Chandra Grahan 2026 Dos and Donts for Pregnant women: धार्मिक दृष्टि और शास्त्रों के अनुसार ग्रहण को सामान्य समय की तुलना में संवेदनशील और अशुभ प्रभाव वाला काल माना जाता है। खासकर चंद्र ग्रहण को एक प्रमुख खगोलीय घटना होने के साथ-साथ आध्यात्मिक रूप से भी विशेष महत्व दिया गया है। मान्यता है कि इस दौरान कोई भी शुभ या मांगलिक कार्य नहीं करना चाहिए। पूजा-पाठ, साधना और सतर्कता पर अधिक ध्यान देने की सलाह दी जाती है। इस दौरान विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं को सावधानी बरतने के लिए कहा जाता है। आइए जानते हैं कि चंद्र ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को कौन से काम नहीं करने चाहिए और कौन सी सावधानियां बरतनी चाहिए।
Chandra Grahan 2026: चंद्र ग्रहण में गर्भवती महिलाएं भूलकर भी न करें ये काम, शिशु पर पड़ सकता है प्रभाव
Chandra Grahan 2026: चंद्र ग्रहण को सामान्य समय की तुलना में संवेदनशील और अशुभ प्रभाव वाला काल माना जाता है। आइए जानते हैं कि चंद्र ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को कौन से काम नहीं करने चाहिए और कौन सी सावधानियां बरतनी चाहिए।
चंद्र ग्रहण क्यों माना जाता है अशुभ?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण काल में वातावरण की ऊर्जा में बदलाव आता है और नकारात्मक प्रभाव बढ़ सकते हैं। ऐसा माना जाता है कि इसका असर गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु पर अधिक पड़ सकता है। मान्यता है कि ग्रहण के समय चंद्रमा की किरणें शुद्ध नहीं मानी जातीं, इसलिए इस अवधि में अनावश्यक बाहर निकलने या सीधे चंद्रमा को देखने से बचना चाहिए।
ग्रहण के दौरान किन बातों का रखें ध्यान
मान्यता है कि ग्रहण काल में गर्भवती महिलाओं को नुकीली या धारदार वस्तुओं जैसे सुई, चाकू, कैंची आदि का प्रयोग नहीं करना चाहिए। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इनका उपयोग गर्भस्थ शिशु पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। इसके अलावा सिलाई, कढ़ाई या बुनाई जैसे कार्यों से भी दूरी बनाए रखने की सलाह दी जाती है। ग्रहण के समय अधिक विश्राम करना और सकारात्मक विचार बनाए रखना उचित माना जाता है।
ग्रहण से बचाव के धार्मिक उपाय
सिर्फ सावधानी ही नहीं, बल्कि कुछ आध्यात्मिक उपाय भी इस समय लाभकारी माने जाते हैं। इष्ट देव का स्मरण, मंत्र जप और विशेष रूप से चंद्र से संबंधित मंत्रों का उच्चारण सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करने वाला माना गया है।
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एक परंपरागत उपाय के अनुसार गर्भवती महिला अपनी लंबाई के बराबर एक धागा लेकर उसे घर में सुरक्षित स्थान पर रखे। ग्रहण समाप्त होने के बाद उस धागे को बहते जल में प्रवाहित कर देने से ग्रहण का प्रभाव कम होने की मान्यता है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।