धनतेरस पूजा: भगवान धन्वंतरि या कुबेर, किसकी मूर्ति खरीदना है शुभ? जानिए सही जवाब
Dhanteras 2026: धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि और कुबेर दोनों का अपना अलग महत्व है। जहां धन्वंतरि स्वास्थ्य और निरोगी जीवन की कामना से जुड़े हैं, वहीं कुबेर धन और समृद्धि के प्रतीक माने जाते हैं। इसलिए इस त्योहार पर मूर्ति खरीदते समय केवल परंपरा ही नहीं, बल्कि अपनी श्रद्धा और सुविधा को भी महत्व दें।
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Dhanteras 2026 Dhanvantari or Kuber Idol: धनतेरस का त्योहार आते ही बाजारों में देवी-देवताओं की मूर्तियों से लेकर सोने-चांदी के सिक्कों और पूजा सामग्री की खरीदारी शुरू हो जाती है। इस दौरान लोगों के मन में एक सवाल अक्सर आता है कि धनतेरस की पूजा के लिए भगवान धन्वंतरि की मूर्ति खरीदनी चाहिए या फिर धन के देवता माने जाने वाले कुबेर की? आखिर दोनों में से किसकी मूर्ति घर लाना ज्यादा शुभ माना जाता है और दोनों की पूजा का क्या महत्व है?
दरअसल, भगवान धन्वंतरि और कुबेर दोनों का धनतेरस से खास संबंध माना जाता है, लेकिन दोनों का महत्व अलग-अलग है। भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद और स्वास्थ्य का देवता माना जाता है, जबकि भगवान कुबेर को धन और संपत्ति का संरक्षक कहा जाता है। यही वजह है कि धनतेरस पर इन दोनों की पूजा का विशेष महत्व बताया जाता है।
अगर आप भी इस बार धनतेरस पर भगवान की कोई नई मूर्ति खरीदने की सोच रहे हैं तो पहले दोनों के महत्व को समझ लेना जरूरी है। इससे आप अपनी जरूरत, पारिवारिक परंपरा और पूजा की व्यवस्था के अनुसार सही चुनाव कर सकेंगे। खास बात यह है कि धार्मिक मान्यताओं में किसी एक को चुनना अनिवार्य नहीं माना जाता। कई परिवार दोनों की पूजा करते हैं।
1. भगवान धन्वंतरि की मूर्ति क्यों खरीदते हैं?
भगवान धन्वंतरि को हिंदू मान्यताओं में आयुर्वेद और चिकित्सा का देवता माना जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान वे अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसी कारण धनतेरस को धन्वंतरि जयंती या धनत्रयोदशी भी कहा जाता है।
भगवान धन्वंतरि की पूजा मुख्य रूप से अच्छे स्वास्थ्य, निरोगी जीवन और परिवार की खुशहाली की कामना के लिए की जाती है। जो लोग स्वास्थ्य को सबसे बड़ी संपत्ति मानते हैं, वे उनकी पूजा को विशेष महत्व देते हैं।
2. भगवान कुबेर की मूर्ति का क्या है महत्व?
भगवान कुबेर को धन का देवता और देवताओं के कोषाध्यक्ष के रूप में जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वे धन-संपत्ति और वैभव के संरक्षक हैं।
धनतेरस पर कुबेर की पूजा करने की परंपरा घर में आर्थिक स्थिरता, समृद्धि और सुख-शांति की कामना से जुड़ी है। कई व्यापारी और कारोबारी इस दिन अपनी तिजोरी, धन और व्यापार से जुड़ी चीजों के साथ कुबेर की पूजा करते हैं।
3. धन्वंतरि और कुबेर में क्या है अंतर?
दोनों देवताओं की पूजा का उद्देश्य अलग-अलग मान्यताओं से जुड़ा है। भगवान धन्वंतरि स्वास्थ्य, आयुर्वेद और निरोगी जीवन के प्रतीक हैं, जबकि भगवान कुबेर धन, संपत्ति और आर्थिक समृद्धि के प्रतीक माने जाते हैं।
इसलिए दोनों की पूजा को एक-दूसरे का विकल्प समझने के बजाय अलग-अलग महत्व वाली परंपराओं के रूप में देखना चाहिए।
4. धनतेरस पर किसकी मूर्ति खरीदना ज्यादा शुभ है?
अगर आप धनतेरस पर मूर्ति खरीदना चाहते हैं तो अपनी आस्था और पारिवारिक परंपरा के अनुसार भगवान धन्वंतरि या कुबेर में से किसी की भी मूर्ति ला सकते हैं। बेहतर यह भी है कि पूजा की व्यवस्था के अनुसार दोनों की तस्वीर या मूर्ति रखकर पूजा की जाए।
हालांकि, किसी विशेष मूर्ति को खरीदना अनिवार्य नहीं है। आप तस्वीर के माध्यम से भी श्रद्धापूर्वक पूजा कर सकते हैं।
5. मूर्ति खरीदते समय किन बातों का रखें ध्यान?
मूर्ति खरीदते समय उसकी बनावट, साफ-सफाई और गुणवत्ता का ध्यान रखें। ऐसी मूर्ति चुनें जिसे घर के पूजा स्थल पर आसानी से रखा जा सके। केवल महंगी मूर्ति खरीदना जरूरी नहीं है। अपनी क्षमता और पसंद के अनुसार खरीदारी करें।