Women Reservation Bill: 25 साल बाद भी मंजूरी का इंतजार, जन्मदिन पर महिला सांसदों की पीएम से अपील- विधेयक को लगाओ पार

प्रतिभा ज्योति, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: प्रतिभा ज्योति Updated Fri, 17 Sep 2021 03:32 PM IST

सार

2019 में जब 78 महिलाएं लोकसभा के लिए चुनी गईं, तो महिला संगठनों ने छोटा-सा उत्सव मनाया था। खुशी मनाने की वजह यह थी कि उस साल संसद के निचले सदन में 14 फीसदी महिलाएं पहुंची थीं जो अब तक का सबसे अधिक प्रतिशत है। हालांकि यह खुशी तब ज्यादा देर नहीं ठहरी जब महिला आरक्षण विधेयक को पारित कराने के लिए सरकार सक्रिय नहीं हुई। लिहाजा इस विधेयक ने महिला सांसदों और संगठनों की चिंता एक बार फिर बढ़ा दी है। अमर उजाला डिजिटल ने इस मुद्दे पर कई महिला सांसदों और संगठनों की राय जानी है।
महिला आरक्षण विधेयक
महिला आरक्षण विधेयक - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार

हाल ही में भारत के मुख्य न्यायाधीश एन वी रमना ने कहा कि बहुत कम महिलाओं को शीर्ष पर प्रतिनिधित्व मिलता है। आजादी के 75 सालों के बाद भी सभी स्तरों पर महिलाओं के लिए कम से कम 50 फीसदी प्रतिनिधित्व की उम्मीद की जाएगी, लेकिन मुझे यह स्वीकार करने में बहुत मुश्किल हो रही है कि बड़ी कठिनाई के बाद अब हमने सर्वोच्च न्यायालय की पीठ में महिलाओं का केवल 11फीसदी प्रतिनिधित्व हासिल किया है।
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जस्टिस रमना के इस बयान ने महिला सांसदों और संगठनों में महिला आरक्षण विधेयक को लेकर फिर बेचैनी बढ़ा दी है। लिहाजा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर उन्हें शुभकामनाएं देते हुए महिला सांसदों और महिला संगठनों ने  एक बार फिर महिला आरक्षण विधेयक की मांग शुरू कर दी है। महिला सांसदों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बहुमत वाली सरकार का प्रतिनिधित्व करते हैं, वे चाहें तो इस विधेयक को आसानी से पारित करा सकते हैं।


महिला संगठनों ने आगामी संसद के शीतकालीन सत्र में इस विधेयक को पेश करने की मांग की है। महिला समूहों और सांसदों का कहना है कि सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था संसद और विधानसभा में महिलाओं की आवाज को समान रूप से प्रतिनिधित्व दिया जाना चाहिए। जिससे देश की आधी आबादी को समान प्रतिनिधित्व मिल सके।

आवाज संसद तक पहुंचाने में जुटे संगठन
सेंटर फॉर सोशल रिसर्च की अगुआई में महिला अधिकारों के लिए काम कर रहे संगठन ने महिला सांसदों के साथ मिलकर इसके लिए एक मुहिम छेड़ दी है। यह समूह अब अपनी आवाज़ संसद तक पहुंचाने की कोशिशों में जुट गया है। ग्लोबल कंसर्न्स इंडिया,  इंपल्स एनजीओ नेटवर्क,  भारतीय महिलाओं का राष्ट्रीय संघ,  महिला शक्ति कनेक्ट,  वाईडब्ल्यूसीए और कई संगठन इस मांग का समर्थन कर रहे हैं। 

विधेयक पारित कराने के लिए कोशिशें तेज
सेंटर फॉर सोशल रिसर्च की डायरेक्टर रंजना कुमारी ने बताया हमने कई महिला सांसदों और संगठनों के साथ इस मिलकर महिला आरक्षण विधेयक को पारित कराने के लिए फिर से कोशिशें शुरू की है। महिला संगठन लगतार इस बात पर जोर दे रहा है विधेयक संसद से पारित हो। उन्होंने कहा इसी सिलसिले में 2016 में हमने उन्हें रोज गुलाबी लिफाफे में प्रधानमंत्री को करीब 365 चिट्ठियां भेजी थीं, लेकिन उन्होंने हमारी बात नहीं सुनी। उनका कहना है  निर्णय लेने के स्तर पर महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने से लगभग सभी राजनीतिक दल हिचकते हैं। जबकि सत्ता में अधिक महिलाओं के होने से लिंग आधारित हिंसा को कम किया जा सकता है। हम प्रधानमंत्री मोदी से उनके जन्मदिन पर यह अपील करते हैं कि वे इस विधेयक को पारित कराएं। 
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