फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jharkhand ›   Four generations of hard work gain national recognition; Mandar artisans honored.

झारखंड: चार पीढ़ियों से बन रहे जरजट्टा के मांदर को मिला जीआई टैग, गुमला के कारीगरों की बढ़ी पहचान

Wed, 30 Sep 2026 06:27 PM IST
राँची ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: राँची ब्यूरो Updated Wed, 30 Sep 2026 06:27 PM IST
सार

गुमला के रायडीह प्रखंड स्थित जरजट्टा गांव के पारंपरिक मांदर को 28 सितंबर 2026 को जीआई पंजीकरण मिला। चार पीढ़ियों से मांदर बनाने वाले करीब 25 कारीगर परिवारों को इससे राष्ट्रीय पहचान, बाजार विस्तार और आजीविका के नए अवसर मिलने की उम्मीद है।

विज्ञापन
Four generations of hard work gain national recognition; Mandar artisans honored.
सम्मानित होने के बाद लोगो के बीच कलाकार

विस्तार

झारखंड की आदिवासी संस्कृति में मांदर का विशेष महत्व है। सरहुल, करमा और सोहराय जैसे पर्वों से लेकर लोकनृत्य और पारंपरिक संगीत तक, मांदर की थाप झारखंड की सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा रही है। अब गुमला जिले के रायडीह प्रखंड के जरजट्टा गांव में चार पीढ़ियों से चली आ रही मांदर निर्माण की परंपरा को राष्ट्रीय पहचान मिली है। पारंपरिक मांदर को भारत सरकार से भौगोलिक संकेतक (जीआई) पंजीकरण मिलने के बाद बुधवार को सम्मान समारोह आयोजित किया गया।

विज्ञापन

समारोह में उपायुक्त दिलेश्वर महतो और उप विकास आयुक्त अनिमेश रंजन ने मांदर कारीगरों और मांदर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के पदाधिकारियों को प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया। उपायुक्त ने कहा कि मांदर को जीआई पंजीकरण मिलना केवल गुमला ही नहीं, बल्कि पूरे झारखंड के लिए गौरव की बात है। इससे देश-दुनिया में मांदर के साथ जरजट्टा गांव और यहां के कारीगरों की पहचान भी मजबूत होगी।

विज्ञापन


पढे़ं:  बड़गाईं जमीन केस में सीएम हेमंत सोरेन पर आरोप तय, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से अदालत में हुए पेश

विज्ञापन
विज्ञापन

उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन मांदर के उत्पादन, ब्रांडिंग, विपणन और बाजार उपलब्धता को बढ़ाने की दिशा में काम करेगा, ताकि इसका सीधा लाभ कारीगरों की आय और आजीविका को मिल सके। डीडीसी अनिमेश रंजन ने कहा कि जीआई पंजीकरण से आने वाले वर्षों में मांदर की मांग बढ़ने और नए कारीगरों के इस पारंपरिक व्यवसाय से जुड़ने की संभावनाएं हैं। इससे कारीगरों की आय में भी वृद्धि हो सकती है।

उद्यमी समन्वयक सूरज कुमार ने बताया कि मांदर को जीआई पहचान दिलाने की प्रक्रिया वर्ष 2020 के आसपास शुरू हुई थी। वर्ष 2021 में मुख्यमंत्री लघु एवं कुटीर उद्यम विकास बोर्ड की ओर से इसके लिए आवेदन किया गया। तत्कालीन उपायुक्त सुशांत गौरव और बाद में उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी के कार्यकाल में दस्तावेजी और तकनीकी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया। इसके बाद 28 सितंबर 2026 को जरजट्टा के पारंपरिक मांदर को जीआई पंजीकरण प्राप्त हुआ।

जरजट्टा गांव में करीब 25 कारीगर परिवार मांदर निर्माण से जुड़े हैं। यह पारंपरिक कला चार पीढ़ियों से परिवारों में चली आ रही है। समारोह में मांदर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के निदेशकों समेत कई कारीगरों को सम्मानित किया गया। जीआई पहचान मिलने से मांदर को संरक्षण, ब्रांडिंग और बाजार विस्तार का लाभ मिलने के साथ ही कारीगरों के लिए रोजगार और आजीविका के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed