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Jharkhand: मनरेगा को लेकर कांग्रेस का राज्यस्तरीय महासंग्राम, पांच जनवरी से होगा जन आंदोलन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: शबाहत हुसैन
Updated Sat, 03 Jan 2026 08:29 PM IST
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सार
Jharkhand: प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि अखिल भारतीय स्तर पर मनरेगा बचाओ संग्राम को तीन चरणों में चलाया जाएगा। पहले चरण में 8 जनवरी को राज्य स्तर के कांग्रेस नेताओं की राज्य प्रभारी के साथ तैयारी बैठक होगी।
झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
झारखंड प्रदेश कांग्रेस 5 जनवरी से राज्यव्यापी “मनरेगा बचाओ अभियान” के तहत जन आंदोलन शुरू करेगी। इसकी जानकारी शनिवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने दी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की नीतियों के कारण मनरेगा कमजोर हो रहा है, जिससे ग्रामीण रोजगार और अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ रहा है।
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प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि अखिल भारतीय स्तर पर मनरेगा बचाओ संग्राम को तीन चरणों में चलाया जाएगा। पहले चरण में 8 जनवरी को राज्य स्तर के कांग्रेस नेताओं की राज्य प्रभारी के साथ तैयारी बैठक होगी। 10 जनवरी को जिला स्तर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस तथा 11 जनवरी को गांधी या अंबेडकर प्रतिमा के समक्ष एक दिवसीय उपवास व धरना आयोजित किया जाएगा।
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दूसरे चरण में 12 से 30 जनवरी तक पंचायत स्तर पर चौपाल, ग्राम प्रधानों, पूर्व ग्राम प्रधानों, रोजगार सेवकों और मनरेगा कार्यकर्ताओं के बीच कांग्रेस अध्यक्ष व नेता विपक्ष के पत्र का वितरण, विधानसभा स्तरीय नुक्कड़ सभा और पंपलेट वितरण किया जाएगा। 30 जनवरी शहीद दिवस पर मनरेगा कार्यकर्ताओं और आंदोलनकारियों के साथ बैठक होगी। तीसरे चरण में 31 जनवरी से 6 फरवरी तक जिला स्तरीय धरना, 7 से 15 फरवरी तक राज्य स्तरीय विधानसभा या लोक भवन घेराव तथा 16 से 25 फरवरी के बीच देशभर में क्षेत्रीय स्तर पर चार मनरेगा बचाओ रैलियों का आयोजन किया जाएगा।
केशव महतो कमलेश ने कहा कि मनरेगा का नाम बदलना ग्रामीण भारत पर हमला है। पहले योजनाओं का चयन गांव में होता था, अब केंद्र पंचायत और गांव का चुनाव करेगा, जिससे क्षेत्रीय असंतुलन पैदा होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि मनरेगा ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ थी, जिसे केंद्र सरकार कमजोर कर रही है।वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने कहा कि भाजपा की सोच गांधीजी के सिद्धांतों के विपरीत है। नाम परिवर्तन भाजपा की मानसिकता को दर्शाता है और यह मजदूरों के साथ छलावा है। पूर्व वित्त मंत्री डॉ. रामेश्वर उरांव ने कहा कि मनरेगा ने ग्रामीण भारत का नक्शा बदला था, लेकिन नई व्यवस्था से गरीब राज्यों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।प्रेस कॉन्फ्रेंस में मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा, सोनाल शांति, कमल ठाकुर और राजन वर्मा भी मौजूद थे।