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आंगनवाड़ी सहायिका के बेटे ने PSC में गाड़ा झंडा: पांच साल असफलताएं झेली, नहीं मानी हार; बना असिस्टेंट प्रोफेसर
Tue, 22 Sep 2026 01:44 PM IST
धार ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धार
Published by: धार ब्यूरो
Updated Tue, 22 Sep 2026 01:44 PM IST
सार
धार जिले के राजगढ़ निवासी चिमन भूरिया का MPPSC के माध्यम से असिस्टेंट प्रोफेसर (वाणिज्य) पद पर चयन हुआ है। पिता के निधन और आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने 2020 से 2025 तक राज्य सेवा परीक्षा के प्रयास जारी रखे। लगातार मेहनत और असफलताओं से सीखकर उन्होंने यह सफलता हासिल की।
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धार के चिमन का चयन असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर हुआ है।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
जिले की सरदारपुर तहसील के ग्राम राजगढ़ नगर की श्री राम कॉलोनी (पुलिस थाने के पीछे) निवासी चिमन पिता स्व. कालूसिंह भूरिया, का मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) के माध्यम से असिस्टेंट प्रोफेसर (वाणिज्य) 2024, द्वितीय श्रेणी राजपत्रित अधिकारी पद पर चयन हुआ है। उनकी इस उपलब्धि से परिवार, शिक्षकों, मित्रों एवं क्षेत्रवासियों में खुशी का माहौल है।
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चिमन भूरिया ने अपनी हाई स्कूल एवं हायर सेकेंडरी की शिक्षा शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय राजगढ़ से प्राप्त की। इसके पश्चात उन्होंने स्नातक एवं स्नातकोत्तर की शिक्षा श्री राजेन्द्रशूरी शासकीय महाविद्यालय, सरदारपुर से पूरी की। वर्ष 2016 में स्नातक की शिक्षा पूर्ण करने के बाद ही उन्होंने राज्य प्रशासनिक सेवा में जाने का लक्ष्य निर्धारित कर लिया था।
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लगातार प्रयास लेकिन नहीं मानी हार
राज्य प्रशासनिक सेवा में जाने के लक्ष्य को लेकर चिमन ने वर्ष 2020 से 2025 तक MPPSC राज्य सेवा मुख्य परीक्षा में लगातार प्रयास किए। उन्होंने बताया कि इन वर्षों में उन्हें सफलता नहीं मिली, लेकिन असफलताओं को अपनी राह की बाधा नहीं बनने दिया। हर प्रयास के बाद अपनी कमियों को पहचानकर उन्होंने तैयारी में सुधार किया और अपने लक्ष्य के लिए निरंतर मेहनत जारी रखी। इसी निरंतर संघर्ष के बीच उन्होंने MPPSC के माध्यम से असिस्टेंट प्रोफेसर (वाणिज्य) के पद पर चयन हासिल कर अपनी मेहनत को सफलता में बदल दिया।
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पिता का निधन, मां बनीं संघर्ष की ताकत
चिमन ने बताया कि वर्ष 2021 में पिता स्व. कालूसिंह भूरिया के निधन के बाद परिवार को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। सीमित आर्थिक संसाधनों के बीच चिमन ने अपनी तैयारी जारी रखी। उनकी माता आंगनवाड़ी सहायिका हैं। मां के संघर्ष, त्याग और सहयोग ने उन्हें लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
चिमन ने कहा कि सफलता इस बात का उदाहरण है कि लगातार मिलने वाली असफलताओं के बावजूद यदि व्यक्ति अपने लक्ष्य के प्रति दृढ़ रहें और मेहनत जारी रखें, तो सफलता हासिल की जा सकती है। वर्ष 2020 से 2025 तक राज्य सेवा मुख्य परीक्षा में सफलता नहीं मिलने के बावजूद अपना प्रयास नहीं छोड़ा और अंततः MPPSC के माध्यम से असिस्टेंट प्रोफेसर बनने का गौरव हासिल किया।
चयन के बाद चिमन भूरिया ने कहा कि वे असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण और रोजगारोन्मुख शिक्षा देने का प्रयास करेंगे। विशेष रूप से ग्रामीण एवं आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना उनका उद्देश्य रहेगा। चिमन भूरिया की इस उपलब्धि पर परिवारजनों, शिक्षकों, मित्रों एवं क्षेत्रवासियों व जनप्रतिनिधियों ने हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई दी और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। आंगनवाड़ी सहायिका के बेटे का MPPSC के माध्यम से असिस्टेंट प्रोफेसर बनना क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणादायी उपलब्धि बन गया है।

परिवार ने किया स्वागत
