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Shaheed Diwas: शहीद दिवस पर दिल्ली की वो जगहें, जहां आज भी गूंजती है भगत सिंह की क्रांति

लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला Published by: Shivani Awasthi Updated Mon, 23 Mar 2026 12:34 PM IST
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सार

Bhagat Singh Death Anniversary: दिल्ली में भगत सिंह से जुड़ी प्रमुख जगहों में फिरोज शाह कोटला किला, केंद्रीय विधान सभा, कश्मीरी गेट, ओल्ड दिल्ली सेंट्रल जेल, कुदसिया बाग, पुराना दिल्ली रेलवे स्टेशन और दरियागंज शामिल हैं, जहां उन्होंने और उनके साथियों ने क्रांतिकारी गतिविधियां संचालित कीं।

Shaheed Diwas Bhagat Singh Revolutionary Places in Delhi Historical Journey
दिल्ली में भगत सिंह से जुड़ी ऐतिहासिक जगहें - फोटो : Amar ujala
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विस्तार

Bhagat Singh Revolutionary Places in Delhi: हर साल 23 मार्च को शहीद दिवस मनाया जाता है। यह वह दिन है, जब अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आंदोलन करने वाले तीन क्रांतिकारियों से डरकर ब्रिटिश अदालत ने उन्हें फांसी की सजा दी थी। 23 मार्च 1931 को भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरू देश के लिए हंसते हंसते फांसी के फंदे से झूल गए थे। 

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जब भी शहीद दिवस आता है, देशभर में भगत सिंह, सुखदेव थापर और शिवराम राजगुरु की यादें ताजा हो जाती है। ये यादें दिल्ली में भी मौजूद हैं। राजधानी दिल्ली आज़ादी की उस क्रांति की गवाह है, जहां हर गली और हर इमारत एक कहानी सुनाती है। दिल्ली की कई जगहों पर भगत सिंह और उनके साथी क्रांतिकारियों ने मिलकर आंदोलन की रणनीति बनाई थी। आइए चलते हैं एक ऐसी यात्रा पर, जहां इतिहास आज भी सांस लेता है।
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  • फिरोज शाह कोटला फोर्ट

यह किला यह क्रांति की गुप्त बैठकों का केंद्र हुआ करता था। यह स्थान सिर्फ एक ऐतिहासिक स्मारक नहीं, बल्कि क्रांतिकारियों की गुप्त बैठकों का अड्डा था। यहीं पर हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन की बैठकों में अंग्रेजों के खिलाफ योजनाएं बनाई जाती थीं। आज भी यहां खड़े होकर आप उस दौर की बेचैनी और जुनून को महसूस कर सकते हैं।

 

 

  • केंद्रीय विधानसभा 

यह वही स्थान है, जहां आजादी का सबसे लोकप्रिय और जोश जगाने वाला नारा गूंजा था, इंकलाब जिंदाबाद। 8 अप्रैल 1929 को भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने यहां बम फेंककर अंग्रेजों को जगाने का प्रयास किया। यह घटना केंद्रीय विधानसभा बम धमाके के नाम से जानी जाती है, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया।

 

 

  • कश्मीरी गेट

कश्मीरी गेट को क्रांति का प्रवेश द्वार भी कहा जाता है। पुरानी दिल्ली का यह हिस्सा कई क्रांतिकारी गतिविधियों का केंद्र रहा। यहीं से कई योजनाएं बनीं और क्रांतिकारी अंग्रेजों की नजरों से बचकर निकलते थे।
 

  • पुरानी दिल्ली केंद्रीय कारागार

क्रांतिकारियों के बलिदान की अंतिम कहानी इसी स्थान पर लिखी गई। यहीं पर भगत सिंह और उनके साथियों को कैद किया गया था। यह स्थान उनकी अंतिम यादों का साक्षी है, जहां उन्होंने हंसते-हंसते फांसी का सामना किया।
 

  • कुदसिया बाग

कुदसिया बाग में कई गुप्त मुलाकातें होती थीं। शांत माहौल में क्रांति की योजनाएं तैयार की जाती थीं, जो बाद में अंग्रेजों के खिलाफ बड़े कदम बने।
 

 

  • पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन

इसे क्रांतिकारियों की गुप्त यात्राओं का केंद्र मान सकते हैं। क्रांतिकारी अक्सर अपनी पहचान छुपाकर यहां से सफर करते थे। यह स्टेशन उनके मिशनों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था।
 

 

  • दरियागंज

दिल्ली के दरियागंज को विचारों की जन्मस्थली भी कह सकते हैं। दरियागंज वह जगह थी जहां क्रांतिकारी साहित्य छपता और फैलता था। यहां से विचारों की क्रांति पूरे देश में फैलती थी।

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