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पेरेंटिंग टिप्स: बच्चा अंधेरे कमरे में जाने से डरता है? अभिभावक की ये गलतियां बढ़ा सकती हैं उसका डर

Tue, 22 Sep 2026 04:44 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवानी अवस्थी Updated Tue, 22 Sep 2026 04:44 PM IST
सार

Parenting Tips: बच्चों का अंधेरे से डरना स्वाभाविक है, लेकिन जब यह डर आदत में बदलने लगे तो माता-पिता को सचेत हो जाना चाहिए।

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Why Do Kids Fear Darkness? Causes, Symptoms and Parenting Tips for Parents
अंधेरे से डरता है बच्चा, क्या करें माता पिता - फोटो : AI

विस्तार

विनीता

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आजकल अधिकतर माता-पिता इस बात की शिकायत करते हैं कि उनका बच्चा अकेले अंधेरे कमरे में जाने से घबराता है। अगर आपका बच्चा भी अंधेरे से घबराता है तो इसे अनदेखा न करें। विशेषज्ञ कहते हैं, अगर आपने इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया तो बच्चे की नींद, एकाग्रता और आत्मविश्वास पर नकारात्मक असर हो सकता है।

मनोविज्ञान में ‘निक्टोफोबिया’

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, अंधेरे से डर लगना एक सामान्य बात है, खासकर छोटे बच्चों में। वे इस डर को ‘निक्टोफोबिया’ कहते हैं। इसमें बच्चे या वयस्क को अंधेरे में अकेले रहने या कुछ अनजान होने का डर महसूस होता है। कई बच्चों में यह डर सामान्य से कहीं अधिक होता है, जो चिंताजनक है और नींद में बाधा डालकर दैनिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है।

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क्यों होता है ऐसा?

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, दो से छह वर्ष की आयु में बच्चों की कल्पनाशक्ति तेजी से विकसित होती है। इस उम्र में वे वास्तविकता और कल्पना के बीच का अंतर पूरी तरह नहीं समझ पाते। इसलिए अंधेरे में दिखाई देने वाली परछाई भी उन्हें किसी डरावने राक्षस जैसी लग सकती है।

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इसका एक कारण यह भी है कि विकास-क्रम के दौरान मनुष्य में अंधेरे के प्रति स्वाभाविक सतर्कता विकसित हुई है। कई बार माता-पिता बच्चों से अपनी बात मनवाने के लिए भूत-प्रेत या राक्षस जैसी काल्पनिक बातें कहते हैं, जिससे उनके मन में स्थायी डर बैठ जाता है।

इसके अलावा डरावनी फिल्में, मोबाइल गेम्स, परिवार का तनावपूर्ण माहौल, किसी दुर्घटना का अनुभव तथा जन्मजात अधिक संवेदनशील स्वभाव भी बच्चों में अंधेरे का डर पैदा करते हैं। ऐसे में जरूरी है कि आप सही कारणों को समझकर समय रहते बच्चों का भय दूर करने पर ध्यान दें।

कैसे करें बचाव?

बच्चों को झूठ बोलकर बहलाना आपकी सबसे बड़ी गलती है। आपको उन्हें डराना नहीं है, बल्कि हिम्मत के साथ डर का सामना करना सिखाना है। उन्हें समझाएं कि अंधेरा सामान्य है और आप उनके साथ हैं।

साथ ही अचानक अंधेरे के डर को खत्म करने की कोशिश करने के बजाय उनके पहले हल्की रोशनी में उनके साथ खेलें, फिर धीरे-धीरे अंधेरे डर को खत्म करने का प्रयास करें। अच्छा स्लीप रूटीन अपनाएं, सोने से पहले कुछ अच्छी कहानियां सुनाएं और दिन में आउटडोर खेल खिलाएं। यदि बच्चा कुछ देर बिना डरे अंधेरे में रह ले तो उसकी प्रशंसा करना न भूलें।


खेलों में अंधेरे की गतिविधियां

क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. आरती आनंद बताती हैं, अगर आपके बच्चे को अंधेरे से डर लगता है, तो जल्दबाजी न करें। धैर्य से उसे समझाएं और पहले खुद अंधेरे कमरे में जाकर उसे सुरक्षा का अहसास दिलाएं। सजा के रूप में कभी अंधेरे कमरे में न भेजें, इससे डर बढ़ सकता है। सोते समय कमरे में हल्की रोशनी रखें। रोज खेल-खेल में उसे थोड़ी देर अंधेरे कमरे में रहने के लिए प्रेरित करें और बाहर आकर उसके प्रयास की प्रशंसा करें। इससे उसका आत्मविश्वास बढ़ेगा और अंधेरे का डर धीरे-धीरे कम होगा।

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