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Jabalpur: 900 टन जहरीली राख पर हाईकोर्ट का सख्त रुख, सरकार से मांगी पूरी विषाक्तता की रिपोर्ट

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Thu, 23 Apr 2026 07:35 PM IST
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सार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे से निकली 900 टन राख की टॉक्सिसिटी रिपोर्ट मांगी है। साथ ही भोपाल गैस मेमोरियल के लिए कार्ययोजना पेश करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 22 जून को होगी।

Submit assessment report on the ash from the toxic waste of Union Carbide factory
जबलपुर हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की युगलपीठ जस्टिस विवेक कुमार सिंह और जस्टिस अजय कुमार निरंकारी ने पीथमपुर स्थित रामकी व री सस्टेनेबिलिटी वेस्ट मैनेजमेंट फैसिलिटी में दफन यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे से निकली लगभग 900 मीट्रिक टन राख की टॉक्सिसिटी पर विस्तृत असेसमेंट रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड फैक्टरी परिसर को सुरक्षित कर वहां भोपाल गैस मेमोरियल बनाने के लिए कार्ययोजना पेश करने को भी कहा गया है।

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गौरतलब है कि वर्ष 2004 में आलोक प्रताप सिंह ने यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे के निपटान को लेकर जनहित याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता के निधन के बाद हाईकोर्ट इस मामले की सुनवाई संज्ञान याचिका के रूप में कर रहा है। राज्य सरकार की ओर से पूर्व में प्रस्तुत रिपोर्ट में कहा गया था कि कचरे का निपटान पीथमपुर स्थित सुविधा केंद्र में कर दिया गया है, जिससे करीब 900 मीट्रिक टन राख और अवशेष उत्पन्न हुए।

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मामले में दायर एक अन्य याचिका में दावा किया गया कि राख और अवशेष में रेडियोधर्मी तत्व मौजूद हैं, जो गंभीर चिंता का विषय है। इसमें मरकरी (पारा) होने की भी बात कही गई, जिसके निपटान की उन्नत तकनीक केवल जापान और जर्मनी के पास बताई गई। याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि आबादी से मात्र 500 मीटर दूर लैंडफिलिंग की जा रही है।


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इस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने 8 अक्टूबर 2025 को दिए आदेश में आबादी के नजदीक लैंडफिलिंग पर रोक लगा दी थी, हालांकि बाद में सरकार के आवेदन पर यह आदेश वापस ले लिया गया। सरकार ने बताया कि राख की लैंडफिलिंग का कार्य पूरा हो चुका है।

पिछली सुनवाई में सरकार ने यह भी कहा कि यूनियन कार्बाइड फैक्टरी परिसर को सुरक्षित कर वहां भोपाल गैस मेमोरियल बनाया जाएगा। इस संबंध में सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने एनवायरनमेंट प्रोटेक्शन रूल्स 2025 के तहत शॉर्ट टेंडर जारी करने का निर्णय लिया है।

बैठक में परिसर की सफाई, टॉक्सिक वेस्ट हटाने, आसपास की दूषित मिट्टी और भूजल के सुधार, तथा प्लांट संरचना के डिटॉक्सिफिकेशन और डीकंटैमिनेशन पर भी चर्चा की गई। इस बीच बीजीपीएसएसएस की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी, जहां से पूरे मामले के असेसमेंट के लिए हाईकोर्ट में आवेदन करने के निर्देश दिए गए। इसके बाद बीजीपीएसएसएस ने हाईकोर्ट में हस्तक्षेप आवेदन प्रस्तुत किया, जिसे स्वीकार करते हुए युगलपीठ ने उक्त निर्देश जारी किए। मामले की अगली सुनवाई 22 जून को निर्धारित की गई है।

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