतनी भावुकता से बताया कि अधिकांश अधिकारियों और मंत्रियों की आंखों में आंसू आ गए थे। अपनी टीम के प्रति भी उनका मानवीय जुड़ाव उतना ही गहरा है।
जब उन्हें पता चलता है कि कोई अधिकारी या राजनीतिक कार्यकर्ता या उसके परिवार का कोई सदस्य बीमार है, तो वे फोन करके उसका हालचाल पूछते हैं। वे लोगों को उनके खास मौकों पर शुभकामनाएं भी देते हैं। एक इंसान के रूप में उनकी सबसे खास बात यह है कि वे जिन लोगों से मिलते हैं, उनके नाम याद रखते हैं। कई साल बाद मिलने पर भी उन्हें नाम से पहचान लेते हैं। इससे लोग बहुत प्रभावित होते हैं। यह उनकी सहज और स्वाभाविक क्षमता है।
आध्यात्मिक विशेष गुण भी मौजूद
मोदी जी के व्यक्तित्व का सबसे महत्वपूर्ण पहलू उनके आध्यात्मिक गुण हैं। काम करने का उनका तरीका और जीवन में अच्छे या बुरे परिणामों को स्वीकार करने का उनका भाव भगवद्गीता में बताए गए कर्मयोग को दर्शाता है। पहला, वे जो भी काम करते हैं, उसे पूरी मेहनत और गुणवत्ता के साथ करते हैं। वे किसी भी काम को हल्के में नहीं लेते। जिस काम को वे कर रहे होते हैं, उस समय उनका पूरा ध्यान उसी पर होता है। गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं करते। जब उनकी मेहनत के शानदार परिणाम मिलते हैं, तब भी वे विनम्र बने रहते हैं। सफलता उन्हें न तो लापरवाह बनाती है और न ही अहंकारी। जब परिणाम उनकी अपेक्षा के अनुसार नहीं होते, तब भी वे शांत रहते हैं। विपरीत परिस्थितियां उन्हें और अधिक प्रेरित करती हैं।
किसी विचार को अपनी टीम या बड़े जनसमूह तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने की उनकी क्षमता के बारे में हम सभी जानते हैं। इस मामले में उनका कौशल असाधारण है। प्रबंधन के ये उत्कृष्ट गुण मोदी जी को ‘टीम इंडिया’ का एक महान नेता बनाते हैं।
आस्था से हर क्षेत्र में मिलती है सफलता
मोदी जी ईश्वर यानी सृष्टि के रचयिता में गहरी आस्था रखते हैं। वे जहां भी जाते हैं, वहां किसी प्रसिद्ध धार्मिक स्थल पर जाने का अवसर नहीं छोड़ते। संभवतः ईश्वर की शक्ति में यही विश्वास उन्हें लगातार काम करते रहने की ताकत देता है। इसी आस्था से उन्हें हर क्षेत्र में सफलता भी मिलती है। वेदांत में बताए गए अद्वैत के विचार में मोदी जी की आध्यात्मिक आस्था के बारे में मुझे एक घटना याद आती है। जब मैं उनके कार्यालय में काम कर रहा था, तब उन्होंने मुझे यह बात बताई थी। उन्होंने बताया कि बचपन में एक बार उन्हें चोट लग गई थी।
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दूसरा, वे हर किसी को देखते हैं, उनकी बात सुनते हैं और उनसे सीखते हैं। मुझे याद है कि केंद्रीय बजट तैयार करने के दौरान वे वित्त मंत्रालय के हर विभाग की प्रस्तुति को घंटों ध्यान से सुनते थे। इसके बाद बैठक में मौजूद लोगों के साथ विस्तार से चर्चा करते और अंत में अपनी राय रखते थे।
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तीसरा, वे आयुष मंत्रालय, जनजातीय कार्य मंत्रालय और खेल मंत्रालय सहित हर मंत्रालय के कामकाज की लगातार समीक्षा करते थे। इन बैठकों में वे संबंधित मंत्रालयों को नई और बेहतर दिशा देने के साथ ही उनका उत्साह भी बढ़ाते थे।
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चौथा, उन्होंने गुजरात में वरिष्ठ अधिकारियों के लिए ‘चिंतन शिविर’ के रूप में सालाना बैठक आयोजित करने की अच्छी परंपरा शुरू की। यह बड़े संगठनों में अपनाई जाने वाली एक बेहतरीन प्रबंधन पद्धति है। बाद में केंद्र में भी इसे वार्षिक मुख्य सचिव सम्मेलन के रूप में लागू किया गया।
पांचवां, एक अच्छे टीम प्रबंधक के रूप में मैंने उन्हें हमेशा अधिकारियों और सहयोगियों के लिए सहजता से उपलब्ध पाया। उनकी यह उपलब्धता उन्हें आसपास हो रही गतिविधियों की सही जानकारी देती थी। छठा, मोदी जी किसी भी नई पहल को शुरू करने और उसे व्यवस्थित करने में पूरा ध्यान देते थे। इसका उदाहरण पहली बार आयोजित किया गया ‘वाइब्रेंट गुजरात’ सम्मेलन है। इसके बाद वे चाहते थे कि उस अनुभव को सही ढंग से दर्ज किया जाए और उसे एक स्थायी व्यवस्था का हिस्सा बनाया जाए, ताकि भविष्य में भी उसका लाभ मिल सके।
गरीबों के लिए सच्ची संवेदना
मोदी जी के मानवीय गुणों की बात करें तो गरीबों और वंचितों के प्रति उनके मन में सच्ची संवेदना है। मुझे वर्ष 2003 में गुजरात के पहले चिंतन शिविर में दिया गया उनका समापन भाषण याद है। इसमें उन्होंने वंचित लोगों की परेशानियों को इतनी भावुकता से बताया कि अधिकांश अधिकारियों और मंत्रियों की आंखों में आंसू आ गए थे। अपनी टीम के प्रति भी उनका मानवीय जुड़ाव उतना ही गहरा है।
जब उन्हें पता चलता है कि कोई अधिकारी या राजनीतिक कार्यकर्ता या उसके परिवार का कोई सदस्य बीमार है, तो वे फोन करके उसका हालचाल पूछते हैं। वे लोगों को उनके खास मौकों पर शुभकामनाएं भी देते हैं। एक इंसान के रूप में उनकी सबसे खास बात यह है कि वे जिन लोगों से मिलते हैं, उनके नाम याद रखते हैं। कई साल बाद मिलने पर भी उन्हें नाम से पहचान लेते हैं। इससे लोग बहुत प्रभावित होते हैं। यह उनकी सहज और स्वाभाविक क्षमता है।
आध्यात्मिक विशेष गुण भी मौजूद
मोदी जी के व्यक्तित्व का सबसे महत्वपूर्ण पहलू उनके आध्यात्मिक गुण हैं। काम करने का उनका तरीका और जीवन में अच्छे या बुरे परिणामों को स्वीकार करने का उनका भाव भगवद्गीता में बताए गए कर्मयोग को दर्शाता है। पहला, वे जो भी काम करते हैं, उसे पूरी मेहनत और गुणवत्ता के साथ करते हैं। वे किसी भी काम को हल्के में नहीं लेते। जिस काम को वे कर रहे होते हैं, उस समय उनका पूरा ध्यान उसी पर होता है। गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं करते। जब उनकी मेहनत के शानदार परिणाम मिलते हैं, तब भी वे विनम्र बने रहते हैं। सफलता उन्हें न तो लापरवाह बनाती है और न ही अहंकारी। जब परिणाम उनकी अपेक्षा के अनुसार नहीं होते, तब भी वे शांत रहते हैं। विपरीत परिस्थितियां उन्हें और अधिक प्रेरित करती हैं।
किसी विचार को अपनी टीम या बड़े जनसमूह तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने की उनकी क्षमता के बारे में हम सभी जानते हैं। इस मामले में उनका कौशल असाधारण है। प्रबंधन के ये उत्कृष्ट गुण मोदी जी को ‘टीम इंडिया’ का एक महान नेता बनाते हैं।
आस्था से हर क्षेत्र में मिलती है सफलता
मोदी जी ईश्वर यानी सृष्टि के रचयिता में गहरी आस्था रखते हैं। वे जहां भी जाते हैं, वहां किसी प्रसिद्ध धार्मिक स्थल पर जाने का अवसर नहीं छोड़ते। संभवतः ईश्वर की शक्ति में यही विश्वास उन्हें लगातार काम करते रहने की ताकत देता है। इसी आस्था से उन्हें हर क्षेत्र में सफलता भी मिलती है। वेदांत में बताए गए अद्वैत के विचार में मोदी जी की आध्यात्मिक आस्था के बारे में मुझे एक घटना याद आती है। जब मैं उनके कार्यालय में काम कर रहा था, तब उन्होंने मुझे यह बात बताई थी। उन्होंने बताया कि बचपन में एक बार उन्हें चोट लग गई थी।