{"_id":"6a9920600b51b3044c001843","slug":"janmashtami-2026-rare-jayanti-yog-after-15-years-know-puja-significance-date-and-shubh-muhurat-2026-09-03","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"Janmashtami 2026: 15 साल बाद जन्माष्टमी पर जयंती योग, जानें पूजा का खास महत्व, शुभ मुहूर्त","category":{"title":"Predictions","title_hn":"बोले तारे","slug":"predictions"}}
Janmashtami 2026: 15 साल बाद जन्माष्टमी पर जयंती योग, जानें पूजा का खास महत्व, शुभ मुहूर्त
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
Published by: श्वेता सिंह
Updated Thu, 03 Sep 2026 01:17 PM IST
सार
Janmashtami 2026: इस साल श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर को मनाई जाएगी। खास बात यह है कि अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का विशेष संयोग बन रहा है, जिसे धार्मिक मान्यताओं में बेहद शुभ माना जाता है। जानें जयंती योग का महत्व और पूजा का शुभ मुहूर्त।
विज्ञापन
1 of 11
जन्माष्टमी पर जयंती योग
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
Janmashtami 2026: भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का पर्व जन्माष्टमी इस वर्ष विशेष संयोग के साथ मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मध्यरात्रि में रोहिणी नक्षत्र के दौरान हुआ था। यही वजह है कि जन्माष्टमी पर अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का संयोग बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। साल 2026 में जन्माष्टमी 4 सितंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी। इस दिन भक्त व्रत रखेंगे और मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना करेंगे।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी कब है?
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर 2026, शुक्रवार को मनाई जाएगी। जन्माष्टमी की मुख्य पूजा मध्यरात्रि के निशीथ काल में करने की परंपरा है। पंचांग गणना के अनुसार इस दिन अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का विशेष संयोग बन रहा है। इसी कारण 2026 की जन्माष्टमी को धार्मिक दृष्टि से खास माना जा रहा है।
15 साल बाद क्यों खास है जन्माष्टमी का यह संयोग?
जन्माष्टमी पर अष्टमी तिथि के साथ रोहिणी नक्षत्र का मिलना भगवान श्रीकृष्ण के जन्मकाल से जुड़ी मान्यता के कारण विशेष महत्व रखता है। धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, वर्ष 2026 में ऐसा संयोग बनने से इस जन्माष्टमी को विशेष बताया जा रहा है। इसी संदर्भ में इसे जयंती योग से भी जोड़ा जा रहा है। हालांकि अलग-अलग पंचांगों और ज्योतिषीय गणनाओं में इस योग की व्याख्या अलग हो सकती है। इसलिए धार्मिक अनुष्ठान के लिए अपने क्षेत्र के पंचांग को प्राथमिकता देना उचित माना जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
4 of 11
जन्माष्टमी के संदर्भ में जयंती योग का संबंध अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के विशेष संयोग से माना जाता है।
- फोटो : instagram
क्या है जयंती योग?
जन्माष्टमी के संदर्भ में जयंती योग का संबंध अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के विशेष संयोग से माना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य मध्यरात्रि में अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के दौरान हुआ था। इसलिए जन्माष्टमी पर जब इन दोनों का संयोग बनता है, तो इसे विशेष शुभ माना जाता है।
विज्ञापन
5 of 11
निशीथ पूजा का समय लगभग रात 11:58 बजे से 12:44 बजे तक रहेगा।
- फोटो : instagram
जन्माष्टमी शुभ मुहूर्त
जन्माष्टमी की पूजा के लिए निशीथ काल सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। 2026 में पूजा का समय शहर के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। निशीथ पूजा का समय लगभग रात 11:58 बजे से 12:44 बजे तक रहेगा। मध्यरात्रि का क्षण करीब 12:21 बजे माना जा रहा है। अन्य शहरों में सूर्योदय, सूर्यास्त और स्थानीय पंचांग की गणना के कारण समय में अंतर हो सकता है।
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।