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झारखंड:  उच्च न्यायालय से अभ्यर्थियों को राहत, चार भर्ती परीक्षाएं रद्द करने पर रोक बरकरार

Tue, 15 Sep 2026 04:16 PM IST
राहुल कुमार अमर उजाला, ब्यूरो, रांची।
अमर उजाला, ब्यूरो, रांची। Published by: राहुल कुमार Updated Tue, 15 Sep 2026 04:16 PM IST
सार

झारखंड हाईकोर्ट ने सीजीएल समेत चार प्रतियोगी परीक्षाओं के माध्यम से नियुक्त हुए अभ्यर्थियों को बड़ी राहत दी है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से 18 अगस्त को जारी उस आदेश पर रोक बरकरार रखी है। विस्तार से पढ़ें पूरी खबर...

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Jharkhand: Relief for candidates from High Court; stay on cancellation of four recruitment exams upheld
झारखंड हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य कर्मचारी चयन आयोग की सीजीएल समेत चार प्रतियोगी परीक्षाओं के माध्यम से नियुक्त हुए अभ्यर्थियों को बड़ी राहत प्रदान की है। अदालत ने राज्य सरकार की ओर से 18 अगस्त को जारी उस आदेश पर रोक बरकरार रखी है, जिसके तहत इन नियुक्तियों को रद्द कर दिया गया था। इस अदालती फैसले से परीक्षाओं के आधार पर पद संभाल रहे नवनियुक्त पदाधिकारियों की सेवाएं फिलहाल सुरक्षित रहेंगी। मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर को तय की गई है।

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सीआईडी जांच रिपोर्ट के लिए मिले 48 घंटे
मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय से अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) की जांच रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में पेश करने तथा विस्तृत जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय देने की मांग की। अदालत ने सरकार के अनुरोध को स्वीकार करते हुए 48 घंटे के भीतर विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। इससे पहले उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से सीआईडी की जांच रिपोर्ट तलब की थी, ताकि स्पष्ट हो सके कि किन ठोस तथ्यों और आधारों पर पूरी नियुक्ति प्रक्रिया को रद्द करने जैसा कठोर कदम उठाया गया। अब राज्य सरकार सीआईडी जांच में सामने आए साक्ष्यों तथा अपने निर्णय का पूरा ब्योरा अदालत के समक्ष रखेगी।
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नैसर्गिक न्याय का पालन न होने पर रोक बरकरार
इससे पहले हुई सुनवाई में, न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने राज्य सरकार के उस आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी थी, जिसके कारण नवनियुक्त अधिकारियों को उनके पदों से हटाया जा रहा था। अदालत ने प्रथम दृष्टया टिप्पणी की थी कि राज्य सरकार ने इस कार्रवाई में नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों का समुचित पालन नहीं किया है। इसी आधार पर अदालत ने निर्देश दिया था कि अग्रिम आदेश तक किसी भी नियुक्त अभ्यर्थी को पद से न हटाया जाए। साथ ही, अदालत ने सरकार से यह भी प्रश्न किया था कि सीआईडी की अब तक की जांच में ऐसा कौन सा नया तथ्य आया है, जिसके कारण इतना बड़ा फैसला लेना पड़ा।
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चार भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला
राज्य सरकार द्वारा नियुक्तियां रद्द किए जाने के फैसले के विरुद्ध अभ्यर्थियों ने उच्च न्यायालय में याचिकाएं दायर की थीं। इन याचिकाओं में उस सरकारी अधिसूचना को निरस्त करने की गुहार लगाई गई है, जिसके जरिये झारखंड लोक सेवा आयोग की ग्यारहवीं से तेरहवीं सिविल सेवा परीक्षा, खाद्य सुरक्षा अधिकारी भर्ती, बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) परीक्षा और जेएसएससी सीजीएल परीक्षा को रद्द किया गया था। सरकार ने उन सभी परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया था, जिनमें टीडीपीएल कंपनी की भूमिका सामने आई थी। चूंकि इन सभी परीक्षाओं के सफल अभ्यर्थी पदों पर योगदान दे चुके थे, इसलिए उन्होंने न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया।


 

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