साक्षरता दिवस: 8 सितंबर को ही क्यों मनाया जाता है अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस? जानिए पूरी कहानी
International Literacy Day 2026: UNESCO ने 1966 में 8 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के रूप में घोषित किया था। इसके पीछे उद्देश्य दुनिया का ध्यान साक्षरता से जुड़े मुद्दों की ओर आकर्षित करना और इसे मानव अधिकार तथा विकास के महत्वपूर्ण आधार के रूप में बढ़ावा देना था।
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Literacy Day 2026: हर साल 8 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया जाता है। यह दिन दुनिया को शिक्षा और साक्षरता के महत्व के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से मनाया जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इसके लिए 8 सितंबर की तारीख ही क्यों चुनी गई? दरअसल, इस दिन के पीछे शिक्षा को लेकर वैश्विक स्तर पर शुरू हुई एक महत्वपूर्ण पहल की कहानी जुड़ी हुई है।
साक्षरता केवल पढ़ने और लिखने की क्षमता तक सीमित नहीं है। यह व्यक्ति को अपने अधिकारों को समझने, सही निर्णय लेने, रोजगार के अवसर हासिल करने और समाज में सक्रिय भूमिका निभाने में सक्षम बनाती है। इसी महत्व को देखते हुए हर साल अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के माध्यम से दुनिया भर में शिक्षा और साक्षरता को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाता है।
UNESCO ने 1966 में 8 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के रूप में घोषित किया था। इसके पीछे उद्देश्य दुनिया का ध्यान साक्षरता से जुड़े मुद्दों की ओर आकर्षित करना और इसे मानव अधिकार तथा विकास के महत्वपूर्ण आधार के रूप में बढ़ावा देना था। तब से हर वर्ष 8 सितंबर को यह दिवस मनाया जाता है और अलग-अलग विषयों के माध्यम से साक्षरता की बदलती जरूरतों पर चर्चा की जाती है।
8 सितंबर को ही क्यों मनाया जाता है अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस?
अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस की शुरुआत की पृष्ठभूमि 1965 में तेहरान में आयोजित वर्ल्ड कॉन्फ्रेंस ऑफ मिनिस्टर्स ऑफ एजुकेशन आन द इरेडिकेशन ऑफ इलिट्रेसी से जुड़ी है। इस सम्मेलन में निरक्षरता को खत्म करने और दुनिया भर में साक्षरता को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया था।
इसके बाद UNESCO ने 17 नवंबर 1966 को 8 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस घोषित किया। पहली बार यह दिवस 1967 में मनाया गया। 8 सितंबर का चयन उसी वैश्विक शिक्षा पहल और तेहरान सम्मेलन की स्मृति से जुड़ा माना जाता है।
इस दिवस का उद्देश्य सिर्फ लोगों को पढ़ना-लिखना सिखाना नहीं, बल्कि साक्षरता के व्यापक सामाजिक, आर्थिक और मानवीय महत्व को सामने लाना भी है। शिक्षा के माध्यम से व्यक्ति बेहतर रोजगार, स्वास्थ्य, आर्थिक अवसर और सामाजिक भागीदारी हासिल कर सकता है।
आज के डिजिटल दौर में साक्षरता का अर्थ भी लगातार व्यापक हो रहा है। पारंपरिक पढ़ने-लिखने के साथ डिजिटल साक्षरता, सूचना साक्षरता और तकनीकी समझ भी महत्वपूर्ण हो गई है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस आज भी दुनिया के लिए उतना ही प्रासंगिक है।
अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस का महत्व
साक्षरता किसी भी समाज के विकास की बुनियाद मानी जाती है। जब लोग पढ़ने और लिखने में सक्षम होते हैं, तो वे सरकारी योजनाओं, स्वास्थ्य संबंधी जानकारी, रोजगार के अवसरों और अपने अधिकारों को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं।
यह दिवस सरकारों, शैक्षणिक संस्थानों और सामाजिक संगठनों को उन लोगों तक शिक्षा पहुंचाने के प्रयासों को मजबूत करने का अवसर भी देता है, जो अभी तक शिक्षा से वंचित हैं।