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                                                                           मुस्कुरा दो, कि अँधेरे की ये रात लम्बी है 
मुस्कुरा दो, कि फिर ये दिन निकल आये
मुस्कुरा दो, कि गुलों का रंग फीका है 
मुस्कुरा दो, कि गुलशन में फिर बहार आये
मुस्कुरा दो, कि वक़्त जैसे थम-सा गया है
मुस्कुरा दो, कि हर...और पढ़ें
2 weeks ago
                                                                           नवीन भारत में संप्रभुता हम लाएंगे,
गणतंत्र है हम, स्वतंत्र हम कहलाएंगे।
अनेकता में एकता के शब्दों की धारा से
पिरोकर अपने नवीन विचार से समानता की मोहब्बत को उजागर करेंगे।
देशभक्ति में शालीन प्रभाव हमारा है,
स्वभाव हम...और पढ़ें
1 month ago
                                                                           जिम के ये मानव परिंदे हैं, जिम करते वक्त होते अचानक ही क्यों शर्मिंदा है?
प्रोटीन तंत्र से अपने जीवन का मंत्र बनाया।
आर्थिक पहलू को शारीरिक एवं मानसिक सुंदरता पाने हेतु जीवन का आधार मूल प्रेरणादायक परिपूर्ण बनाया।
जिम का बाजार खो...और पढ़ें
1 month ago
                                                                           खुशी के पल दो ही सही बचाकर इनको रखना नही
बांट देना पल वो सभी जिनके पास कुछ भी नही

जितना हमे मिला है वो क्या कम है सोचो अभी
कल क्या हो क्या नही इसकी चिंता करो न अभी

खुशी के पल दो ही सही..........
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2 months ago
                                                                           उठे जो कदम मंजिल की ओर, तो राह में आए कांटे
और टूटने वाले लगाव नहीं देखे जाते।
जब उतर चुके हो मैदान-ए-जंग में युद्ध के लिए
तो इसमें लगने वाले घाव नहीं देखे जाते।

मत बंधे रहो, किसी जंजीरों में,
कुछ नहीं रखा क...और पढ़ें
4 months ago
                                                                           'बंदे मातरम्'   राष्ट्रीय गीत
'चटर्जी बंकीम चन्द्र' रचित
हुए रचना के पूरे, १५० वर्ष
स्मरणोत्सव मना रहा भारतवर्ष।

संविधान सभा से हो स्वीकृत
सन् '५० में बना राष्ट्रीय गीत
राष्ट्रीय स...और पढ़ें
4 months ago
                                                                           अकेला शब्द अधूरा अधूरा
तन्हा तन्हा लगता है
शब्द मिलकर सफर करते अच्छे लगते हैं
कभी छोटा सा वाक्य का सफर
कभी बहुत अलग सुर ताल के इकठ्ठा हो
एक लम्बे लेख का सफर
कभी कुछ कठोर कुछ निर्मल कुछ कोमल
अलग अलग रस...और पढ़ें
4 months ago
                                                                            इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में रविवार को 'मेरा रंग फाउंडेशन' के नवें वार्षिकोत्सव पर आयोजित संगोष्ठी ‘जब स्त्री बोलती है’ में महिला सशक्तिकरण के कई संवेदनशील पहलुओं पर गंभीर चर्चा हुई। राजनीति में ट्रोलिंग से लेकर घरेलू हिंसा, एसिड सर्वाइवर्स की...और पढ़ें
                                                
5 months ago
                                                                           घाट-घाट में घुट-घुट का अपमान पिया,
घाट-घाट में घुट-घुट अपमान सहा जिया।
परंतु दिल टूटा है आज मेरा तूने
जीवन यात्रा संघर्ष सवेरे कष्ट में
वास्तविक प्रवाहमय शाब्दिक तौर पर लड़ना बता दिया
भूखे धोखे के घाव अपमान मार्मिक...और पढ़ें
5 months ago
                                                                           भारती कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय ने सांस्कृतिक परिषद, दिल्ली विश्वविद्यालय के सहयोग से 29 और 30 सितंबर, 2025 को अंतर-महाविद्यालय ललित कला प्रतियोगिता का सफल आयोजन किया। यह आयोजन कॉलेज परिसर में आयोजित किया गया और इसका मार्गदर्शन सांस्कृतिक परिषद के...और पढ़ें
                                                
5 months ago
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