हनुमान अंश: जानिए कौन हैं आंखों से दुनिया नहीं देख पाने वाले एमपी के सुनील, फिल्म के भजन ने बना दिया सितारा
मध्य प्रदेश के सागर के अगरा गांव में रहने वाले 25 वर्षीय सुनील सिंह जन्म से दृष्टिबाधित हैं। उन्होंने अपनी सुरीली आवाज के दम पर गांव की चौपाल से बॉलीवुड तक का सफर तय किया है। हाल ही में आई फिल्म हनुमान अंश में सुनील ने भजन गाया है। अब सुनील सिंह लोधी की पहचान पूरी दुनिया में हो गई है। उनका सपना जुबिन नौटियाल के साथ गाना गाने का है।
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सुनील के परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य है। परिवार के पास करीब दो एकड़ जमीन है और पशुपालन भी आय का एक जरिया है। बचपन में सुनील के माता-पिता ने अपनी क्षमता के अनुसार उनका इलाज कराया, लेकिन उनकी आंखों की रोशनी वापस नहीं आ सकी।
हालांकि, सुनील ने अपनी शारीरिक अक्षमता को अपनी पहचान बनने नहीं दिया। स्कूल के दिनों से ही उन्होंने तंबूरा बजाना और गांव के धार्मिक आयोजनों में भजन गाना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे उनकी आवाज और गायकी गांव के लोगों के बीच पहचान बनाने लगी और संगीत उनके जीवन का सबसे बड़ा सहारा बन गया।
सुनील की जिंदगी में बड़ा बदलाव वर्ष 2019 में आया। इसी दौरान उनकी मुलाकात 'बुंदेली दुनिया' नाम का पेज चलाने वाले रोहित साहू से हुई। सुनील उन्हें प्यार से 'मामा' कहते हैं। रोहित साहू ने सुनील की प्रतिभा को पहचाना और उनके वीडियो रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर अपलोड करना शुरू किया। इसके बाद सुनील के बुंदेली गीत “दूल्हा बनकर आ गव ठेला...” को 9 लाख से अधिक लोगों ने देखा। इसके बाद उनके भजन “मोरे संकट के कटैया हनुमान...” को 2.8 करोड़ यानी 28 मिलियन से अधिक व्यूज मिले। इस भजन की लोकप्रियता ने सुनील को देशभर में पहचान दिलाई और उनकी आवाज गांव से निकलकर बड़े डिजिटल मंच तक पहुंच गई।
सुनील पहली बार रिकॉर्डिंग के सिलसिले में मुंबई पहुंचे थे। रिकॉर्डिंग पूरी होने के बाद वह रोहित साहू के साथ वर्सोवा बीच घूमने गए। वहां दोनों ने तस्वीरें खिंचवाईं और उन्हें इंस्टाग्राम पर पोस्ट कर दिया। इन तस्वीरों पर फिल्म ‘हनुमान अंश’ के निर्देशक विशाल चतुर्वेदी की नजर पड़ी। उन्होंने सुनील से संपर्क किया। इसके बाद उसी रात स्टूडियो में सुनील ने निर्देशक के सामने अपने भजन सुनाए। सुनील की आवाज निर्देशक को पसंद आई और उन्होंने भजन “मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान...” को फिल्म में शामिल कर लिया। इस तरह सोशल मीडिया पर सामने आईं कुछ तस्वीरें सुनील के लिए बॉलीवुड तक पहुंचने का जरिया बन गईं।
सुनील का ईश्वर और संगीत से जुड़ाव सिर्फ गायकी तक सीमित नहीं है। वह अपने जीवन की एक घटना को भी भगवान पर अपने अटूट विश्वास से जोड़कर देखते हैं। सुनील बताते हैं कि एक बार वह रास्ता भटक गए थे। उस दौरान उन्हें एक भंवरे की आवाज सुनाई दी। उन्होंने उस आवाज का पीछा किया और आखिरकार सही-सलामत अपने घर पहुंच गए। इस घटना के बाद ईश्वर में उनका विश्वास और मजबूत हो गया।
गांव की चौपालों से बॉलीवुड तक पहुंच चुके सुनील अब अपने अगले सपने को पूरा करना चाहते हैं। उनका सबसे बड़ा सपना देश के मशहूर गायक जुबिन नौटियाल के साथ गाना गाना है। संगीत के क्षेत्र में आगे बढ़ने के साथ सुनील अपने निजी जीवन को लेकर भी एक उम्मीद रखते हैं। वह चाहते हैं कि उन्हें ऐसी समझदार जीवनसंगिनी मिले, जो उनकी परिस्थितियों को समझे और जीवन के सफर में उनका साथ दे। सुनील की कहानी बताती है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों, प्रतिभा, मेहनत और हौसले के दम पर अपनी अलग पहचान बनाई जा सकती है। जिस आवाज के सहारे उन्होंने गांव के धार्मिक आयोजनों से शुरुआत की थी, वही आवाज आज उन्हें बॉलीवुड तक ले आई है।
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