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झारखंड: ग्राम सभा की पहल से रुका बाल विवाह, अलग रहकर पढ़ाई करेंगे छात्र-छात्रा
Tue, 03 Nov 2026 08:04 PM IST
प्रतीक कुमार पाण्डेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: प्रतीक कुमार पाण्डेय
Updated Tue, 03 Nov 2026 08:04 PM IST
सार
पश्चिमी सिंहभूम के मझगांव प्रखंड में सामाजिक संस्था, पंचायत प्रतिनिधियों और बाल अधिकार सुरक्षा मंच की पहल पर दसवीं कक्षा के दो नाबालिग विद्यार्थियों का बाल विवाह रुकवाया गया। दोनों के परिवारों को कानूनी प्रावधान समझाए गए। ग्राम सभा में तय हुआ कि 18 वर्ष की आयु पूरी होने तक दोनों अलग रहकर अपनी पढ़ाई जारी रखेंगे।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पश्चिमी सिंहभूम जिले के मझगांव प्रखंड स्थित घोड़ाबंधा गांव में मंगलवार को सामाजिक संस्था, पंचायत प्रतिनिधियों और बाल अधिकार सुरक्षा मंच की पहल से दो नाबालिग विद्यार्थियों का बाल विवाह समय रहते रोक लिया गया। प्रेम प्रसंग में पड़कर दसवीं कक्षा के छात्र और छात्रा ने विवाह कर लिया था और वे साथ रहने लगे थे। सूचना मिलते ही अधिकारियों और प्रतिनिधियों ने दोनों परिवारों को समझा-बुझाकर 18 वर्ष की आयु पूरी होने तक दोनों को अलग रहकर पढ़ाई जारी रखने पर सहमत कराया।
ग्राम सभा में समझाए कानूनी प्रावधान
घोड़ाबंधा पंचायत के घोड़ाबंधा गांव निवासी नाबालिग छात्र और खड़पोस पंचायत के पोंडुवाबुरू गांव की नाबालिग छात्रा अपनी-अपनी पंचायत के विद्यालयों में दसवीं कक्षा के विद्यार्थी हैं। दोनों के विवाह कर एक ही घर में रहने की जानकारी मिलने पर बाल अधिकार सुरक्षा मंच, प्रखंड विकास पदाधिकारी तथा एस्पायर संस्था के सदस्यों ने त्वरित तत्परता दिखाई। प्रतिनिधियों ने लड़के के घर पहुंचकर दोनों पक्षों के स्वजनों को एक साथ बैठाया।
इसके बाद स्थानीय ग्रामीण मुंडा सोनाराम हेंब्रम की अध्यक्षता में विशेष ग्राम सभा आयोजित की गई। बैठक में दोनों परिवारों को बाल विवाह के गंभीर दुष्परिणामों और संबंधित कानूनी प्रावधानों के विषय में विस्तार से समझाया गया। वक्ताओं ने बताया कि 18 वर्ष से कम आयु में विवाह करना और कराना कानूनन अपराध है, जिससे बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
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आयु सीमा तक अलग रहकर करेंगे पढ़ाई
समझाने के बाद दोनों परिवारों ने ग्राम सभा के निर्णय को स्वीकार कर लिया। सभा में सर्वसम्मति से तय हुआ कि 18 वर्ष की उम्र पूरी होने तक दोनों विद्यार्थी एक-दूसरे से दूर रहेंगे तथा अपनी-अपनी पढ़ाई जारी रखेंगे। इस दौरान दोनों परिवार बच्चों पर किसी प्रकार का दबाव नहीं डालेंगे और उनकी शिक्षा में कोई बाधा उत्पन्न नहीं होने देंगे। इसके अतिरिक्त पंचायत स्तर पर बाल विवाह के मामलों पर कड़ी निगरानी रखने का निर्णय लिया गया।
भविष्य में इस तरह का मामला सामने आने पर तुरंत बाल अधिकार सुरक्षा मंच, पंचायत और प्रशासन को सूचित करने का नियम बनाया गया। गांव के निवासियों ने अपने क्षेत्र को पूरी तरह बाल विवाह मुक्त बनाने का संकल्प भी दोहराया। इस बाल विवाह को रोकने की मुहिम में मझगांव प्रखंड बाल अधिकार सुरक्षा मंच के अध्यक्ष मनोज हेंब्रम, घोड़ाबंधा पंचायत के मुखिया विवेकानंद पूर्ति और खड़पोस पंचायत के मुखिया प्रताप चातार उपस्थित थे।
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ग्राम सभा में समझाए कानूनी प्रावधान
घोड़ाबंधा पंचायत के घोड़ाबंधा गांव निवासी नाबालिग छात्र और खड़पोस पंचायत के पोंडुवाबुरू गांव की नाबालिग छात्रा अपनी-अपनी पंचायत के विद्यालयों में दसवीं कक्षा के विद्यार्थी हैं। दोनों के विवाह कर एक ही घर में रहने की जानकारी मिलने पर बाल अधिकार सुरक्षा मंच, प्रखंड विकास पदाधिकारी तथा एस्पायर संस्था के सदस्यों ने त्वरित तत्परता दिखाई। प्रतिनिधियों ने लड़के के घर पहुंचकर दोनों पक्षों के स्वजनों को एक साथ बैठाया।
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इसके बाद स्थानीय ग्रामीण मुंडा सोनाराम हेंब्रम की अध्यक्षता में विशेष ग्राम सभा आयोजित की गई। बैठक में दोनों परिवारों को बाल विवाह के गंभीर दुष्परिणामों और संबंधित कानूनी प्रावधानों के विषय में विस्तार से समझाया गया। वक्ताओं ने बताया कि 18 वर्ष से कम आयु में विवाह करना और कराना कानूनन अपराध है, जिससे बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
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आयु सीमा तक अलग रहकर करेंगे पढ़ाई
समझाने के बाद दोनों परिवारों ने ग्राम सभा के निर्णय को स्वीकार कर लिया। सभा में सर्वसम्मति से तय हुआ कि 18 वर्ष की उम्र पूरी होने तक दोनों विद्यार्थी एक-दूसरे से दूर रहेंगे तथा अपनी-अपनी पढ़ाई जारी रखेंगे। इस दौरान दोनों परिवार बच्चों पर किसी प्रकार का दबाव नहीं डालेंगे और उनकी शिक्षा में कोई बाधा उत्पन्न नहीं होने देंगे। इसके अतिरिक्त पंचायत स्तर पर बाल विवाह के मामलों पर कड़ी निगरानी रखने का निर्णय लिया गया।
भविष्य में इस तरह का मामला सामने आने पर तुरंत बाल अधिकार सुरक्षा मंच, पंचायत और प्रशासन को सूचित करने का नियम बनाया गया। गांव के निवासियों ने अपने क्षेत्र को पूरी तरह बाल विवाह मुक्त बनाने का संकल्प भी दोहराया। इस बाल विवाह को रोकने की मुहिम में मझगांव प्रखंड बाल अधिकार सुरक्षा मंच के अध्यक्ष मनोज हेंब्रम, घोड़ाबंधा पंचायत के मुखिया विवेकानंद पूर्ति और खड़पोस पंचायत के मुखिया प्रताप चातार उपस्थित थे।