फिटनेस पर प्रेरणादायक हिंदी कविता
स्वास्थ्य ही सबसे बड़ा धन है,
यही जीवन का असली रतन है।
ना सोना-चांदी, ना महल-दुकान,
तंदुरुस्ती से ही बनती पहचान।
सुबह की दौड़, हल्की कसरत,
देती तन को नई ताकत।
पसीना बह...और पढ़ें
शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत द्वारा आयोजित देहरादून में चल रहा दून पुस्तक महोत्सव 2026 एक सशक्त मंच बन रहा है, जो पाठकों, विचारकों और कथाकारों को एक साथ लाकर विविध विषयों पर विचारों के समृद्ध आदान-प्रदान का अवसर उपलब्ध करव...और पढ़ें
मुस्कुरा दो, कि अँधेरे की ये रात लम्बी है
मुस्कुरा दो, कि फिर ये दिन निकल आये
मुस्कुरा दो, कि गुलों का रंग फीका है
मुस्कुरा दो, कि गुलशन में फिर बहार आये
मुस्कुरा दो, कि वक़्त जैसे थम-सा गया है
मुस्कुरा दो, कि हर...और पढ़ें
नवीन भारत में संप्रभुता हम लाएंगे,
गणतंत्र है हम, स्वतंत्र हम कहलाएंगे।
अनेकता में एकता के शब्दों की धारा से
पिरोकर अपने नवीन विचार से समानता की मोहब्बत को उजागर करेंगे।
देशभक्ति में शालीन प्रभाव हमारा है,
स्वभाव हम...और पढ़ें
जिम के ये मानव परिंदे हैं, जिम करते वक्त होते अचानक ही क्यों शर्मिंदा है?
प्रोटीन तंत्र से अपने जीवन का मंत्र बनाया।
आर्थिक पहलू को शारीरिक एवं मानसिक सुंदरता पाने हेतु जीवन का आधार मूल प्रेरणादायक परिपूर्ण बनाया।
जिम का बाजार खो...और पढ़ें
खुशी के पल दो ही सही बचाकर इनको रखना नही
बांट देना पल वो सभी जिनके पास कुछ भी नही
जितना हमे मिला है वो क्या कम है सोचो अभी
कल क्या हो क्या नही इसकी चिंता करो न अभी
खुशी के पल दो ही सही..........
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उठे जो कदम मंजिल की ओर, तो राह में आए कांटे
और टूटने वाले लगाव नहीं देखे जाते।
जब उतर चुके हो मैदान-ए-जंग में युद्ध के लिए
तो इसमें लगने वाले घाव नहीं देखे जाते।
मत बंधे रहो, किसी जंजीरों में,
कुछ नहीं रखा क...और पढ़ें
'बंदे मातरम्' राष्ट्रीय गीत
'चटर्जी बंकीम चन्द्र' रचित
हुए रचना के पूरे, १५० वर्ष
स्मरणोत्सव मना रहा भारतवर्ष।
संविधान सभा से हो स्वीकृत
सन् '५० में बना राष्ट्रीय गीत
राष्ट्रीय स...और पढ़ें
अकेला शब्द अधूरा अधूरा
तन्हा तन्हा लगता है
शब्द मिलकर सफर करते अच्छे लगते हैं
कभी छोटा सा वाक्य का सफर
कभी बहुत अलग सुर ताल के इकठ्ठा हो
एक लम्बे लेख का सफर
कभी कुछ कठोर कुछ निर्मल कुछ कोमल
अलग अलग रस...और पढ़ें
इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में रविवार को 'मेरा रंग फाउंडेशन' के नवें वार्षिकोत्सव पर आयोजित संगोष्ठी ‘जब स्त्री बोलती है’ में महिला सशक्तिकरण के कई संवेदनशील पहलुओं पर गंभीर चर्चा हुई। राजनीति में ट्रोलिंग से लेकर घरेलू हिंसा, एसिड सर्वाइवर्स की...और पढ़ें