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झारखंड: 68 साल की उम्र में फिर बने विद्यार्थी, कोल इंडिया के पूर्व महाप्रबंधक अब पढ़ेंगे मनोविज्ञान

Mon, 19 Oct 2026 03:17 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: शबाहत हुसैन Updated Mon, 19 Oct 2026 03:17 PM IST
सार

कोल इंडिया के पूर्व महाप्रबंधक 68 वर्षीय डॉ. अशोक कुमार ने रांची विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर मनोविज्ञान विभाग में नामांकन लिया है। इंजीनियरिंग में बीटेक, एमटेक और पीएचडी कर चुके डॉ. कुमार अब मानवीय व्यवहार को समझना चाहते हैं।

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Jharkhand: Becoming a student again at 68, former Coal India General Manager will now study psychology
रांची विश्वविद्यालय - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कोल इंडिया के पूर्व महाप्रबंधक 68 वर्षीय डॉ. अशोक कुमार ने जीवन के इस पड़ाव पर नई पढ़ाई की शुरुआत करते हुए रांची विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर मनोविज्ञान विभाग में छात्र के रूप में नामांकन लिया है। उच्च शैक्षणिक योग्यताओं और लंबी व्यावसायिक सफलता के बाद भी सीखने की प्रबल इच्छा के कारण उन्होंने पुनः विश्वविद्यालय की चौखट पर कदम रखा है।

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तकनीकी शिक्षा से कॅरिअर का सफर
डॉ. अशोक कुमार ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एनआईटी) जयपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक की उपाधि प्राप्त की थी। इसके उपरांत उन्होंने इंडियन स्कूल ऑफ माइंस (आईएसएम) धनबाद से इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग एंड मैनेजमेंट में एमटेक किया और बाद में इंजीनियरिंग विषय में ही पीएचडी की उपाधि भी अर्जित की। अपनी लंबी प्रशासनिक एवं तकनीकी सेवा के दौरान उन्होंने विभिन्न महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन किया। वह 30 सितंबर 2018 को 60 वर्ष की आयु में कोल इंडिया लिमिटेड से महाप्रबंधक (ई एंड एम) के पद से सेवानिवृत्त हुए थे।
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दूसरी सेवानिवृत्ति के बाद नई राह
पहला सेवाकाल पूरा होने के बाद भी उनका कार्य करने का उत्साह समाप्त नहीं हुआ। वह जयप्रकाश (जेपी) समूह में उपाध्यक्ष के पद पर सम्मिलित हुए और वहां सलाहकार के रूप में अपनी सेवाएं दीं। वहां कार्य करते हुए वह 23 अक्तूबर 2025 को दूसरी बार सेवानिवृत्त हुए। लगातार दो सफल कॅरिअर पूरे करने के बाद आम तौर पर लोग विश्राम को प्राथमिकता देते हैं, परंतु डॉ. अशोक कुमार ने मन की कार्यप्रणाली और मानवीय व्यवहार को समझने की अपनी पुरानी जिज्ञासा को पूरा करने का निर्णय लिया। उनके अनुसार इंजीनियरिंग ने उन्हें मशीनों की बनावट और कार्यप्रणाली को समझना सिखाया था, जबकि अब वह मनोविज्ञान के माध्यम से मनुष्य के व्यवहार को समझना चाहते हैं। उनका मानना है कि सीखना कभी समाप्त नहीं होता और केवल उपाधि के स्थान पर जिज्ञासा के लिए पढ़ना ही वास्तविक शिक्षा है।
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नियमित कक्षाओं में जिज्ञासा और संवाद
वर्तमान में डॉ. अशोक कुमार सामान्य विद्यार्थी की तरह प्रतिदिन विश्वविद्यालय जाकर कक्षाओं में उपस्थित होते हैं। विषय को गहराई से समझने के लिए वह विभागाध्यक्ष और अन्य अध्यापकों से लगातार प्रश्न पूछते हैं। मनोविज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. परवेज हसन ने बताया कि अपने जीवन में सब कुछ प्राप्त कर चुके किसी व्यक्ति में सीखने के प्रति ऐसी लगन देखना एक अनोखा अनुभव है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में ऐसे बहुत कम विद्यार्थी देखने को मिलते हैं, जिनके भीतर ज्ञान प्राप्त करने की ऐसी स्वाभाविक जिज्ञासा जीवित रहती है।

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