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Jharkhand: नीति आयोग की बैठक में हेमंत सोरेन ने रखीं बड़ी मांगें, झारखंड के लिए मांगा हजारों करोड़ का पैकेज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: प्रशांत तिवारी
Updated Thu, 11 Jun 2026 06:59 PM IST
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सार
Jharkhand: नीति आयोग की 11वीं शासी परिषद की बैठक में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड को खनिज आधारित राज्य से आगे बढ़ाकर मैन्युफैक्चरिंग हब और नॉलेज इकोनॉमी बनाने का विजन प्रस्तुत किया। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास, खेल, कृषि और डिजिटल गवर्नेंस के क्षेत्र में राज्य सरकार की उपलब्धियों को गिनाते हुए केंद्र सरकार से कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं और वित्तीय सहायता की मांग की।
नीति आयोग की बैठक में शामिल हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
नीति आयोग की 11वीं बैठक में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य के समग्र विकास पर बल दिया। उसकी विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की और केंद्र से सहयोग की अपेक्षा की। समग्र विकास की विचारधारा को रखते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड की खनिज संपदा तभी सार्थक होगी, जब उसे मानव पूंजी से जोड़ा जाए।
खनिज संपदा से आगे बढ़कर विकास का नया मॉडल
उन्होंने झारखंड को केवल खनिज निकालने वाले राज्य के रूप में देखने की परंपरा से अलग विकास की यात्रा में साझेदार बनाने पर बल दिया। अपनी बातों को विस्तार से रखते हुए कहा कि राज्य के संसाधनों का राज्य में ही वैल्यू एडिशन हो, उससे जुड़ा मैन्युफैक्चरिंग हो और राज्य की मानव पूंजी का उसमें उपयोग हो। उन्होंने केंद्र सरकार से क्रिटिकल मिनरल्स आधारित उद्योग विकसित करने के साथ-साथ नॉलेज, रिसर्च और इनोवेशन के केंद्र विकसित करने में अपेक्षित सहयोग मांगा।
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टेक्सटाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और ग्रीन एनर्जी में निवेश की पैरवी
टेक्सटाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, ग्रीन एनर्जी, लॉजिस्टिक्स और एग्रो-फूड प्रोसेसिंग के बड़े निवेश को झारखंड में बढ़ावा देने की वकालत की। उन्होंने कहा कि माइनिंग और मिनरल्स क्षेत्र में एआई आधारित मिनरल एक्सप्लोरेशन और सस्टेनेबल माइनिंग प्रैक्टिसेज को बढ़ावा देने तथा झारखंड को उद्योग एवं रोजगार का नया केंद्र बनाने की दिशा में प्रयास जारी हैं। केंद्र सरकार के सहयोग और मार्गदर्शन के हम आकांक्षी हैं। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल को विकास का मूल आधार बताया। 'विकसित भारत @2047' के लक्ष्य के साथ राज्य को नई दिशा देने की बात कही।
आंगनबाड़ी और पोषण अभियान पर विशेष जोर
हेमंत सोरेन ने कहा कि राज्य में 38 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों में से 15 हजार के पास भवन नहीं हैं। इसके बावजूद पोषण अभियान और SAAMAR के माध्यम से कुपोषण की स्थिति में सुधार हुआ है। बच्चों को प्रतिदिन अंडा उपलब्ध कराया जा रहा है। 5,000 नए आंगनबाड़ी भवन राज्य सरकार अपने संसाधनों से बना रही है।
शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट विद्यालयों का विस्तार
हेमंत सोरेन ने कहा कि राज्य में सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस से अब आईआईटी और मेडिकल संस्थानों में बच्चों का चयन होने लगा है। राज्य सरकार 5,000 उत्कृष्ट विद्यालय बनाने के लक्ष्य पर काम कर रही है। उन्होंने पीएम श्री और केंद्रीय विद्यालयों की संख्या बढ़ाने की मांग रखी। झारखंड में एनसीईआरटी का क्षेत्रीय केंद्र स्थापित करने का आग्रह भी किया गया।
कौशल विकास से रोजगार की नई राह
हेमंत सोरेन ने राज्य की विकास योजनाओं का खाका रखते हुए कहा कि राज्य हर साल 1 लाख से अधिक युवाओं को रोजगार से जोड़ रहा है। सारथी योजना के तहत 6.76 लाख युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है। एआई, ईवी, ड्रोन और सोलर जैसे क्षेत्रों में युवाओं को तैयार किया जा रहा है। 53 हजार महिलाओं को आधुनिक तकनीकी क्षेत्रों में प्रशिक्षित किया गया है।
पंचायत स्तर तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने की तैयारी
उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं को पंचायत स्तर तक पहुंचाने पर जोर दिया। हेमंत सोरेन ने बताया कि राज्य में 1,276 दवा दुकानें ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित हो रही हैं। मेडिकल कॉलेजों में यूजी और पीजी सीट बढ़ाने का प्रस्ताव लंबित है। एआई आधारित डिजिटल हेल्थ प्रोफाइल बनाने की योजना पर भी काम चल रहा है।
खेलों में झारखंड की बढ़ती पहचान
हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड के खिलाड़ी हॉकी, फुटबॉल और एथलेटिक्स में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। राज्य राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहा है। उन्होंने झारखंड में स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की मांग की। खेल संघों में सुधार और पारदर्शिता की जरूरत पर भी जोर दिया।
कृषि और पोषण को विकास से जोड़ा
नीति आयोग की शासी परिषद की 11वीं बैठक में हेमंत सोरेन ने कहा कि राज्य में 10 लाख से अधिक पोषण वाटिकाएं विकसित की गई हैं। 1.5 लाख एकड़ में फलदार पौधरोपण किया गया है। झारखंड का आम अब अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच रहा है। उन्होंने कृषि को कुपोषण से लड़ने के प्रभावी साधन के रूप में प्रस्तुत किया।
डिजिटल गवर्नेंस के जरिए पारदर्शिता पर फोकस
राज्य एआई आधारित सीएम डेटा इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म विकसित कर रहा है। इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर पर भी काम जारी है। डेटा शेयरिंग को समयबद्ध बनाने का आग्रह केंद्र से किया गया। डीबीटी में पारदर्शिता और डिजिटल धोखाधड़ी रोकने पर जोर दिया गया।
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केंद्र सरकार के सामने रखीं अहम मांगें
जल जीवन मिशन की शेष 6,000 करोड़ रुपये की राशि जल्द जारी करने की मांग की गई।
कोयला कंपनियों पर 1.36 लाख करोड़ रुपये के बकाया भुगतान का मुद्दा उठाया गया।
डीएमएफटी के मानकों में संशोधन की आवश्यकता जताई गई।
भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को सरल बनाने का आग्रह किया गया।
स्कूली शिक्षा से संबंधित विभिन्न निधियों और योजनाओं को एकीकृत करने पर बल दिया गया।
पीपीपी मोड में प्रस्तावित 6 नए मेडिकल कॉलेजों में से 4 को स्वीकृति मिल चुकी है, शेष 2 की स्वीकृति भी शीघ्र प्रदान करने की मांग की गई।
झारखंड को राष्ट्रीय, एशियाई और अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं तथा खेल महाकुंभों की मेजबानी का अवसर देने की मांग की गई।
झारखंड के 7 जिले डीवीसी कमांड एरिया तथा 12-13 जिले सीसीएल, ईसीएल एवं अन्य केंद्रीय उपक्रमों के कमांड एरिया में आते हैं। इन क्षेत्रों में सामाजिक आधारभूत संरचना निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण और भूमि स्वामित्व संबंधी अनुमति प्रक्रियाओं में राज्य सरकार को आवश्यक छूट और सरलीकरण प्रदान करने का आग्रह किया गया।