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Srinagar News: एनजीटी की विशेषज्ञ समिति ने सुखनाग नाले का किया मुआयनां
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- अवैध नदी तल खनन से हुए नुकसान का लिया जायजा, 23 मार्च तक समिति सौंपेगी अपनी रिपोर्ट, मामले की सुनवाई 27 मार्च को एनजीटी के समक्ष होनी है
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की ओर से गठित विशेषज्ञ समिति ने वीरवार को बीरवाह में सुखनाग नाले का मुआयना किया। टीम के सदस्यों ने कथित अवैध नदी-तल खनन से हुए नुकसान का आकलन किया।
इस समिति में जीबी पंत नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन एनवायरनमेंट के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. संदीप मुखर्जी और पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में निदेशक खुर्शीद आलम शामिल रहे। अधिकारियों ने बताया कि टीम ने नदी-तल, किनारों और आस-पास की चरागाह जमीन का मुआयना किया। बताया जा रहा है कि पिछले तीन-चार सालों में एक निजी कंपनी की ओर से की गई खनन गतिविधियों के कारण इन जगहों को भारी नुकसान पहुंचा है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार एनजीटी ने वर्ष 2024 में पर्यावरण कार्यकर्ता डॉ. राजा मुजफ्फर भट की ओर से दायर एक याचिका के बाद इस मामले पर रिपोर्ट मांगी थी। दिसंबर 2024 में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की एक टीम की ओर से मौके का निरीक्षण करने के बाद ट्रिब्यूनल ने पिछले साल जनवरी में इस इलाके में खनन पर रोक लगा दी थी।
बाद में बडगाम के उपायुक्त ने इस मामले की जांच के लिए बीरवाह के उप-विभागीय मजिस्ट्रेट (एसडीएम) की अध्यक्षता में एक जिला-स्तरीय समिति बनाई। अधिकारियों ने बताया कि इस पैनल ने जम्मू कश्मीर प्रदूषण नियंत्रण समिति के जरिए एनजीटी को अपनी रिपोर्ट सौंपी।
सूत्रों ने बताया कि मामले की हालिया सुनवाई के दौरान विशेषज्ञ समिति ने मौके पर जाकर मुआयना करने की इच्छा जताई थी। यह पैनल 23 मार्च तक एनजीटी को अपनी रिपोर्ट सौंप देगा। अधिकारियों ने बताया कि इस मामले की सुनवाई 27 मार्च को ट्रिब्यूनल के सामने होनी है जहां अंतिम फैसला सुरक्षित रखे जाने की उम्मीद है।
निरीक्षण टीम के साथ कई स्थानीय अधिकारी भी थे जिनमें बीरवाह के एसडीएम, बडगाम के डीएफओ और बाढ़ नियंत्रण, राजस्व और पुलिस विभागों के अधिकारी शामिल थे। याचिकाकर्ता और स्थानीय निवासी भी मौके पर मौजूद थे।
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की ओर से गठित विशेषज्ञ समिति ने वीरवार को बीरवाह में सुखनाग नाले का मुआयना किया। टीम के सदस्यों ने कथित अवैध नदी-तल खनन से हुए नुकसान का आकलन किया।
इस समिति में जीबी पंत नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन एनवायरनमेंट के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. संदीप मुखर्जी और पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में निदेशक खुर्शीद आलम शामिल रहे। अधिकारियों ने बताया कि टीम ने नदी-तल, किनारों और आस-पास की चरागाह जमीन का मुआयना किया। बताया जा रहा है कि पिछले तीन-चार सालों में एक निजी कंपनी की ओर से की गई खनन गतिविधियों के कारण इन जगहों को भारी नुकसान पहुंचा है।
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सरकारी सूत्रों के अनुसार एनजीटी ने वर्ष 2024 में पर्यावरण कार्यकर्ता डॉ. राजा मुजफ्फर भट की ओर से दायर एक याचिका के बाद इस मामले पर रिपोर्ट मांगी थी। दिसंबर 2024 में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की एक टीम की ओर से मौके का निरीक्षण करने के बाद ट्रिब्यूनल ने पिछले साल जनवरी में इस इलाके में खनन पर रोक लगा दी थी।
बाद में बडगाम के उपायुक्त ने इस मामले की जांच के लिए बीरवाह के उप-विभागीय मजिस्ट्रेट (एसडीएम) की अध्यक्षता में एक जिला-स्तरीय समिति बनाई। अधिकारियों ने बताया कि इस पैनल ने जम्मू कश्मीर प्रदूषण नियंत्रण समिति के जरिए एनजीटी को अपनी रिपोर्ट सौंपी।
सूत्रों ने बताया कि मामले की हालिया सुनवाई के दौरान विशेषज्ञ समिति ने मौके पर जाकर मुआयना करने की इच्छा जताई थी। यह पैनल 23 मार्च तक एनजीटी को अपनी रिपोर्ट सौंप देगा। अधिकारियों ने बताया कि इस मामले की सुनवाई 27 मार्च को ट्रिब्यूनल के सामने होनी है जहां अंतिम फैसला सुरक्षित रखे जाने की उम्मीद है।
निरीक्षण टीम के साथ कई स्थानीय अधिकारी भी थे जिनमें बीरवाह के एसडीएम, बडगाम के डीएफओ और बाढ़ नियंत्रण, राजस्व और पुलिस विभागों के अधिकारी शामिल थे। याचिकाकर्ता और स्थानीय निवासी भी मौके पर मौजूद थे।