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'देशहित को खुद से ऊपर रखा': प्रधान के इस्तीफे पर जोहो के सह-संस्थापक ने जताया दुख, क्या बोले श्रीधर वेंबू?
Sat, 25 Jul 2026 08:15 PM IST
Devesh Tripathi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Devesh Tripathi
Updated Sat, 25 Jul 2026 08:15 PM IST
सार
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जोहो के सह-संस्थापक श्रीधर वेंबू ने उनकी सार्वजनिक रूप से प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि प्रधान देश के सबसे समर्पित लोकसेवकों में से एक हैं और विशेष रूप से ग्रामीण युवाओं के कौशल विकास को लेकर बेहद गंभीर रहते थे। वेंबू ने बताया कि इस विषय पर उनकी कई बार प्रधान से चर्चा हुई थी।
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जोहो के पूर्व सीईओ श्रीधर वेंबू
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स/ANI
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विस्तार
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और सरकार की ओर से सीजेपी की अन्य दो मांगें माने जाने के बाद छात्रों का प्रदर्शन खत्म हो गया। इस बीच जोहो के सह-संस्थापक श्रीधर वेंबू ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया दी है। श्रीधर वेंबू ने एक्स पर पोस्ट में धर्मेंद्र प्रधान एक बेहतरीन लोकसेवक बताया।
वेंबू ने सोशल मीडिया पर लिखा, "धर्मेंद्र प्रधान उन बेहतरीन लोकसेवकों में से एक हैं, जिन्हें मैं जानता हूं। उन्हें इस देश के युवाओं, खासकर ग्रामीण छात्रों की बहुत चिंता है। ग्रामीण युवाओं को बेहतर कौशल कैसे दिया जाए, इस विषय पर हमारी कई बार चर्चा हुई है।"
श्रीधर वेंबू ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर क्यों जताया दुख?
जोहो के सह-संस्थापक ने कहा, "उनके इस्तीफे से मुझे दुख हुआ है। उन्होंने खुद से ऊपर देश को रखा है और अब उनके प्रति मेरा सम्मान पहले से भी अधिक बढ़ गया है।" वेंबू ने अपने संदेश के आखिर में लिखा, "आपकी सेवाओं के लिए धन्यवाद, धर्मेंद्र प्रधान। कृपया देशहित के लिए अपना संघर्ष जारी रखें।"
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बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंधित करने की वकालत
एक दिन पहले ही श्रीधर वेंबू ने भारत में छोटे बच्चों के लिए सोशल मीडिया को प्रतिबंधित करने की वकालत की थी। उन्होंने कहा था कि भारत को छोटे बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए। जोहो के पूर्व सीईओ ने भारत से फ्रांस की तरह छोटे बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने का आग्रह किया है।
फ्रांस के फैसले से जताई सहमति
वेंबू की यह प्रतिक्रिया फ्रांस की संसद द्वारा 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने वाले ऐतिहासिक विधेयक को पारित करने से संबंधित एक पोस्ट पर आई थी। फ्रांस यूरोपीय संघ का पहला देश बन गया जिसने सोशल मीडिया पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। नए कानून के तहत छात्रों को स्कूल परिसर के अंदर मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने की भी मनाही है।
उन्होंने कहा था, "मेरा मानना है कि छोटे बच्चों को किताबें पढ़नी चाहिए, धूप में मिट्टी में खेलना चाहिए और सोशल मीडिया से दूर रहना चाहिए।" वेंबू का मानना है कि इस प्रतिबंध से छोटे बच्चे मोबाइल स्क्रीन की सीमाओं से बाहर निकलेंगे और दुनिया को अच्छे से जान सकेंगे।
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वेंबू ने सोशल मीडिया पर लिखा, "धर्मेंद्र प्रधान उन बेहतरीन लोकसेवकों में से एक हैं, जिन्हें मैं जानता हूं। उन्हें इस देश के युवाओं, खासकर ग्रामीण छात्रों की बहुत चिंता है। ग्रामीण युवाओं को बेहतर कौशल कैसे दिया जाए, इस विषय पर हमारी कई बार चर्चा हुई है।"
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श्रीधर वेंबू ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर क्यों जताया दुख?
जोहो के सह-संस्थापक ने कहा, "उनके इस्तीफे से मुझे दुख हुआ है। उन्होंने खुद से ऊपर देश को रखा है और अब उनके प्रति मेरा सम्मान पहले से भी अधिक बढ़ गया है।" वेंबू ने अपने संदेश के आखिर में लिखा, "आपकी सेवाओं के लिए धन्यवाद, धर्मेंद्र प्रधान। कृपया देशहित के लिए अपना संघर्ष जारी रखें।"
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बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंधित करने की वकालत
एक दिन पहले ही श्रीधर वेंबू ने भारत में छोटे बच्चों के लिए सोशल मीडिया को प्रतिबंधित करने की वकालत की थी। उन्होंने कहा था कि भारत को छोटे बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए। जोहो के पूर्व सीईओ ने भारत से फ्रांस की तरह छोटे बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने का आग्रह किया है।
फ्रांस के फैसले से जताई सहमति
वेंबू की यह प्रतिक्रिया फ्रांस की संसद द्वारा 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने वाले ऐतिहासिक विधेयक को पारित करने से संबंधित एक पोस्ट पर आई थी। फ्रांस यूरोपीय संघ का पहला देश बन गया जिसने सोशल मीडिया पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। नए कानून के तहत छात्रों को स्कूल परिसर के अंदर मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने की भी मनाही है।
उन्होंने कहा था, "मेरा मानना है कि छोटे बच्चों को किताबें पढ़नी चाहिए, धूप में मिट्टी में खेलना चाहिए और सोशल मीडिया से दूर रहना चाहिए।" वेंबू का मानना है कि इस प्रतिबंध से छोटे बच्चे मोबाइल स्क्रीन की सीमाओं से बाहर निकलेंगे और दुनिया को अच्छे से जान सकेंगे।