Indore: मेट्रो पर बवाल, लोगों ने रीगल पर काम रुकवाया, होलकरों की बावड़ी तोड़ने पर भड़के
इंदौर के रीगल क्षेत्र में मेट्रो काम के दौरान प्राचीन बावड़ी तोड़ने पर मचा बवाल। पर्यावरण प्रेमियों ने रुकवाया काम, अधिकारियों से मांगी अनुमति।
विस्तार
विरासत बचाने की जंग
इंदौर के प्रमुख पर्यावरण प्रेमियों ने घटना स्थल पर पहुँचकर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। उनका तर्क है कि विकास के नाम पर यदि शहर की प्राचीन और जल संचयन की विरासतों को इसी तरह उजाड़ा जाता रहा, तो इंदौर आने वाले समय में पूरी तरह बंजर और वीरान हो जाएगा। आंदोलनकारियों ने मेट्रो प्रबंधन से बावड़ी तोड़ने के आधिकारिक अनुमति पत्र की मांग की, जिस पर अधिकारियों का कहना था कि मेट्रो निर्माण कार्यों के दायरे में आने वाली संरचनाओं के लिए अलग से अनुमति की आवश्यकता नहीं होती है।
अनुमति पर तकरार
जहाँ एक ओर मेट्रो के जिम्मेदार इसे निर्माण प्रक्रिया का हिस्सा बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पर्यावरणविदों का स्पष्ट कहना है कि किसी भी प्राचीन धरोहर या जल स्रोत को नष्ट करने के लिए विशेष अनुमति लेना अनिवार्य है। बिना किसी पूर्व सूचना या पारदर्शी प्रक्रिया के इस तरह की ऐतिहासिक संरचना को तोड़ना नियमों का उल्लंघन है।
मौके पर पहुंचे दिग्गज
विरोध प्रदर्शन में शहर के जाने-माने पर्यावरणविद डॉ. डीके वाघेला, चंद्रशेखर गवली, डॉ. सुभाष बारोट और जनहित पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभय जैन शामिल हुए। इनके साथ ही समाजसेवी शकील खान और अन्य कई जागरूक नागरिक भी मौके पर मौजूद रहे। जब क्रेन के माध्यम से बावड़ी को तोड़ने की प्रक्रिया शुरू की गई, तब इन सभी लोगों ने बावड़ी के भीतर उतरकर नारेबाजी की और काम को बीच में ही रुकवा दिया।

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